पतंजलि के 50 करोड़ के मानहानि केस पर गरजे बृजभूषण शरण सिंह: बोले- 'जेल जाऊंगा, जमानत नहीं लूंगा
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच की जुबानी जंग अब कानूनी अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। पतंजलि फूड्स लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश में उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किए जाने के बाद बृजभूषण शरण सिंह का जोरदार पलटवार सामने आया है। गोंडा के नंदिनीनगर में मीडिया और समर्थकों से मुखातिब होते हुए पूर्व सांसद ने साफ कर दिया कि वे किसी भी कानूनी नोटिस या मुकदमे के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि वे अदालत में इस केस का पूरी ताकत से सामना करेंगे और यदि जनता के स्वास्थ्य और सच के हित में उन्हें कोई भी कुर्बानी देनी पड़ी, तो वे हंसते-हंसते जेल चले जाएंगे।
'अदालत जेल भेजेगी तो चला जाऊंगा, लेकिन जमानत नहीं कराऊंगा'
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका और संविधान पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, "अगर अदालत मुझे इस मामले में सजा सुनाती है और जेल भेजती है, तो मैं सहर्ष जेल चला जाऊंगा, लेकिन अपनी जमानत नहीं कराऊंगा। मेरे जेल जाने से कम से कम पूरे देश में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर एक बड़ा जन-आंदोलन और जागरूकता पैदा होगी।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में 'चर्चा, पर्चा और खर्चा' आम बात है। पहले वे अन्य प्रकरणों को लेकर चर्चा में थे, अब बाबा रामदेव की कृपा से नकली घी के मुद्दे पर फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बाबा रामदेव के चेले दुनिया को धमकाते होंगे, लेकिन वे उनसे बिल्कुल नहीं डरते।
2022 का बयान और घी की कीमत को लेकर उठाया गया पुराना विवाद
यह पूरा विवाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, जब बृजभूषण शरण सिंह ने एक जनसभा में पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे 'नकली' करार दिया था और लोगों को घर में गाय-भैंस पालकर शुद्ध दूध-घी बनाने की सलाह दी थी। हाल ही में उन्होंने इस मुद्दे को दोबारा हवा देते हुए आचार्य बालकृष्ण से हुई अपनी पुरानी बातचीत का हवाला दिया। बृजभूषण ने तर्क दिया कि यदि 1 किलो शुद्ध गाय का घी बनाने में करीब 30 किलो दूध की खपत होती है और दूध का न्यूनतम भाव 30 रुपये प्रति किलो भी मान लिया जाए, तो उत्पादन लागत ही कम से कम 900 रुपये बैठती है। उन्होंने सवाल दागा कि जो उत्पाद बनने में 900 रुपये का खर्च ले रहा है, उसे बाजार में 500 रुपये में कैसे बेचा जा सकता है? पूर्व सांसद ने दावा किया कि इसका कोई संतोषजनक जवाब कंपनी की तरफ से उन्हें कभी नहीं मिला।
पतंजलि का आरोप: 'कंपनी की ब्रांड इमेज और शेयर मूल्य को पहुंचाया गया नुकसान'
दूसरी तरफ, पतंजलि फूड्स लिमिटेड की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पैरवी कर रहे वकीलों का कहना है कि पूर्व सांसद ने बिना किसी पुख्ता आधार और वैज्ञानिक प्रमाण के सार्वजनिक मंचों पर कंपनी के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की है। पतंजलि का आरोप है कि बृजभूषण शरण सिंह के विवादित बयानों के व्यापक प्रसारण के कारण कंपनी की ब्रांड प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंची है और इसके चलते शेयर बाजार में कंपनी के शेयर मूल्य पर नकारात्मक असर पड़ा, जिससे संस्थान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर इंदौर की अदालत से शुरू होकर हाईकोर्ट पहुंचे इस मामले में 50 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का दावा ठोका गया है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए बृजभूषण शरण सिंह से अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करने को कहा है।
मिलावटखोरी के खिलाफ आर-पार की जंग का किया आह्वान
बृजभूषण शरण सिंह ने केवल कानूनी नोटिस पर ही जवाब नहीं दिया, बल्कि उन्होंने खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट को देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि देश भर में नकली मावा, नकली पनीर और मिलावटी तेल का खुला कारोबार चल रहा है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पूर्व में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों के फेल होने और अदालत द्वारा पतंजलि पर लगाए गए जुर्माने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे जनता के स्वास्थ्य और शुद्धता की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े।