'ग्राम चिकित्सालय' फेम अमोल पाराशर पहुंचे 'चलो संसद' प्रोटेस्ट, जंतर-मंतर से छात्रों के समर्थन में लिखी भावुक पोस्ट
अमेजन प्राइम वीडियो की चर्चित वेब सीरीज 'ग्राम चिकित्सालय' में मुख्य भूमिका निभाने वाले मशहूर अभिनेता अमोल पाराशर (Amol Parashar) हाल ही में नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर आयोजित 'चलो संसद' छात्र विरोध प्रदर्शन (Chalo Sansad Protest) में शामिल हुए। एक्टर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट शेयर कर इस बात की जानकारी दी और बताया कि वे बिना किसी मीडिया कवरेज या पब्लिसिटी के चुपचाप छात्रों का समर्थन करने पहुंचे थे।
'मास्क और कैप में भी छात्रों ने पहचान लिया'
अमोल पाराशर ने बताया कि वे 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचे थे ताकि लाइमलाइट मुद्दे से न भटके।
"एक मिडिल क्लास परिवार में पले-बढ़े होने के कारण मैं शिक्षा की कीमत और महत्व को बखूबी समझता हूं। मैं वहां किसी मंच या भाषण के लिए नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में युवाओं को सुनने और उनका हौसला बढ़ाने गया था। मास्क, कैप और सनग्लासेस पहनने के बावजूद कुछ छात्रों ने मुझे पहचान लिया, लेकिन उन्होंने मुस्कुराकर और हैंडशेक कर मेरी प्राइवेसी का पूरा सम्मान किया।" - अमोल पाराशर (अभिनेता)
जंतर-मंतर पर अमोल ने क्या देखा? प्रमुख बातें
-
छात्रों का अनुशासित बर्ताव: अमोल ने लिखा कि दिल्ली जैसे शहर में जहां भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा चिंता का विषय होती है, वहां हजारों की भीड़ के बावजूद महिलाओं के प्रति एक भी दुर्व्यवहार या बदतमीजी की घटना देखने को नहीं मिली।
-
सहानुभूति और मदद का माहौल: प्रदर्शनकारी युवा एक-दूसरे का ख्याल रख रहे थे। बिना किसी स्वार्थ के लोग कचरा साफ कर रहे थे और दूसरों को राहत पहुंचाने में लगे थे।
-
सिर्फ NEET उम्मीदवार नहीं थे: एक्टर ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ केवल NEET एस्पिरेंट्स की नहीं थी, बल्कि उसमें विभिन्न कॉलेजों, स्ट्रीम्स और कोर्सेस के छात्र शामिल थे जो देश में पारदर्शी परीक्षा प्रणाली (Fair Exam System) और सरकारी जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
पुलिस कार्रवाई से पहले उम्मीद और सपने
अमोल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई से कुछ घंटे पहले माहौल में कोई नफरत या हिंसा नहीं थी, बल्कि युवाओं की आंखों में देश और अपनी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सपने और उम्मीदें थीं। उन्होंने तंज भरे लहजे में लिखा कि युवाओं का यह आपसी सहयोग और निस्वार्थ बर्ताव प्रेरणादायक था।