डेयरी खोलिए, सरकार देगी ₹11.80 लाख सब्सिडी! यूपी की नई योजना बदलेगी किसानों की किस्मत
कानपुर/लखनऊ ब्यूरो: यदि आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और खेती-किसानी के साथ-साथ एक मुनाफेदार डेयरी व्यवसाय शुरू करने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के तहत मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना, दूध उत्पादन बढ़ाना और सबसे महत्वपूर्ण— स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण के साथ किसानों की आय को दोगुना करना है। इस योजना के तहत नई डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए सरकार किसानों को ₹11.80 लाख तक की भारी-भरकम सब्सिडी दे रही है।
50% सब्सिडी देगी योगी सरकार, सिर्फ 15% करना होगा खुद का निवेश
योजना के तहत 10 स्वदेशी नस्ल की गायों वाली एक आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित करने का खाका तैयार किया गया है, जिसकी कुल परियोजना लागत ₹23.60 लाख निर्धारित की गई है। सरकार इस कुल लागत पर पूरे 50 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹11.80 लाख की सब्सिडी सीधे लाभार्थी को देगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि किसान को अपनी जेब से कुल लागत का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा ही निवेश करना होगा, जबकि बची हुई 35 प्रतिशत राशि के लिए बैंक लोन (Bank Loan) की आसान सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों पर भी आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
दो आसान किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) में आएगा पैसा
भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार सब्सिडी की यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजेगी। यह राशि दो किस्तों में जारी की जाएगी:
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पहली किस्त: जब किसान डेयरी का शेड और अन्य बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार कर लेगा।
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दूसरी किस्त: डेयरी के लिए स्वदेशी नस्ल की गायों की खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद।
सिर्फ इन 3 स्वदेशी नस्लों पर मिलेगा लाभ, बीमा और टैगिंग अनिवार्य
इस योजना के तहत केवल उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों को ही पालने की अनुमति होगी, जिनमें मुख्य रूप से साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्लें शामिल हैं। सरकार की शर्त है कि इन गायों को उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों या अन्य राज्यों से खरीदा जाए ताकि राज्य में दूध की गुणवत्ता सुधरे। खरीदी जाने वाली गाय पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली होनी चाहिए, जिसका प्रसव पिछले 45 दिनों के भीतर हुआ हो। इसके साथ ही, पशुधन की सुरक्षा के लिए सभी गायों का पशु बीमा (Animal Insurance) और ईयर टैगिंग (Ear Tagging) कराना अनिवार्य होगा।
जमीन से लेकर अनुभव तक, ये हैं जरूरी पात्रता शर्तें
योजना का लाभ उठाने के लिए पशुपालन विभाग ने कुछ कड़े और जरूरी मानक तय किए हैं:
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अनुभव: आवेदक के पास कम से कम 3 वर्ष का गाय या भैंस पालन का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए, जिसका प्रमाण पत्र मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) द्वारा जारी किया गया हो।
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जमीन की उपलब्धता: डेयरी यूनिट निर्माण के लिए कम से कम 0.20 एकड़ जमीन और पशुओं के लिए हरे चारे की खेती हेतु 0.80 एकड़ जमीन होना आवश्यक है। यह जमीन खुद की, पैतृक या न्यूनतम 7 वर्ष के लीज एग्रीमेंट पर होनी चाहिए और वहां जलभराव की समस्या नहीं होनी चाहिए।
इन योजनाओं के लाभार्थियों को नहीं मिलेगा दोबारा मौका
सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए उन नए किसानों को जोड़ना है जिन्हें अब तक सरकारी मदद नहीं मिली है। इसलिए, यदि किसी किसान ने पहले सरकार की कामधेनु योजना, मिनी/माइक्रो कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना का लाभ लिया है, तो वे इस योजना के लिए अपात्र माने जाएंगे।
आवेदन की प्रक्रिया और ई-लॉटरी से भाग्य का फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही इस योजना के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत करने जा रही है। जब तक ऑनलाइन व्यवस्था शुरू नहीं होती, तब तक इच्छुक किसान अपने जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) के कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से या पंजीकृत डाक (Registered Post) के माध्यम से अपना ऑफलाइन आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं। यदि जिले में निर्धारित कोटे से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ई-लॉटरी (E-Lottery) के जरिए भाग्यशाली लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।