मोदी सरकार का बड़ा फैसला: विदेश सचिव विक्रम मिसरी को मिला सेवा विस्तार, अब 2027 तक संभालेंगे कमान

मोदी सरकार का बड़ा फैसला: विदेश सचिव विक्रम मिसरी को मिला सेवा विस्तार, अब 2027 तक संभालेंगे कमान

केंद्र सरकार ने भारतीय कूटनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर साझा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक, वर्तमान विदेश सचिव विक्रम मिसरी को सरकार ने एक बड़ा तोहफा दिया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, विक्रम मिसरी के कार्यकाल को अगले एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। अब वह 14 जुलाई 2027 तक या अगले आदेश तक भारत के विदेश सचिव के रूप में अपनी सेवाएं देते रहेंगे।

चीन मामलों के एक्सपर्ट और कूटनीति के माहिर खिलाड़ी

वर्ष 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विक्रम मिसरी को अंतरराष्ट्रीय मामलों, विशेषकर चीन नीति का बेहद गहरा जानकार माना जाता है। उन्होंने साल 2024 में भारत के विदेश सचिव का पदभार संभाला था और तब से देश की विदेश नीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उन्होंने जिस तरह से भारतीय नीति को दुनिया के सामने रखा, उसने काफी सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, सीजफायर के बाद उन्हें और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा था, लेकिन देश के तमाम वरिष्ठ राजनयिकों और विशेषज्ञों ने उनके समर्थन में खड़े होकर उनके काम की सराहना की थी।

गलवान संकट से लेकर उप-NSA तक का सफर

विदेश सचिव की कुर्सी संभालने से पहले विक्रम मिसरी भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Deputy NSA) के रूप में देश की सुरक्षा रणनीति को धार दे रहे थे। इससे पहले, साल 2019 से 2021 के बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में वह चीन में भारत के राजदूत थे। जब गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई और दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए, तब बीजिंग में मौजूद मिसरी ने ही दोनों देशों के बीच बातचीत के बंद रास्तों को खोलने और तनाव को कम करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनोखा अनुभव

विक्रम मिसरी का कूटनीतिक करियर बेहद शानदार और विविधता से भरा रहा है। वह स्पेन (2014-2016) और म्यांमार (2016-2018) में भारत के राजदूत रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान, अमेरिका, जर्मनी, बेल्जियम और श्रीलंका जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में भी भारत सरकार के लिए विभिन्न पदों पर काम किया है। उनके अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें देश के तीन प्रधानमंत्रियों—इंद्र कुमार गुजराल, डॉ. मनमोहन सिंह और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीधे काम करने का गौरव प्राप्त है।

क्या है नियम, जिसके तहत मिला सेवा विस्तार?

विक्रम मिसरी को मिला यह सेवा विस्तार सरकार की एक विशेष प्रशासनिक शक्ति के तहत आता है। दरअसल, फंडामेंटल रूल 56(डी) के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह रक्षा सचिव, विदेश सचिव, गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो (IB) के निदेशक और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के सचिव जैसे शीर्ष अधिकारियों को उनकी 60 साल की सेवानिवृत्ति की आयु के बाद भी सेवा विस्तार दे सकती है। सरकार ने हाल के दिनों में कई अन्य शीर्ष अधिकारियों को भी एक्सटेंशन दिया है, जिनमें आईबी चीफ तपन कुमार डेका और सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का नाम शामिल है।

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