राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: 11 की बजाय अब 6 जुलाई को होगी ट्रस्ट की आपात बैठक, चंपत राय के इस्तीफे पर लगेगी मुहर

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: 11 की बजाय अब 6 जुलाई को होगी ट्रस्ट की आपात बैठक, चंपत राय के इस्तीफे पर लगेगी मुहर

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft Case) को लेकर छिड़े सियासी और धार्मिक घमासान के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। इस विवाद के गहराने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले जो महत्वपूर्ण बैठक 11 जुलाई को होनी तय हुई थी, उसकी तारीख बदलकर अब 6 जुलाई 2026 कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में होने वाली इस आपात बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पूरे संगठनात्मक ढांचे को बदलने यानी पुनर्गठन (Restructuring) को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला लिया जा सकता है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर होगी निर्णायक चर्चा

इस बैठक का सबसे मुख्य एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर रहने वाला है। राम मंदिर के गर्भगृह और दानपात्र से चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद, चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर पहले ही राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। 6 जुलाई की इस बैठक में ट्रस्ट के सभी प्रमुख सदस्यों की मौजूदगी में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार करने और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला होने की पूरी उम्मीद है।

चंपत राय के करीबी 'टिन्नू यादव' के घर छापेमारी, पुलिसिया जांच तेज

इस पूरे विवाद में पुलिस की कार्रवाई भी बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने अब तक इस मुख्य आरोपी टिन्नू यादव (रमा शंकर यादव) समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

  • ज्वैलरी और दस्तावेज बरामद: गिरफ्तार आरोपियों में शामिल टिन्नू यादव, जो पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर और बेहद करीबी माना जाता है, उसके घर और अन्य ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की है। इस दौरान उसके घर से भारी मात्रा में ज्वैलरी और संदिग्ध कागजात बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि यह ज्वैलरी मंदिर के चोरी किए गए पैसों से तो नहीं खरीदी गई।

  • पुलिस ने दर्ज किया बयान: हालांकि, इस मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है, लेकिन पुलिस ने चंपत राय का आधिकारिक बयान दर्ज कर लिया है और जल्द ही अनिल मिश्रा से भी इस सिलसिले में पूछताछ की जा सकती है।

सवालों के घेरे में मंदिर की सुरक्षा और दान-गणना प्रक्रिया

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केवल इस्तीफों पर ही नहीं, बल्कि मंदिर की आंतरिक सुरक्षा और दान प्रबंधन पर भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। बैठक में कुछ मुख्य बिंदुओं पर मंथन होना तय है:

  1. राम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की रोजाना गणना (Counting Process) की मौजूदा प्रक्रिया क्या है और इसमें कहां चूक हुई?

  2. दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों और सेवादारों की नियुक्ति किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत की जाती है?

  3. भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए किस तरह का पारदर्शी और फुल-प्रूफ डिजिटल सिस्टम लागू किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में न्यायिक जांच की मांग, गरमाई सियासत

चढ़ावे में हेराफेरी के इस संवेदनशील मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट को आड़े हाथों लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने सीधा आरोप लगाया है कि सरकार इस मामले से जुड़े रसूखदार लोगों और चंपत राय को बचाने का प्रयास कर रही है। विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे महा-घोटाले की निष्पक्षता से जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की देखरेख में एक उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) बैठाई जानी चाहिए। अब पूरे देश की नजरें 6 जुलाई को अयोध्या में होने वाली इस निर्णायक बैठक पर टिकी हैं।

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