सितंबर में शुक्र होंगे अस्त और अक्टूबर में वक्री: 52 दिनों तक इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की असीम कृपा
ज्योतिष शास्त्र में दैत्यगुरु शुक्र को धन-संपत्ति, ऐश्वर्य, विलासिता, प्रेम संबंध, कला और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। जब भी शुक्र की चाल में कोई बड़ा फेरबदल होता है, तो उसका सीधा प्रभाव मानव जीवन, व्यापार जगत और देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। पंचांगीय गणना के अनुसार, सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक शुक्र ग्रह एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली चक्र से गुजरने वाले हैं। इस दौरान शुक्र पहले अस्त होंगे और फिर वक्री (उल्टी चाल) अवस्था में गोचर करेंगे। लगभग 52 दिनों की यह अवधि खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो मेष से मीन तक सभी राशियों को प्रभावित करेगी, लेकिन 4 भाग्यशाली राशियों के लिए यह समय अपार धन लाभ और करियर में सुनहरे अवसर लेकर आएगा।
कब अस्त होंगे और कब वक्री चाल चलेंगे शुक्र?
वैदिक ज्योतिष पंचांग की गणना के अनुसार, 23 सितंबर 2026 की रात 08 बजकर 16 मिनट पर शुक्र ग्रह सूर्य के अति समीप आने के कारण अस्त हो जाएंगे। करीब 37 दिनों तक अस्त रहने के बाद शुक्र 30 अक्टूबर 2026 को पुनः उदित होंगे।
हालांकि, अस्त अवस्था के दौरान ही 3 अक्टूबर 2026 को शुक्र वक्री यानी उल्टी चाल शुरू कर देंगे। इसके बाद लगभग 42 दिनों तक वक्री रहने के उपरांत 14 नवंबर 2026 को वे मार्गी (सीधी चाल) होंगे। 23 सितंबर से लेकर 14 नवंबर तक की यह 52 दिनों की अवधि ज्योतिष में बेहद प्रभावशाली मानी जा रही है। जब कोई शुभ ग्रह अस्त या वक्री होता है, तो वह पुराने अटके कामों, पूर्व में लिए गए निर्णयों और रुके हुए धन को गति देने की क्षमता रखता है।
शुक्र के अस्त और वक्री होने का ज्योतिषीय अर्थ
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, जब कोई भी ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट पहुंचता है, तो सूर्य के तेज के कारण वह अस्त हो जाता है, जिससे उसके बाहरी प्रभाव में कुछ समय के लिए ठहराव आता है। शुक्र के अस्त होने की इस अवधि में विवाह, मुंडन या नए गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजनों पर विराम लग जाता है।
वहीं वक्री ग्रह का अर्थ उसकी उल्टी गति से होता है। वक्री अवस्था को ज्योतिष में आत्ममंथन, पुराने संपर्कों के पुनः सक्रिय होने और अधूरी योजनाओं की समीक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इस समय लिए गए समझदारी भरे फैसले व्यक्ति को अप्रत्याशित वित्तीय सफलता दिलाते हैं।
कर्क राशि: रुका हुआ पैसा लौटेगा, बढ़ेगी भौतिक सुख-संपदा
कर्क राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचरीय बदलाव आर्थिक दृष्टि से वरदान साबित होने वाला है। इस 52 दिनों के अंतराल में आपका वर्षों से अटका हुआ या फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है। जो लोग व्यापार में किसी पुराने भुगतान (पेमेंट) का इंतजार कर रहे थे, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक आकर्षण बढ़ेगा और समाज के प्रभावशाली लोगों से संपर्क स्थापित होंगे। परिवार में कुटुंब की वृद्धि और सुख-शांति का माहौल रहेगा। यदि आप वाहन, भूमि या कोई लग्जरी गैजेट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो उसमें सफलता मिलेगी। मानसिक तनाव दूर होगा और स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा।
सिंह राशि: कार्यक्षेत्र में बड़ा प्रमोशन और व्यावसायिक लाभ
सिंह राशि वालों के लिए यह समय भाग्य के पूर्ण सहयोग का संकेत दे रहा है। इस अवधि में आपके रुके हुए कार्य अचानक रफ्तार पकड़ेंगे। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों और सहकर्मियों का भरपूर समर्थन प्राप्त होगा, जिससे आपको कोई नया पद या बड़ी परियोजना सौंपी जा सकती है।
जो युवा नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें किसी प्रतिष्ठित संस्थान से बुलावा आ सकता है। कारोबारियों के लिए पुरानी रुकी हुई डील्स का फिर से शुरू होना आर्थिक मजबूती लेकर आएगा। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी और जीवनसाथी के सहयोग से कोई बड़ा वित्तीय फैसला सफल रहेगा।
धनु राशि: संचित धन में भारी वृद्धि और निवेश से मुनाफा
धनु राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन आय और बचत के नए दरवाजे खोलेगा। खर्चों पर स्वतः नियंत्रण स्थापित होगा और बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। यदि आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी संपत्ति में सोच-समझकर निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो यह अवधि शुभ फलदायी सिद्ध होगी।
पारिवारिक सदस्यों के साथ आपसी सामंजस्य बेहतर होगा और घर में किसी मांगलिक या शुभ कार्य की रूपरेखा बन सकती है। किसी पुराने प्रोजेक्ट या स्टार्टअप से जुड़े काम में अचानक बड़ा मुनाफा हो सकता है। निर्णय लेने की आपकी क्षमता मजबूत होगी।
कुंभ राशि: करियर में अप्रत्याशित उछाल और आय के नए स्रोत
कुंभ राशि के जातकों के लिए शुक्र की बदलती चाल रोजी-रोजगार में तरक्की के नए रास्ते बनाएगी। कार्यस्थल पर आपकी कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। आपको किसी महत्वपूर्ण विभाग या बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को सकारात्मक परिणाम हासिल होंगे। आय के पुराने स्रोतों के साथ-साथ आमदनी के नए जरिया बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। व्यापार विस्तार की योजनाएं धरातल पर उतरेंगी और नए साझेदार जुड़ सकते हैं।