बच्चों की मालिश किस उम्र तक करनी चाहिए? जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह, सही तरीका और मालिश के फायदे

बच्चों की मालिश किस उम्र तक करनी चाहिए? जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह, सही तरीका और मालिश के फायदे

भारत में नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की मालिश करना दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। मालिश न केवल बच्चे के शारीरिक विकास में मदद करती है, बल्कि इससे शिशु को आराम मिलता है और उसकी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। इसके साथ ही, मालिश माता-पिता और बच्चे के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव (Parent-Baby Bonding) भी बनाती है। हालांकि, अक्सर नए माता-पिता के मन में यह सवाल उठता है कि बच्चे की मालिश आखिर किस उम्र तक की जानी चाहिए और इसे करने का सही तरीका क्या है?

आइए जानते हैं इस विषय पर बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) की राय और मालिश से जुड़े जरूरी टिप्स।

किस उम्र तक करनी चाहिए बच्चे की मालिश?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, शिशु के जन्म के पहले 1 साल तक नियमित और हल्के हाथों से मालिश करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

  • 0 से 1 साल: इस उम्र में रोजाना हल्के हाथों से मालिश करना बच्चे की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उसकी नींद बेहतर करने में बेहद असरदार होता है।

  • 1 से 3 साल: अगर 1 साल के बाद भी आपका बच्चा मालिश का आनंद लेता है, तो आप इसे 2 से 3 साल की उम्र तक जारी रख सकते हैं।

  • हालांकि, यह कोई सख्त नियम नहीं है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और चलना-भागना शुरू करता है, उसकी पसंद और जरूरत के हिसाब से मालिश का समय तय किया जा सकता है।

कब शुरू करें नवजात की मालिश?

यदि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ और 'फुल टर्म' पैदा हुआ है, तो जन्म के कुछ दिनों बाद ही हल्के हाथों से मालिश शुरू की जा सकती है।

विशेष नोट: यदि बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो (Premature Baby) या उसे जन्म के समय किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या रही हो, तो मालिश शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या पीडियाट्रिशियन की सलाह जरूर लें।

बच्चों की मालिश करने के मुख्य फायदे

नियमित और सही तरीके से की गई मालिश शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद लाभकारी होती है:

  • बेहतर नींद: मालिश से बच्चे का शरीर रिलैक्स होता है, जिससे उसे गहरी और अच्छी नींद आती है।

  • शारीरिक आराम: मालिश से मांसपेशियों का तनाव कम होता है और बच्चे की बेचैनी दूर होती है।

  • पाचन में सुधार: पेट की हल्की मालिश से गैस और पेट दर्द की समस्या में राहत मिल सकती है।

  • मजबूत बॉन्डिंग: मालिश के दौरान स्पर्श (Touch) और नजरों के संपर्क से माता-पिता और बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है।

मालिश करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

मालिश का पूरा फायदा तभी मिलता है जब इसे सही सावधानी के साथ किया जाए:

  • हल्का दबाव: मालिश हमेशा बहुत हल्के और कोमल हाथों से करें। बच्चे की नाजुक हड्डियों या जोड़ों पर ज्यादा दबाव न डालें।

  • बीमारी में मालिश न करें: अगर बच्चे को बुखार हो, वह रो रहा हो, चिड़चिड़ा हो या उसकी तबीयत ठीक न हो, तो मालिश बिल्कुल न करें।

  • त्वचा की प्रतिक्रिया: यदि मालिश के बाद बच्चे की त्वचा पर लालपन, दाने या खुजली दिखाई दे, तो तुरंत मालिश रोक दें और इस्तेमाल किए जा रहे तेल को बदलें।

मालिश के लिए कौन-सा तेल चुनें?

बाजार में कई तरह के आयुर्वेदिक और बेबी ऑयल उपलब्ध हैं। आप अपने डॉक्टर की सलाह से या बच्चे की त्वचा के प्रकार (Sensitive/Dry) के अनुसार हल्का तेल चुन सकते हैं।

  • पैच टेस्ट (Patch Test) जरूर करें: किसी भी नए तेल को पूरे शरीर पर लगाने से पहले बच्चे की कोहनी या पैर के छोटे से हिस्से पर लगाकर कुछ घंटों के लिए जांच लें कि कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा।

 

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