बिना बैंक खाते के भी बच्चे चलाएंगे Paytm UPI! स्कूल-कॉलेज कैंटीन और मेट्रो में पेमेंट के लिए लॉन्च हुआ धांसू फीचर, देखें प्रोसेस
आज के डिजिटल युग में कैश जेब में रखने का चलन लगभग खत्म होता जा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर कॉलेज के टीनेजर्स तक, सभी को रोजाना कैंटीन, ऑटो, मेट्रो या स्टेशनरी की दुकान पर पैसों की जरूरत पड़ती है। लेकिन, उम्र छोटी होने और वित्तीय समझ की कमी के कारण माता-पिता बच्चों का बैंक अकाउंट खुलवाने या उन्हें गूगल पे-पेटीएम जैसे ऐप्स देने से हिचकिचाते हैं।
बच्चों की इसी जरूरत और माता-पिता की चिंता को दूर करने के लिए दिग्गज फिनटेक कंपनी पेटीएम (Paytm) ने एक बेहद कमाल की सुविधा शुरू की है, जिसे पॉकेट मनी (UPI Circle) नाम दिया गया है। इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए नाबालिग (Minor) बच्चे बिना खुद का बैंक अकाउंट खुलवाए भी आसानी से यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं, वह भी सीधे अपने माता-पिता की निगरानी में।
आखिर क्यों पड़ी इस पॉकेट मनी फीचर की जरूरत?
आमतौर पर टीनेजर्स को जब भी कोई ऑनलाइन पेमेंट करना होता है, तो उन्हें घर पर फोन करके ओटीपी (OTP) मांगना पड़ता है या फिर दुकानदार का क्यूआर (QR) कोड व्हाट्सएप पर भेजकर पैसे ट्रांसफर करवाने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही बच्चे अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए भी पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर रहते हैं।
पेटीएम का यह नया फीचर बच्चों को आत्मनिर्भर बनाता है। अब वे कहीं भी कभी भी अपनी जरूरत का भुगतान खुद कर सकते हैं, जबकि उनके द्वारा खर्च किए जा रहे हर एक पैसे का रीयल-टाइम (तुरंत) कंट्रोल और नोटिफिकेशन माता-पिता के पास रहता है।
कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम?
बिना बैंक खाते के बच्चों के मोबाइल में यूपीआई एक्टिवेट करने की प्रक्रिया बेहद आसान और सुरक्षित है:
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अकाउंट लिंकिंग: सबसे पहले माता-पिता (या परिवार का कोई भी मुख्य यूपीआई यूजर) अपने पेटीएम ऐप के जरिए 'UPI Circle' या 'Pocket Money' विकल्प में जाकर बच्चे के मोबाइल नंबर को अपने बैंक खाते से लिंक कर देते हैं।
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पेमेंट की आजादी: लिंक होने के बाद, बच्चा अपने खुद के मोबाइल फोन में पेटीएम ऐप खोलकर किसी भी दुकान पर सीधे स्कैन करके पेमेंट कर सकता है।
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प्राइमरी यूजर का अप्रूवल: इसमें दो तरह के विकल्प मिलते हैं—पहला यह कि बच्चा पेमेंट इनिशिएट करेगा और माता-पिता अपने फोन से अप्रूव करेंगे, और दूसरा यह कि माता-पिता एक फिक्स लिमिट सेट कर देंगे जिसके तहत बच्चा बिना बार-बार अप्रूवल के सीधे पेमेंट कर सकेगा।
सुरक्षा के कड़े नियम: माता-पिता के पास रहेगा पूरा रिमोट कंट्रोल
पेटीएम ने इस फीचर को डिजाइन करते समय बच्चों की सुरक्षा और माता-पिता के डर को पूरी प्राथमिकता दी है। अनियंत्रित खर्चों को रोकने के लिए इसमें कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं:
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मासिक खर्च की सीमा (Monthly Limit): इस फीचर के तहत कोई भी बच्चा एक महीने में अधिकतम ₹15,000 से ज्यादा का खर्च नहीं कर सकता। माता-पिता इस सीमा को अपनी इच्छा के अनुसार घटाकर ₹1000 या ₹2000 भी सेट कर सकते हैं।
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सिंगल ट्रांजैक्शन लिमिट: सुरक्षा के लिहाज से बच्चा एक बार में अधिकतम केवल ₹5,000 तक का ही सिंगल पेमेंट कर सकता है।
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कैश और इंटरनेशनल पेमेंट ब्लॉक: इस यूपीआई आईडी का इस्तेमाल करके एटीएम या किसी अन्य जरिए से कैश (नकद) नहीं निकाला जा सकता। इसके अलावा, इससे कोई भी इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) ट्रांजैक्शन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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शुरुआती पाबंदियां: सुरक्षा कारणों से सर्विस शुरू होने के शुरुआती दिनों में खर्च करने और ट्रांजैक्शन की संख्या पर कुछ अतिरिक्त सीमाएं लागू रहती हैं। साथ ही, बच्चे के फोन में स्क्रीन लॉक या पासवर्ड होना अनिवार्य है।
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तुरंत एक्सेस बंद करने की सुविधा: अगर माता-पिता को लगता है कि बच्चा पैसों का गलत इस्तेमाल कर रहा है, तो वे अपने फोन से सिंगल क्लिक में इस फीचर को तुरंत ब्लॉक या डीएक्टिवेट कर सकते हैं।
बच्चों में बढ़ेगी वित्तीय समझ और बजटिंग की आदत
यह फीचर सिर्फ पेमेंट का जरिया नहीं है, बल्कि यह बच्चों को कम उम्र से ही फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता) सिखाने का एक बेहतरीन टूल है। जब बच्चे एक सीमित पॉकेट मनी के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन करते हैं, तो उन्हें पैसों की वैल्यू समझ में आती है। डिजिटल पेमेंट होने के कारण ऐप में हर एक खर्च की पूरी हिस्ट्री और रिकॉर्ड सेव रहता है, जिससे बच्चे महीने के अंत में खुद देख सकते हैं कि उन्होंने कहां कितना खर्च किया। इससे उनमें बचपन से ही बजट बनाने और समझदारी से पैसे खर्च करने की आदत विकसित होती है।