प्लेन के रास्ते जर्मनी पहुंचे खतरनाक मच्छर, एयरपोर्ट पर मलेरिया से दो कर्मचारियों की मौत के बाद मचा हड़कंप; सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे बड़े सवाल
आधुनिक दुनिया जितनी तेजी से एक-दूसरे के करीब आ रही है, उतनी ही तेजी से अदृश्य खतरे भी सीमाओं को लांघकर एक देश से दूसरे देश तक पहुँच रहे हैं। वैश्विक हवाई यात्रा ने दुनिया को एक ग्लोबल विलेज तो बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही कई तरह के जोखिम भी बढ़ गए हैं। हाल ही में जर्मनी से एक ऐसी सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर और स्वास्थ्य विभागों को नींद उड़ा दी है। जर्मनी के एक व्यस्त एयरपोर्ट पर विमान के जरिए पहुंचे घातक मच्छरों के काटने से दो एयरपोर्ट कर्मचारियों की मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने से मौत हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय कर्मचारियों में भारी रोष है और एयरपोर्ट प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाले और एयर-कंडीशंड वातावरण वाले विमानों के अंदर ये खतरनाक मच्छर कैसे जिंदा बच गए और जर्मनी की धरती पर उतरकर उन्होंने तबाही मचा दी। यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल बायो-सिक्योरिटी और एयरपोर्ट्स पर होने वाले फॉगिंग तथा सैनिटाइजेशन के दावों की पोल खोलती है।
मलेरिया के घातक लक्षण और दो कर्मचारियों की जान जाने की पूरी दर्दनाक दास्तान
मलेरिया आमतौर पर उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से जुड़ा हुआ संक्रमण माना जाता है, जहाँ एनोफिलीज मच्छर के काटने से यह बीमारी फैलती है। जर्मनी जैसे यूरोपीय देश में, जहाँ इस बीमारी का खतरा आमतौर पर नगण्य माना जाता है, अचानक दो स्वस्थ कर्मचारियों की इस बीमारी से मौत हो जाना चिकित्सीय जगत के लिए भी एक बड़ा झटका है। मिली जानकारी के अनुसार, दोनों कर्मचारी एयरपोर्ट के ग्राउंड ऑपरेशन और कार्गो हैंडलिंग से जुड़े हुए थे। वे उन विमानों के संपर्क में आए थे जो सीधे उन देशों से उड़ान भरकर आए थे जहाँ मलेरिया का प्रकोप आम है। शुरुआती दिनों में दोनों कर्मचारियों को सामान्य बुखार, कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत हुई, जिसे उन्होंने मौसम बदलने का असर या आम वायरल समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक परजीवी उनके खून में पूरी तरह फैल चुके थे और उनके महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद दोनों कर्मचारियों को बचाया नहीं जा सका। इस अचानक हुई मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और सहकर्मियों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी और स्वास्थ्य विभागों की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
इस दुखद घटना के सामने आने के बाद जर्मनी के एविएशन और हेल्थ सेक्टर में भूचाल आ गया है। कर्मचारी यूनियनों ने सीधे तौर पर एयरपोर्ट प्रबंधन और संबंधित एयरलाइंस पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के दौरान विमानों के भीतर की कीट नियंत्रण (Aircraft Disinsection) प्रक्रिया को लेकर अब कड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से आने वाले विमानों में लैंडिंग से पहले या टेकऑफ के वक्त कीटनाशकों का छिड़काव अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए ताकि इस तरह के संक्रामक कीट और मच्छर दूसरे देशों में न फैल सकें। लेकिन इस मामले में स्पष्ट रूप से यह लापरवाही सामने आई है कि या तो प्रोटोकॉल का पालन कागजों तक सीमित था या फिर छिड़काव की प्रक्रिया में भारी चूक हुई थी। एयरपोर्ट पर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक प्रबंधन उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं देता, वे काम पर नहीं लौटेंगे। इस विरोध प्रदर्शन के कारण कई उड़ानों के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक यात्रा और विमानों के जरिए फैलने वाली बीमारियों का बढ़ता खतरा और बचाव के उपाय
जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापमान में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती संख्या के कारण अब यूरोप और अन्य ठंडे देशों में भी उन बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है जो पहले केवल उष्णकटिबंधीय इलाकों तक सीमित थीं। मच्छर अब केवल स्थानीय भौगोलिक सीमाओं तक बंधे नहीं रहे हैं, बल्कि वे विमानों के कार्गो होल्ड, पैसेंजर केबिन और सामान के जरिए दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक आसानी से सफर कर रहे हैं। इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए अब दुनिया भर के एयरपोर्ट्स को अपनी बायो-सिक्योरिटी और वेक्टर सर्विलांस प्रणाली को बेहद आधुनिक और सख्त बनाने की जरूरत है। विमान कंपनियों को फ्लाइट्स के सैनिटाइजेशन और डिसइन्फेक्शन के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके अलावा, एयरपोर्ट के उन कर्मचारियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और मलेरिया जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए विशेष शिविर लगाए जाने चाहिए जो बाहरी देशों से आने वाले विमानों या कार्गो के सीधे संपर्क में रहते हैं। जर्मनी की यह दर्दनाक घटना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि यदि समय रहते सीमाओं पर स्वास्थ्य सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए, तो छोटे से दिखने वाले मच्छर भविष्य में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकते हैं।