शेयर बाजार में महंगे वैल्यूएशन ने बढ़ाई टेंशन: 155 साल में दूसरी बार बना ऐसा माहौल, वॉरेन बफेट ने भी निवेशकों को किया अलर्ट

शेयर बाजार में महंगे वैल्यूएशन ने बढ़ाई टेंशन: 155 साल में दूसरी बार बना ऐसा माहौल, वॉरेन बफेट ने भी निवेशकों को किया अलर्ट

वैश्विक शेयर बाजारों में इस समय तेजी का दौर भले ही निवेशकों को उत्साहित कर रहा हो, लेकिन वैल्यूएशन के मोर्चे पर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उन्होंने बाजार विश्लेषकों और दिग्गजों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स S&P 500 का साइक्लिकली एडजस्टेड प्राइस-टू-अर्निंग्स (CAPE Ratio या Shiller PE) बढ़कर लगभग 41 के स्तर पर पहुंच गया है। वित्तीय इतिहास के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पिछले 155 वर्षों में सीएपीई रेशियो का ऐतिहासिक औसत करीब 17.8 रहा है। 155 साल के लंबे रिकॉर्ड में यह केवल दूसरी बार है जब बाजार का वैल्यूएशन 40 के स्तर को पार कर गया है। इससे पहले साल 2000 में 'डॉट-कॉम बबल' (Dot-Com Bubble) के चरम के दौरान यह रेशियो 44 तक पहुंचा था, जिसके बाद वॉल स्ट्रीट से लेकर वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली थी। आसान शब्दों में कहें तो सीएपीई रेशियो यह दर्शाता है कि किसी कंपनी या पूरे इंडेक्स के शेयर अपनी वास्तविक आय (Earnings) के मुकाबले कितने महंगे या सस्ते कारोबार कर रहे हैं।

वॉरेन बफेट ने जताई चिंता: 'बाजार अब कसीनो से जुड़े चर्च जैसा नजर आ रहा है'

'ओरेकल ऑफ ओमाहा' के नाम से मशहूर दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने भी मौजूदा बाजार की अत्यधिक सट्टेबाजी और बेलगाम खरीदारी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बफेट ने मौजूदा बाजार के माहौल की तुलना एक ऐसे चर्च से की है जिसके साथ कोई कसीनो जुड़ा हो। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में लोगों को शेयर बाजार में जुआ खेलने के मूड में इतना ज्यादा सक्रिय पहले कभी नहीं देखा। जब बाजार में फंडामेंटल्स, कंपनियों के मुनाफे और कैश फ्लो को नजरअंदाज कर केवल हाइप और मोमेंटम के दम पर शेयरों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, तो जोखिम का दायरा सबसे बड़े स्तर पर पहुंच जाता है। बफेट का मानना है कि निवेशक अक्सर यह भूल जाते हैं कि बाजार हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलता और अस्वाभाविक रूप से ऊंचे वैल्यूएशन का अंत अंततः तीखे करेक्शन के रूप में ही होता है।

रिकॉर्ड कैश पर बैठी बर्कशायर हैथवे और बफेट का चेयरमैन पद छोड़ना

वॉरेन बफेट की कंपनी बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) की हालिया रणनीतियां भी बाजार के इस खतरे की गवाही दे रही हैं। कंपनी ने पिछले कुछ समय से इक्विटी मार्केट में नई आक्रामक खरीदारी करने के बजाय अपनी हिस्सेदारियों को हल्का किया है और कंपनी का कैश रिजर्व रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। बफेट की यह नीति रही है कि जब बाजार बहुत सस्ता होता है तो वे खरीदारी करते हैं, लेकिन जब वैल्यूएशन असहज रूप से महंगे हो जाते हैं तो वे नगदी (Cash) को सुरक्षित रखना पसंद करते हैं। इसके साथ ही एक अन्य बड़े घटनाक्रम में 96 वर्षीय वॉरेन बफेट ने 50 साल से अधिक समय तक बर्कशायर हैथवे का चेयरमैन पद संभालने के बाद यह जिम्मेदारी अपने बेटे हावर्ड बफे को सौंपने का निर्णय लिया है, जबकि वे स्वयं मानद चेयरमैन और निदेशक के रूप में मार्गदर्शक की भूमिका में बने रहेंगे।

बफेट इंडिकेटर भी खतरे के निशान पर, निवेशकों के लिए क्या है सबक?

सिर्फ सीएपीई रेशियो ही नहीं, बल्कि 'बफेट इंडिकेटर' (कुल बाजार पूंजीकरण और देश की जीडीपी का अनुपात) भी ऐतिहासिक रूप से 'सिग्निफिकेंटली ओवरवैल्यूड' (अत्यधिक महंगा) स्तर पर पहुंच चुका है। जब शेयर बाजार का कुल मूल्यांकन देश की समग्र अर्थव्यवस्था के आकार से बहुत आगे निकल जाता है, तो भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की दर सीमित या नकारात्मक होने की आशंका बढ़ जाती है। भारतीय बाजार (निफ्टी और सेंसेक्स) भी वैश्विक स्तर पर सबसे महंगे वैल्यूएशन वाले बाजारों में गिने जा रहे हैं। ऐसे समय में खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि वे किसी भी शेयर में केवल हालिया रिटर्न देखकर आंख मूंदकर पैसा न लगाएं। पोर्टफोलियो का उचित विविधीकरण (Diversification), एकमुश्त निवेश के बजाय सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का सहारा लेना और क्वालिटी लार्जकैप व सुरक्षित एसेट क्लास में संतुलन बनाए रखना ही इस तरह के अत्यधिक महंगे दौर में पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

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