हरियाली तीज 2026: 15 अगस्त को मनेगा शिव-पार्वती के अखंड प्रेम का पावन पर्व, जानें सुहागिनों के लिए सटीक शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत के कड़े नियम
भारत की सनातन परंपरा में सावन का महीना शिव भक्ति, उल्लास और हरियाली का प्रतीक माना जाता है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार सहित देश के कई राज्यों में इस महीने का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच जब धरती हरे रंग की चादर ओढ़ लेती है, तब सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार 'हरियाली तीज' आता है। यह पर्व केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का एक भव्य उत्सव है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आस-पास के क्षेत्रों में इन दिनों बाजारों में लहरिया साड़ियों, हरी चूड़ियों और घेवर की भारी मांग इस त्योहार की भव्यता को और भी बढ़ा देती है।
अक्सर महिलाएं इस बात को लेकर असमंजस में रहती हैं कि इस व्रत को केवल सुहागिनें ही कर सकती हैं या कुंवारी लड़कियां भी? आपको बता दें कि यह व्रत जितना सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद लेकर आता है, उतना ही यह कुंवारी कन्याओं के लिए भी फलदायी है। कुंवारी कन्याएं भगवान शिव जैसा आदर्श और योग्य जीवनसाथी पाने की कामना के साथ यह कठिन व्रत पूरे नियम और निष्ठा के साथ रखती हैं।
हरियाली तीज 2026: जानें व्रत की सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त (Date and Timings)
त्योहारों की सही तिथि को लेकर अक्सर लोगों में कंफ्यूजन रहता है। इस साल 2026 में सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की रात से हो रही है। यह तिथि अगले दिन यानी 15 अगस्त तक प्रभावी रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के लिए 'उदया तिथि' (जिस दिन तिथि सूर्योदय के समय मौजूद हो) को सबसे शुद्ध और मान्य माना जाता है। चूंकि तृतीया तिथि का सूर्योदय 15 अगस्त को हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का यह पावन व्रत 15 अगस्त 2026, दिन शनिवार को ही रखा जाएगा।
मान्यताओं और शहर के अक्षांश-देशांतर के अनुसार पूजा के शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है। वैसे तो हरियाली तीज के दिन सुबह स्नान के बाद से ही पूजा आरंभ की जा सकती है, लेकिन कई परंपराओं में महिलाएं प्रदोष काल यानी शाम के समय शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करना अधिक शुभ मानती हैं। अपने शहर के सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना एक उत्तम विकल्प है।
आखिर क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज? पढ़ें शिव-पार्वती के मिलन की अद्भुत कथा
हरियाली तीज का इतिहास और इसकी धार्मिक मान्यताएं सीधे तौर पर हिमालय पुत्री माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए अन्न और जल का त्याग कर दिया था। उन्होंने कई वर्षों तक जंगलों में रहकर कठोर तप किया। उनकी इस असीम निष्ठा, प्रेम और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन ही उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
चूंकि माता पार्वती की तपस्या इसी दिन पूर्ण हुई थी और उनका शिव जी से पुनर्मिलन हुआ था, इसलिए यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए वरदान बन गया। मान्यता है कि जो भी महिला इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करती है, माता पार्वती उसके सुहाग की रक्षा करती हैं और उसके परिवार को सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं।
हरियाली तीज की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
अगर आप चाहती हैं कि आपकी पूजा पूरी तरह से सफल हो और आपको शिव-पार्वती का आशीर्वाद मिले, तो इन सरल लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण नियमों के साथ पूजा संपन्न करें:
1. प्रात: काल का संकल्प और स्नान: व्रत वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें। पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान करें और हरे या लाल रंग के साफ, नए कपड़े पहनें। हरियाली तीज में हरे रंग का विशेष महत्व है, इसलिए हरी चूड़ियां और सोलह श्रृंगार अवश्य करें।
2. पूजा की चौकी और कलश स्थापना: घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर लकड़ी की एक चौकी रखें। उस पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा या सुंदर चित्र स्थापित करें।
3. श्रृंगार सामग्री का अर्पण: माता पार्वती को सुहाग का सामान (सोलह श्रृंगार) जैसे- सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता और लाल चुनरी अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद चंदन चढ़ाएं।
4. पंचोपचार पूजा और भोग: धूप, दीप, अक्षत (चावल) और ताजे फूल अर्पित करें। घर में बने शुद्ध सात्विक पकवानों या मिठाइयों (जैसे घेवर, मालपुआ, खीर) का भोग लगाएं।
5. व्रत कथा और आरती: हरियाली तीज की पावन कथा को पढ़ें या किसी से सुनें। कथा सुनने के बाद पूरे परिवार के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें।
व्रत के दौरान क्या करें और किन बातों का रखें खास ध्यान? (Dos and Don'ts)
आधुनिक जीवनशैली में व्रत रखने के कुछ वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलू भी हैं, जिन्हें ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस खास दिन आपको क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए:
इन शुभ कार्यों को जरूर करें:
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भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों (जैसे 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ उमामहेश्वराय नमः') का दिन भर मन ही मन जाप करते रहें।
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अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद, गरीब या किसी सुहागिन महिला को सुहाग का सामान, वस्त्र और अन्न का दान करें। दान करने से व्रत का फल दोगुना हो जाता है।
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घर के सभी बड़े-बुजुर्गों, विशेषकर सास-ससुर और माता-पिता के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें। बड़ों का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
इन बातों से करें सख्त परहेज:
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यह त्योहार प्रेम और शांति का प्रतीक है। इसलिए व्रत के दिन घर में बिल्कुल भी क्लेश न करें। किसी से भी बेवजह बहस करने, गुस्सा करने या अपशब्द बोलने से बचें। अपने मन को शांत और सात्विक रखें।
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तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) से परिवार के अन्य सदस्यों को भी दूरी बनानी चाहिए।
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सबसे महत्वपूर्ण बात: अगर आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, आप गर्भवती हैं, या आपको डायबिटीज जैसी कोई बीमारी है, तो निर्जला व्रत रखने की जिद न करें। अपने डॉक्टर और परिवार की सलाह से फलाहार (फल और दूध) लेकर ही व्रत करें। भगवान के लिए आपकी श्रद्धा आपके स्वास्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।