टाटा स्टील के यूके बिजनेस पर बड़ा अपडेट: पोर्ट टैलबोट में देरी से बढ़ी लागत, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी हलचल?

टाटा स्टील के यूके बिजनेस पर बड़ा अपडेट: पोर्ट टैलबोट में देरी से बढ़ी लागत, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी हलचल?

भारतीय दिग्गज स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) के यूनाइटेड किंगडम (UK) कारोबार को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेल्स स्थित पोर्ट टैलबोट (Port Talbot) स्टील प्लांट के ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट में हो रही देरी और बढ़ती लागत को देखते हुए टाटा स्टील ने ब्रिटिश सरकार से नए मल्टी-मिलियन पाउंड के वित्तीय सहायता पैकेज (Funding Package) की मांग की है। कंपनी ने हाल ही में ब्रिटेन के व्यापार और उद्योग विभाग (DBIST) के साथ इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत की है। दरअसल, 1.25 अरब पाउंड के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए ब्रिटिश सरकार ने पहले ही 500 मिलियन पाउंड का सरकारी अनुदान (Grant) मंजूर किया था, लेकिन पावर ग्रिड कनेक्शन में देरी के चलते प्रोजेक्ट की लागत में अप्रत्याशित उछाल आया है, जिससे ब्रिटेन के स्टील सेक्टर में एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

ग्रिड कनेक्शन में अड़चन: 2028 का लक्ष्य खिसककर 2029 पहुंचने की आशंका

पोर्ट टैलबोट के पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस को बंद कर उसकी जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) लगाने का काम तय समय सीमा से पिछड़ता नजर आ रहा है। मूल योजना के अनुसार, इस नए ग्रीन स्टील फर्नेस को साल 2028 की शुरुआत तक पूरी तरह चालू हो जाना था। हालांकि, नेशनल ग्रिड से आवश्यक उच्च क्षमता वाली बिजली आपूर्ति (Grid Connection) हासिल करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण अब इसके संचालन की समय-सीमा देर 2028 या 2029 की शुरुआत तक खिसक गई है। इस देरी का सीधा मतलब यह है कि जब तक नया फर्नेस काम करना शुरू नहीं करता, तब तक कंपनी को होने वाले संभावित राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही, निर्माण सामग्री और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के खर्चों में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी भरपाई के लिए कंपनी ब्रिटिश टैक्सपेयर्स से अतिरिक्त फंड की उम्मीद कर रही है।

सस्ते चीनी और एशियाई स्टील से बढ़ता दबाव, यूके ऑपरेशंस पर पुरानी चुनौती

टाटा स्टील के यूके कारोबार का वित्तीय स्वास्थ्य पिछले कई वर्षों से विश्लेषकों और निवेशकों के लिए चिंता का विषय रहा है। कंपनी के शीर्ष अधिकारी पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि ब्रिटेन सस्ता और डंप किया हुआ स्टील आयात करने का अड्डा बन चुका है, जिससे घरेलू स्तर पर बने स्टील की मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुई है। वियतनाम, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों से आने वाले सस्ते आयात ने बाजार में कीमतों पर भारी दबाव बनाया हुआ है। पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस बंद होने के बाद कंपनी पहले ही कई नौकरियों में कटौती के कठिन दौर से गुजरी है। ऐसे माहौल में यदि ब्रिटिश सरकार से त्वरित वित्तीय राहत नहीं मिलती है, तो टाटा स्टील के यूके ऑपरेशंस की रिकवरी में और अधिक समय लग सकता है, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट पर लंबे समय तक दबाव बना रह सकता है।

सोमवार को बाजार खुलते ही शेयर में दिखेगा रिएक्शन? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी सत्र शुरू होते ही टाटा स्टील के शेयरों पर इस खबर का असर देखने को मिल सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक इस खबर को दो दृष्टिकोणों से आंक सकते हैं। नकारात्मक पहलू यह है कि पोर्ट टैलबोट प्रोजेक्ट में देरी से कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) खिंच सकता है और विदेशी कारोबार का घाटा कम होने में उम्मीद से ज्यादा वक्त लगेगा। वहीं सकारात्मक पहलू यह हो सकता है कि यदि यूके सरकार अपनी घरेलू स्टील संप्रभुता और हजारों नौकरियों को बचाने के लिए नए फंडिंग पैकेज पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो कंपनी के सिर से वित्तीय जोखिम का बड़ा बोझ हल्का हो जाएगा। तकनीकी चार्ट्स पर मेटल इंडेक्स और खासकर टाटा स्टील के शेयरों में सोमवार को शुरुआती उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने के संकेत हैं, इसलिए ट्रेडर्स और निवेशकों को बाजार की दिशा और यूके सरकार के आधिकारिक बयान पर करीबी नजर रखनी होगी।

Latest Posts