20-30 की उम्र में भी मंडरा रहा है कैंसर का खतरा: इन 7 शुरुआती संकेतों को मामूली समझने की भूल पड़ सकती है भारी

20-30 की उम्र में भी मंडरा रहा है कैंसर का खतरा: इन 7 शुरुआती संकेतों को मामूली समझने की भूल पड़ सकती है भारी

एक समय था जब कैंसर को केवल 50 या 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक और भारतीय स्वास्थ्य परिदृश्य तेजी से बदला है। ऑन्कोलॉजिस्ट्स (कैंसर विशेषज्ञों) के अनुसार, अब 20 से 30 वर्ष के युवाओं में भी कोलन (आंत), ब्रेस्ट, थायरॉयड, टेस्टिकुलर और ब्लड कैंसर के मामले तेजी से दर्ज किए जा रहे हैं। अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन, गतिहीन जीवनशैली (सेडेंटरी लाइफस्टाइल), देर रात तक जागना, अत्यधिक मानसिक तनाव, धूम्रपान, शराब और रासायनिक पदार्थों का संपर्क युवाओं के डीएनए और कोशिकाओं को समय से पहले नुकसान पहुंचा रहा है।

युवा अवस्था में लोग अक्सर अपने शरीर से मिलने वाले चेतावनी संकेतों को सामान्य थकान, अपच या मांसपेशियों का खिंचाव समझकर हफ्तों या महीनों तक नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारी को पहली स्टेज से तीसरी या चौथी स्टेज तक पहुंचा देती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन लक्षणों की समय पर पहचान कर ली जाए, तो 90 प्रतिशत मामलों में कैंसर का सफल और सुरक्षित इलाज संभव है।

बिना डाइटिंग और एक्सरसाइज के अचानक वजन का तेजी से घटना

यदि आप किसी प्रकार का डाइटिंग प्लान, क्रैश डाइट या जिमिंग नहीं कर रहे हैं, फिर भी एक से दो महीने के भीतर आपका 4 से 5 किलो या उससे अधिक वजन अचानक कम हो गया है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

कैंसर कोशिकाएं शरीर के सामान्य चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को चुरा लेती हैं और भारी मात्रा में पोषक तत्वों की खपत करने लगती हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में कैशेक्सिया कहा जाता है। युवा इसे अक्सर काम के तनाव या सामान्य दुबलापन समझ लेते हैं, जबकि यह पेट, आंत, अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) या फेफड़ों के कैंसर का एक प्रमुख प्रारंभिक संकेत हो सकता है।

शरीर के किसी हिस्से में गांठ या त्वचा के नीचे सख्त उभार

गर्दन, बगल (आर्मपिट), स्तन, कमर या जांघों के जोड़ों में बिना दर्द वाली किसी नई गांठ का उभरना कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

अक्सर युवाओं को लगता है कि अगर गांठ में दर्द नहीं है, तो वह नुकसानदेह नहीं होगी। सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है; कैंसर की शुरुआती गांठें आमतौर पर दर्द रहित, सख्त और अपनी जगह पर स्थिर होती हैं। 20-30 साल की युवतियों में ब्रेस्ट गांठ और युवकों में अंडकोष (टेस्टिस) में अचानक आई सूजन या गांठ टेस्टिकुलर कैंसर का संकेत हो सकती है। इसे समय पर बायोप्सी या अल्ट्रासाउंड से जांचना बेहद जरूरी है।

लगातार बना रहने वाला पेट दर्द और मल त्याग की आदतों में बदलाव

युवाओं में कोलन और रेक्टल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) के मामले चिंताजनक दर से बढ़े हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार कब्ज या दस्त की समस्या बनी रहती है, पेट में गैस और ऐंठन हफ्तों तक ठीक नहीं होती, तो इसे केवल 'आईबीएस' (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) या खान-पान की खराबी मानकर टालना जानलेवा हो सकता है।

मल में खून आना, मल का रंग अत्यधिक काला होना या शौच के बाद भी पेट खाली न होने का अहसास होना आंतों में ट्यूमर की मौजूदगी का संकेत दे सकता है। इसे अक्सर लोग बवासीर (पाइल्स) समझकर घर पर ही दवाएं लेते रहते हैं, जिससे निदान में भारी देरी हो जाती है।

