'बात नहीं बनी तो हमला होगा': डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, कूटनीति फेल होने पर बड़े सैन्य एक्शन की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ा बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बातचीत और कूटनीति को एक अंतिम अवसर देने के इरादे से फिलहाल ईरान पर सैन्य हमलों को रोकने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि यह कूटनीतिक कोशिश विफल रहती है, तो अमेरिकी सेना एक बार फिर से व्यापक और कठोर सैन्य अभियान पर लौट आएगी। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इस बातचीत के लिए ज्यादा समय नहीं दिया जाएगा—यह प्रक्रिया या तो तेजी से आगे बढ़ेगी या फिर बिल्कुल खत्म हो जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य और नई डील पर केंद्रित वार्ता
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, वर्तमान बातचीत मुख्य रूप से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से पूरी तरह खोलने और एक व्यापक परमाणु समझौते को लेकर केंद्रित है। इस मध्यस्थता प्रक्रिया में ओमान, कतर, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देश अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका की तरफ से विशेष राजदूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस गहन कूटनीतिक चर्चा का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप ने खुलासा किया कि मध्यस्थ देशों और उनके सलाहकारों के विशेष अनुरोध पर ही उन्होंने बीते शुक्रवार को प्रस्तावित हवाई हमलों को रोका था।
ईरान का पलटवार: 'अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं, केवल ओमान से चर्चा'
दूसरी ओर, ईरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी सीधी बातचीत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान की अमेरिका से कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही है। ईरान की चर्चा केवल ओमान के साथ जारी है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की तटीय सीमाओं से जुड़ा दूसरा देश होने के नाते वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और समुद्री यातायात के लिए संयुक्त व्यवस्था बनाने में जुटा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंताएं
अमेरिका और ईरान के बीच यह कूटनीतिक रस्साकशी ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। जहां राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के जरिए तुरंत किसी समझौते तक पहुंचना चाहते हैं, वहीं ईरान के कड़े रुख को देखते हुए रास्ता काफी जटिल नजर आ रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह मध्यस्थता किसी नतीजे पर पहुंचती है या फिर मध्य पूर्व में एक नए सैन्य संघर्ष की शुरुआत होती है।