तेल होगा $200 प्रति बैरल? होर्मुज के बाद अब इस रूट पर संकट; अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यमन की धमकी
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी सैन्य तनाव के बीच अब यमन ने दुनिया की चिंता को दोगुना कर दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों (अंसारुल्लाह मूवमेंट) ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग 'बाब अल-मंडेब' (Bab al-Mandab) को पूरी तरह बंद करने की खुली धमकी दे दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये दोनों समुद्री मार्ग एक साथ ब्लॉक हुए, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को पार कर जाएंगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
यमन की सख्त चेतावनी: सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार
ईरान समर्थित अंसारुल्लाह मूवमेंट के पॉलिटिकल ब्यूरो सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने 'प्रेस टीवी' को दिए इंटरव्यू में सीधे तौर पर सऊदी अरब और अमेरिका को चेतावनी दी।
मोहम्मद अल-फराह ने कहा:
"अगर सऊदी अरब ने यमन के नागरिक बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने हमले बंद नहीं किए, तो हम एक साझा ऑपरेशनल अलायंस (सैन्य गठबंधन) के तहत बाब अल-मंडेब और होर्मुज स्ट्रेट दोनों को पूरी तरह बंद कर देंगे। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह कदम उठाना हमारी मजबूरी होगी, जिसके बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक उछल जाएंगी।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन और सऊदी अरब के बीच सीमाई दुश्मनी एक बार फिर से भड़क उठी है।
क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं ये दोनों समुद्री जलमार्ग?
वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह से इन दोनों चोकपॉइंट्स (Sankare Jalmarg) पर टिकी है:
| जलमार्ग (Strait) | दैनिक तेल प्रवाह (Daily Oil Flow) | रणनीतिक महत्व |
| होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) | ~2 करोड़ बैरल (वैश्विक खपत का 20%) | यह खाड़ी देशों (Gulf Countries) से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का इकलौता मुख्य रास्ता है। |
| बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab) | ~88 लाख बैरल (वैश्विक समुद्री व्यापार का 10-12%) | यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर (Suez Canal) का दक्षिणी प्रवेश द्वार है। इसकी चौड़ाई महज 29 किमी है। |
दोनों मार्ग बंद हुए तो क्या होगा असर?
यदि यमन और ईरान मिलकर इन दोनों रास्तों को ब्लॉक कर देते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय जहाजों और तेल टैंकरों के पास कोई सीधा रास्ता नहीं बचेगा। उन्हें एशिया से यूरोप जाने के लिए पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) के रास्ते जाना होगा।
इसके विनाशकारी परिणाम कुछ इस तरह होंगे:
-
सफर में भारी देरी: जहाजों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 12 से 15 दिन का अतिरिक्त समय लगेगा।
-
लागत में भारी बढ़ोतरी: ईंधन की खपत बढ़ने से माल ढुलाई दरें (Freight Rates) और जहाजों का बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) आसमान छूने लगेगा।
-
महा-मंदी का खतरा: कच्चे तेल, एलएनजी, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह टूट जाएगी, जिससे दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और महा-मंदी आ सकती है।