'टॉक्सिक' पर छिड़ी बहस के बीच रॉकी भाई के सपोर्ट में उतरे 'उरी' और 'धुरंधर' फेम डायरेक्टर आदित्य धर, तारीफ में लिखा लंबा नोट

'टॉक्सिक' पर छिड़ी बहस के बीच रॉकी भाई के सपोर्ट में उतरे 'उरी' और 'धुरंधर' फेम डायरेक्टर आदित्य धर, तारीफ में लिखा लंबा नोट

कन्नड़ सिनेमा के पैन-इंडिया सुपरस्टार यश की महत्वाकांक्षी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' को लेकर सिनेमा जगत और सोशल मीडिया पर चल रही तीखी बहसों के बीच अब हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित और विजनरी फिल्ममेकर्स में शुमार आदित्य धर खुलकर यश के समर्थन में उतर आए हैं। 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' और 'आर्टिकल 370' जैसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता व ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्देशक व निर्माता आदित्य धर ने यश की बोल्ड चॉइस और सिनेमाई जोखिम उठाने के जज्बे की सार्वजनिक रूप से जमकर सराहना की है। एक ऐसे समय में जब फिल्म के डार्क टोन, भारी हिंसा और वीकडेज में कलेक्शन की गति को लेकर कुछ हलकों में आलोचनात्मक समीक्षाएं आ रही हैं, आदित्य धर का यह मजबूत समर्थन न केवल फिल्म इंडस्ट्री के भीतर भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है, बल्कि सिनेप्रेमियों के बीच एक नए उत्साह का संचार भी कर रहा है।

आदित्य धर, जो इन दिनों रणवीर सिंह, संजय दत्त और आर. माधवन जैसे दिग्गजों के साथ अपनी आगामी एक्शन-ड्रामा फिल्म 'धुरंधर' को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं, उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक लंबा और विचारोत्तेजक नोट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि 'केजीएफ चैप्टर 2' जैसी ऐतिहासिक और 1200 करोड़ी ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद यश के पास सुरक्षित रास्ता चुनने के सैकड़ों विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने एक सुरक्षित फॉर्मूला फिल्म बनाने के बजाय जोखिम उठाया और एक लीक से हटकर कहानी को अपना कंधा दिया। आदित्य धर के इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर प्रशंसकों की जबर्दस्त प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। फैंस अब दोनों रचनात्मक दिग्गजों से एक साथ आने और भारतीय सिनेमा के लिए एक विशाल महाकाव्य प्रोजेक्ट पर मिलकर काम करने की जोरदार मांग कर रहे हैं।

आदित्य धर का भावुक पोस्ट: 'साहस और सिनेमाई विजन की मिसाल हैं यश'

आदित्य धर ने अपने विस्तृत पोस्ट में यश की कलात्मक ईमानदारी और सिनेमा के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करते हुए लिखा कि एक सच्चे कलाकार की पहचान केवल उसकी बॉक्स ऑफिस सफलताओं से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने शिखर पर पहुंचकर सिनेमा की सीमाओं को कितना आगे धकेलने का साहस रखता है। उन्होंने लिखा कि अक्सर जब कोई अभिनेता इतना बड़ा पैन-इंडिया स्टार बन जाता है, तो वह उसी फॉर्मूले को दोहराने लगता है जिसने उसे सफलता दिलाई थी। अधिकांश सितारे सुरक्षित दायरे में रहकर केवल वही फिल्में करते हैं जो पहले से जांची-परखी होती हैं।

लेकिन यश ने 'टॉक्सिक' में निर्देशक गीतू मोहनदास जैसे एक इंडिपेंडेंट और आर्ट-हाउस विजन रखने वाले फिल्ममेकर पर भरोसा जताया और एक डार्क, अनकंवेंशनली जटिल और रॉ कहानी को वैश्विक स्तर पर पेश किया। आदित्य धर ने लिखा कि यह एक ऐसा सिनेमाई प्रयोग है जिसकी जितनी सराहना की जाए कम है। उन्होंने कहा कि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े आते-जाते रहते हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने के लिए ऐसे ही साहसी स्टार्स और कहानियों की जरूरत है। धर ने यश के ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस, उनकी ऊर्जा और पर्दे पर 'राया' और 'टिकट' के किरदारों में उनके अप्रतिम रूपांतरण की खुली तारीफ की।

'टॉक्सिक' पर उठे सवालों के बीच मिला बॉलीवुड के दिग्गज का साथ

26 अगस्त को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई 'टॉक्सिक' ने पहले दिन 100 करोड़ से अधिक की ऐतिहासिक कमाई के साथ शुरुआत की थी और पहले हफ्ते में दुनिया भर से 315 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया। इसके बावजूद, फिल्म के जरूरत से ज्यादा हिंसक होने, 'ए' (एडल्ट) सर्टिफिकेट के चलते परिवार के दर्शकों की सीमित उपस्थिति और जटिल स्क्रीनप्ले को लेकर सोशल मीडिया पर एक वर्ग द्वारा फिल्म को ट्रोल किया जा रहा था। फिल्म ट्रेड में भी इस बात की चर्चा थी कि क्या यश को केजीएफ की सफलता के बाद इतनी डार्क और अपरंपरागत फिल्म में कदम रखना चाहिए था।

