यूपी के बलरामपुर में मौसम का अजीब खेल: सितंबर की उमस में छाया जनवरी जैसा घना कोहरा, सड़कों पर थमी वाहनों की रफ्तार
उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह अप्रत्याशित और चौंकाने वाला नजर आ रहा है। सितंबर का महीना आमतौर पर तीखी धूप, चिपचिपी गर्मी और भारी उमस के लिए जाना जाता है, लेकिन तराई क्षेत्र के बलरामपुर जिले से कुदरत का ऐसा हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया जिसे देखकर स्थानीय लोग अपनी आंखों पर भरोसा नहीं कर पाए। शुक्रवार तड़के जिले के हर्रैया सतघरवा क्षेत्र में अचानक मौसम ने ऐसा पलटा खाया कि चारों तरफ जनवरी-फरवरी जैसी कड़ाके की ठंड वाला घना कोहरा पसर गया। आसमान से गिरी सफेद धुंध की इस चादर ने चंद मिनटों में पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया। जहां लोग पंखों और कूलरों की हवा में गर्मी से राहत तलाश रहे थे, वहीं सुबह-सवेरे जनवरी जैसा नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया।
राप्ती मुख्य नहर और कस्बाई इलाकों में छाई सफेद चादर, विजिबिलिटी घटी
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब छह बजे हर्रैया सतघरवा ब्लॉक के तराई क्षेत्र, विशेष रूप से राप्ती मुख्य नहर और उसके आसपास के गांवों में यह मौसमी बदलाव देखा गया। सुबह की सैर (मॉर्निंग वॉक) पर निकले ग्रामीणों और जरूरी कामकाज के लिए घरों से निकले लोगों ने देखा कि चारों ओर घनी धुंध छाई हुई है। नहर के किनारे और मुख्य मार्गों पर दृश्यता (Visibility) इतनी कम हो गई कि कुछ ही दूरी पर खड़े पेड़ और मकान ओझल हो गए। सुबह के समय अचानक छाए इस कोहरे के चलते कुछ पलों के लिए वातावरण में हल्की सिहरन और ठंडक का भी अहसास हुआ, जिससे स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
सड़कों पर थमी रफ्तार, डिपर और फॉग लाइट जलाकर रेंगते दिखे वाहन
अचानक दृश्यता कम होने का सबसे सीधा और बड़ा असर सड़क यातायात पर पड़ा। हर्रैया सतघरवा और आसपास के संपर्क मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सड़क साफ न दिखने के कारण दोपहिया, चारपहिया और मालवाहक वाहनों की गति अचानक थम गई। चालकों को संभावित हादसों से बचने के लिए दिन के उजाले में भी अपनी गाड़ियों की हेडलाइट्स और डिपर जलाकर बेहद धीमी गति से आगे बढ़ना पड़ा। नहर की पटरी से होकर गुजरने वाले वाहन चालक विशेष सावधानी बरतते हुए एक-दूसरे के पीछे कतार बनाकर रेंगते नजर आए।
धूप निकलते ही छंटा कोहरा, फिर लौटी वही पुरानी उमस भरी गर्मी
सुबह करीब सात बजे के बाद जब सूर्यदेव चमके और रोशनी तेज हुई, तो तापमान बढ़ने के साथ ही यह घना कोहरा धीरे-धीरे छंटना शुरू हुआ। करीब साढ़े सात से आठ बजे तक मौसम पूरी तरह सामान्य हो सका और सड़कों पर दृश्यता बेहतर होने के बाद वाहनों ने अपनी सामान्य रफ्तार पकड़ी। कोहरा गायब होते ही एक बार फिर सितंबर की तेज धूप और चिपचिपी उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। मौसम के इस यू-टर्न को देखकर स्थानीय बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में सितंबर के महीने में इस तरह का घना कोहरा कभी नहीं देखा था। आमतौर पर ऐसी दृश्यता दिसंबर के आखिर या जनवरी के शुरुआती हफ्तों में ही देखने को मिलती है।
मौसम वैज्ञानिकों की राय: आखिर सितंबर में क्यों बना जनवरी जैसा माहौल?
पर्यावरण और मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, तराई इलाकों में सितंबर के दौरान ऐसा कोहरा बनना एक दुर्लभ मौसमी घटना जरूर है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं। दरअसल, हाल ही में हुई बारिश के बाद मिट्टी और वायुमंडल में नमी (Humidity) का स्तर 90 प्रतिशत से भी ऊपर बना हुआ था। रात के समय खुले आसमान और हवा की गति लगभग शून्य होने के कारण तराई की ठंडी सतह पर मौजूद अत्यधिक नमी संघनित (Condense) होकर रेडिएशन फॉग (विकिरण कोहरा) में तब्दील हो गई। चूंकि राप्ती नहर के आसपास जल निकाय होने से नमी का स्तर काफी अधिक था, इसलिए वहां घने कोहरे का दायरा बन गया। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पर्यावरण में आ रहे बदलावों के चलते मौसम के मिजाज में इस तरह के असामान्य पैटर्न बार-बार दर्ज किए जा रहे हैं।