ऑनलाइन ठगी पर RBI का बड़ा फैसला: 5 दिन के अंदर करें रिपोर्ट, बैंक को लौटाना होगा आपका पूरा पैसा

ऑनलाइन ठगी पर RBI का बड़ा फैसला: 5 दिन के अंदर करें रिपोर्ट, बैंक को लौटाना होगा आपका पूरा पैसा

आज के डिजिटल दौर में यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और डेबिट-क्रेडिट कार्ड हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन डिजिटल ट्रांजैक्शन की इस रफ्तार के साथ ही साइबर अपराधियों और ऑनलाइन ठगों का जाल भी तेजी से फैला है। ऐसे में डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने वाले आम बैंक उपभोक्ताओं के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 'कस्टमर प्रोटेक्शन पॉलिसी' एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

आरबीआई के नियमों के मुताबिक, अगर आपके खाते से किसी धोखाधड़ी या तकनीकी खराबी के कारण पैसे कट जाते हैं, तो आपको 5 दिनों के भीतर बैंक को सूचित करना होगा। ऐसा करने पर 'जीरो लायबिलिटी' नियम के तहत आपको अपना पूरा पैसा वापस मिल सकता है।

'लायबिलिटी' का पूरा गणित: जानिए कब और कितना मिलेगा रिफंड

ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में रिफंड की रकम इस बात पर निर्भर करती है कि गलती किसकी थी और आपने शिकायत करने में कितना समय लगाया:

  • 1. जीरो लायबिलिटी (Zero Liability): अगर ऑनलाइन फ्रॉड बैंक के सिस्टम की चूक, तकनीकी खराबी या किसी थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण हुआ है और इसमें आपकी कोई गलती नहीं है, तो आपकी देनदारी शून्य होगी। शिकायत दर्ज होने के बाद बैंक को आपकी पूरी रकम वापस (Refund) करनी होगी।

  • 2. लिमिटेड लायबिलिटी (Limited Liability): अगर फ्रॉड होने के बाद आप बैंक को सूचना देने में देरी करते हैं (यानी 5 से 7 दिनों के बाद बताते हैं), तो आपको सीमित राहत मिलेगी। ऐसी स्थिति में नुकसान का एक तय हिस्सा ही वापस मिल पाता है और बाकी का नुकसान उपभोक्ता को खुद उठाना पड़ता है।

  • 3. फुल लायबिलिटी (Full Liability): अगर धोखाधड़ी आपकी खुद की लापरवाही की वजह से हुई है— जैसे कि आपने किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) या कार्ड का सीवीवी (CVV) नंबर शेयर कर दिया है— तो नुकसान की पूरी जिम्मेदारी आपकी होगी। ऐसे मामलों में बैंक से रिफंड मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

समय सीमा: आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार, एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद बैंक के लिए 90 दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर उसे सुलझाना और ग्राहक के रिफंड पर अंतिम फैसला लेना अनिवार्य है।

ऑनलाइन फ्रॉड होते ही तुरंत करें ये 6 काम

यदि दुर्भाग्य से आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना वक्त गंवाए मिनटों के भीतर ये कदम उठाएं:

  • तुरंत बैंक से संपर्क करें: अपने बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करके अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी दें और अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड या यूपीआई आईडी को तुरंत ब्लॉक करवाएं।

  • 1930 पर कॉल करें: भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि ठगे गए पैसों को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके।

  • क्रेडेंशियल्स बदलें: अपने सभी बैंकिंग ऐप्स, नेट बैंकिंग के पासवर्ड और यूपीआई पिन को तुरंत रीसेट (Change) करें।

  • स्टेटमेंट चेक करें: अपने बैंक स्टेटमेंट को ध्यान से देखें और फ्रॉड से जुड़े सभी ट्रांजैक्शन की डिटेल्स नोट करें।

  • सबूत सुरक्षित रखें: फ्रॉड से जुड़े मैसेज, शिकायत नंबर (Acknowledgement Number) और स्क्रीनशॉट्स को संभाल कर रखें।

  • साइबर एफआईआर: आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी थाने या ऑनलाइन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कराएं।

साइबर ठगों से बचने के मूल मंत्र

  • अपना पासवर्ड, पिन, सीवीवी या ओटीपी कभी भी किसी बैंक अधिकारी या अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

  • लॉटरी, इनाम या केवाईसी (KYC) अपडेट करने के नाम पर आने वाले अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।

  • हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही आधिकारिक बैंकिंग ऐप्स डाउनलोड करें।

  • यूपीआई के जरिए पैसे प्राप्त करने (Receive) के लिए कभी भी पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती, पिन सिर्फ पैसे भेजने (Pay) के लिए चाहिए होता है।

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