ऐसे संवेदनशील मोड़ पर जब मुख्यधारा के कई सितारे खामोश रहते हैं, आदित्य धर का यह साहसिक कदम पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संदेश साबित हुआ है। ट्रेड एनालिस्ट्स और आलोचकों का मानना है कि आदित्य धर खुद एक ऐसे फिल्ममेकर हैं जो तकनीक, पटकथा और यथार्थवाद के मेल से 'उरी' जैसी कालजयी कृति बना चुके हैं। जब उनकी तरफ से यश की इस महत्वाकांक्षी यात्रा को सराहा गया, तो इसने 'टॉक्सिक' के रचनात्मक पक्ष को एक बहुत बड़ा बौद्धिक और नैतिक समर्थन प्रदान किया। फिल्म समीक्षकों का कहना है कि यह पोस्ट उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो केवल पहले और दूसरे दिन के बॉक्स ऑफिस ग्राफ को देखकर किसी फिल्म के पूरे सिनेमाई मूल्य को खारिज करने की जल्दबाजी करते हैं।

सोशल मीडिया पर फैंस की उठी मांग: 'यश और आदित्य धर साथ आएं, बॉक्स ऑफिस हिल जाएगा'

आदित्य धर के इस पोस्ट के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स और यश के वफादार प्रशंसकों (यश आर्मी) ने कमेंट सेक्शन में कमेंट्स का तांता लगा दिया। एक यूजर ने लिखा कि भारतीय सिनेमा में जब दो ऐसे विजनरी लोग एक-दूसरे के काम का सम्मान करते हैं, तो यह देखना बेहद सुखद होता है। वहीं हजारों फैंस ने दोनों से सीधे गुहार लगाई कि वे जल्द से जल्द एक संयुक्त प्रोजेक्ट की घोषणा करें। यूजर्स ने लिखा कि अगर आदित्य धर का सामरिक विजन, सटीक निर्देशन और ग्राउंडेड एक्शन, यश के विशाल स्क्रीन करिश्मे और लार्जर-देन-लाइफ औरा के साथ मिल जाए, तो वह फिल्म भारतीय सिनेमा के सभी पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर देगी।

कई प्रशंसकों ने आदित्य धर के उस ड्रीम प्रोजेक्ट की याद भी ताजा कर दी जो कभी बजट और विजन की विशालता के कारण टल गया था—'द इमॉर्टल अश्वत्थामा'। सोशल मीडिया पर कई सिनेमा प्रेमियों ने सुझाव दिया कि यदि आदित्य धर महाभारत के अमर योद्धा अश्वत्थामा पर आधारित उस भव्य माइथोलॉजिकल-साइंस फिक्शन महाकाव्य को फिर से पुनर्जीवित करते हैं, तो उस रोल के लिए यश से बेहतर और ताकतवर अभिनेता पूरे देश में कोई दूसरा नहीं हो सकता। प्रशंसकों का कहना था कि यश की शारीरिक बनावट, उनकी गंभीर आवाज और उनकी आंखों का आक्रोश अश्वत्थामा के उस त्रासद और शक्तिशाली चरित्र में जान फूंक देगा।

भारतीय सिनेमा में नए विजन की लड़ाई: बड़े स्टार्स और साहसी फिल्ममेकर्स का गठजोड़

आदित्य धर और यश के बीच का यह संवाद भारतीय सिनेमा के एक बड़े संक्रमण काल की गवाही देता है। पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड बनाम साउथ का जो एक कृत्रिम विभाजन खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी, वह अब पूरी तरह ध्वस्त हो रहा है। देश के सबसे रचनात्मक फिल्मकार और अभिनेता अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर केवल अच्छे सिनेमा और बड़े विजन के आधार पर एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं।

चाहे वह हिंदी पट्टी के निर्देशक का एक दक्षिण भारतीय सुपरस्टार की बोल्डनेस को सलाम करना हो, या फिर साउथ के अभिनेताओं का उत्तर भारत के यथार्थवादी निर्देशकों के काम की कद्र करना हो, यह तालमेल भारतीय सिनेमा के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। 'टॉक्सिक' को मिली इस सराहना ने साबित कर दिया है कि भले ही बॉक्स ऑफिस के उतार-चढ़ाव क्षणिक चर्चाओं का हिस्सा बनते रहें, लेकिन जब कोई अभिनेता अपनी सुरक्षित गद्दी छोड़कर सिनेमाई जोखिम उठाता है, तो इतिहास में उसकी कला को हमेशा एक साहसिक प्रयास के रूप में याद रखा जाता है। अब देखना यह होगा कि प्रशंसकों की इस दिली मुराद पर दोनों दिग्गज क्या फैसला लेते हैं और क्या आने वाले समय में यश और आदित्य धर की यह आपसी प्रशंसा एक ऐतिहासिक ऑन-स्क्रीन साझेदारी में तब्दील होती है या नहीं।

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