लखनऊ जिला अदालत में दिल्ली की महिला वकील और मुवक्किल पर हमला, SC के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख; बुलाई विशेष पीठ
लखनऊ : राजधानी लखनऊ स्थित कैसरबाग जनपद न्यायालय (Lucknow District Court) परिसर में मंगलवार को न्याय प्रणाली को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। एक सिविल मुकदमे में वकालतनामा पेश करने पहुंचे दिल्ली के वकीलों और उनके मुवक्किल के साथ कोर्ट परिसर के भीतर ही जानलेवा मारपीट और बदसलूकी की गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के हस्तक्षेप के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ (Allahabad High Court, Lucknow Bench) के मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर आनन-फानन में विशेष खंडपीठ का गठन किया गया।
जान बचाने के लिए जज के चैंबर में भागे वकील
दिल्ली से आईं महिला अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव ने अदालत को पूरी आपबीती बताई:
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विवाद की वजह: वकील दिल्ली से अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर की पैरवी करने आए थे। स्थानीय स्तर पर विरोध के चलते कोई वकील केस नहीं ले रहा था।
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हमले का आरोप: मुकदमे के प्रतिवादी और वकील सौरभ कुमार वर्मा व उसके सहयोगियों ने दिल्ली के वकीलों को रोकने की कोशिश की। विरोध करने पर वकील आशुतोष श्रीवास्तव को मुक्कों से पीटा गया और मुवक्किल शाकिर को कॉरिडोर में ले जाकर खून से लथपथ कर दिया गया।
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जज चैंबर में शरण: वकीलों और मुवक्किल को अपनी जान बचाने के लिए कोर्ट नंबर 41 के जज के चैंबर और सीढ़ियों की तरफ भागना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने बुलाई स्पेशल बेंच
घटना के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई (CJI) की पीठ के समक्ष महिला वकील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अर्जी दाखिल की। सीजेआई ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के प्रशासनिक जज जस्टिस राजन रॉय से संपर्क करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने मंगलवार शाम 7 बजे न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की विशेष खंडपीठ का गठन कर मामले पर तत्काल सुनवाई की:
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सीसीटीवी फुटेज और सबूत: सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को घटना का वीडियो दिखाया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े जिला जज लखनऊ ने सीसीटीवी फुटेज देखकर हमलावर वकीलों की पहचान की पुष्टि की।
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पुलिस कमिश्नर को निर्देश: हाईकोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर को निर्देश दिए हैं कि आरोपी वकील सौरभ कुमार वर्मा, अभय प्रताप वर्मा और हर्षित पांडे का आपराधिक इतिहास पेश करें।
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सुरक्षा और रिपोर्ट: हाईकोर्ट ने पीड़ित अधिवक्ताओं को तत्काल पर्याप्त पुलिस सुरक्षा देने और मुवक्किल शाकिर को सुरक्षित अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध
याचियों के अनुसार, संपत्ति विवाद से जुड़े इस केस में जिला अदालत के एक कर्मचारी (ज्ञान नज्म) ने वादी को बुलाने का दबाव बनाया था, जिसके बाद यह हमला हुआ। हाईकोर्ट ने पूरी घटना को न्याय प्रक्रिया में गंभीर बाधा मानते हुए बुधवार तक जिला जज और पुलिस कमिश्नर से विस्तृत व्यक्तिगत रिपोर्ट तलब की है।