सोनम वांगचुक ने 25वें दिन खत्म किया अनशन: NEET मुद्दे पर इस्तीफे की मांग से लेकर छात्रों की सुरक्षा तक, कब-कब बदलीं शर्तें?

सोनम वांगचुक ने 25वें दिन खत्म किया अनशन: NEET मुद्दे पर इस्तीफे की मांग से लेकर छात्रों की सुरक्षा तक, कब-कब बदलीं शर्तें?

नई दिल्ली: देश के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 28 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुआ अपना 25 दिनों का अनिश्चितकालीन अनशन आखिरकार समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने विपक्षी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के आश्वासन के बाद यह कदम उठाया है।

NEET परीक्षा में धांधली के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन 28 जून से 22 जुलाई तक के अपने सफर में कई बार रणनीतिक बदलावों से गुजरा। शुरुआती दिनों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सीधे इस्तीफे पर अड़े वांगचुक का रुख वक्त के साथ बदलता गया।

जून से जुलाई: 25 दिनों में 3 बार कैसे बदलीं सोनम वांगचुक की मांगें?

समय / तारीख वांगचुक का रुख / मांग आंदोलन का मुख्य फोकस
1. शुरुआती मांग (28 जून) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा, कड़ा कानून और पीड़ित परिवारों को मुआवजा। इस्तीफा और जवाबदेही
2. पहला बदलाव (19 जुलाई) इस्तीफा न सही, लेकिन संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार और धांधली पर पूर्ण चर्चा का वादा। संसदीय बहस
3. दूसरा बदलाव (20 जुलाई) 'चलो संसद' मार्च में बवाल के बाद यूथ लीडर्स को संसद में बात रखने का मौका और मंत्रियों की सीधी जवाबदेही। युवा नेतृत्व की बात
4. अंतिम रुख (22 जुलाई) 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज FIR रद्द हों और उन पर कोई पुलिसिया प्रताड़ना न की जाए। छात्रों की कानूनी सुरक्षा

केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और अनशन समाप्ति का अंतिम मोड़

21 जुलाई की रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक का हाल-चाल जाना। मंत्रियों से बातचीत के बाद वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंदोलन समाप्त होने की जानकारी दी:

  • संसदीय आश्वासन: वांगचुक के अनुसार, सरकार ने मृतक छात्रों के परिवारों को उचित सहायता और संसद में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा का सकारात्मक रुख दिखाया है।

  • अंतिम शर्त: अनशन समाप्त करने की अंतिम शर्त यह रखी गई कि 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या युवा पर केस (FIR) दर्ज नहीं किया जाएगा और उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

आंदोलन का निष्कर्ष: राजनीतिक जिद से छात्र हित तक

सोनम वांगचुक का यह 25 दिवसीय अनशन भारतीय नागरिक आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है। जो आंदोलन 28 जून को "केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे" की सख्त शर्त के साथ शुरू हुआ था, वह 19 जुलाई तक "संसदीय चर्चा" पर आया और 22 जुलाई को "आंदोलनकारी छात्रों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई से बचाव" की गारंटी पर समाप्त हुआ।

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