भरपूर नींद के बाद भी लगातार अत्यधिक थकान और कमजोरी

दिनभर की सामान्य थकान और कैंसर से जुड़ी थकान में बहुत बड़ा अंतर होता है। यदि आप 8 से 9 घंटे की पूरी नींद ले रहे हैं, पौष्टिक भोजन कर रहे हैं, फिर भी बिस्तर से उठने की ऊर्जा नहीं बचती और शरीर हर समय टूटा हुआ महसूस होता है, तो यह सामान्य बात नहीं है।

ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और लिम्फोमा जैसी बीमारियों में अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की संख्या गिर जाती है। शरीर में खून की भारी कमी (गंभीर एनीमिया) होने से शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे युवा हर समय अत्यधिक सुस्ती और सांस फूलने की समस्या महसूस करते हैं।

त्वचा के तिलों के रंग-आकार में बदलाव और न भरने वाले घाव

शरीर या चेहरे पर मौजूद किसी तिल, मस्से या निशान का रंग अचानक गहरा काला, भूरा या लाल होने लगे, उसके किनारे असमान हो जाएं या उसका आकार तेजी से बढ़ने लगे, तो यह मेलेनोमा (स्किन कैंसर) का स्पष्ट संकेत हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, यदि मुंह में कोई छाला या घाव दो से तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, या त्वचा पर कोई खरोंच सामान्य गति से नहीं भर रही है, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ या ऑन्कोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। जो युवा तंबाकू, गुटखा या वेपिंग का इस्तेमाल करते हैं, उनमें मुंह का कैंसर शुरुआती 20 के दशक में भी तेजी से पैर पसार रहा है।

बिना स्पष्ट कारण के बार-बार बुखार और रात में पसीना आना

यदि बिना किसी मौसमी वायरल संक्रमण या फ्लू के शरीर का तापमान हल्का (लो-ग्रेड फीवर) बना रहता है, या रात को सोते समय पंखा/एसी चलने के बावजूद कपड़े भीगने जितना पसीना आता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

यह लक्षण मुख्य रूप से लिम्फोमा, ल्यूकेमिया या अन्य रक्त जनित विकारों से जुड़े होते हैं। शरीर का इम्यून सिस्टम जब कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की असफल कोशिश करता है, तो शरीर का आंतरिक तापमान बार-बार बढ़ता है। कई बार इसे सामान्य टाइफाइड या कमजोरी समझकर लोग महीनों तक टालते रहते हैं।

असामान्य रक्तस्राव: खांसी, यूरिन या पीरियड्स में भारी ब्लीडिंग

शरीर के किसी भी प्राकृतिक छिद्र से अस्वाभाविक रूप से रक्त का बहना गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है।

  • खांसी के साथ बलगम में खून का आना फेफड़ों में संक्रमण या ट्यूमर का संकेत हो सकता है।

  • पेशाब में जलन के साथ या बिना दर्द के खून दिखना ब्लैडर या किडनी से संबंधित समस्या हो सकती है।

  • युवतियों में मासिक धर्म चक्र के बीच में अचानक असामान्य ब्लीडिंग होना या संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव होना सर्वाइकल कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

युवा कैसे करें बचाव और क्या रखें सावधानियां

कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है कि अपनी जीवनशैली को नियंत्रित किया जाए और शरीर के संकेतों को लेकर सजग रहा जाए:

  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड्स, अत्यधिक चीनी और रिफाइंड ऑयल से दूरी बनाएं और हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और फाइबर युक्त आहार शामिल करें।

  • धूम्रपान, शराब, ई-सिगरेट और किसी भी रूप में तंबाकू के सेवन से पूरी तरह बचें।

  • साल में कम से कम एक बार नियमित स्वास्थ्य परीक्षण (रूटीन ब्लड टेस्ट, सीबीसी, लिवर-किडनी प्रोफाइल) अवश्य करवाएं।

  • यदि परिवार में किसी को पहले कम उम्र में कैंसर रहा है, तो डॉक्टर से मिलकर जेनेटिक काउंसलिंग और स्क्रीनिंग टेस्ट कराएं।

  • किसी भी असामान्य शारीरिक बदलाव को 2 सप्ताह से अधिक समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के न छोड़ें।

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