'ना MS धोनी, ना हार्दिक पांड्या...': भारतीय वनडे टीम में मंडराया 'फिनिशर' का संकट, हार दर हार की बनी बड़ी वजह
इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-2 से हार झेलने के बाद भारतीय टीम की रणनीतिक कमियां उजागर हो गई हैं। इस समय वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ा संकट गेंदबाजी या टॉप ऑर्डर का नहीं, बल्कि निचले क्रम (Lower Middle Order) में 'फिनिशर्स' की भारी कमी है। नंबर 6, 7 और 8 पर भारत को ऐसे खिलाड़ी नहीं मिल पा रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर 150-200 से अधिक के स्ट्राइक रेट से ताबड़तोड़ रन बनाकर मैच फिनिश कर सकें।
धोनी-जडेजा के बाद खाली हुआ फिनिशर का स्लॉट
भारतीय वनडे इतिहास में लंबे समय तक महेंद्र सिंह धोनी ने फिनिशर की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था। उनके बाद हार्दिक पांड्या और रविंद्र जडेजा ने इस कमी को पूरा किया। हालांकि, हार्दिक की गैरमौजूदगी में भारतीय टीम का निचला क्रम पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है।
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लॉर्ड्स वनडे में खुली पोल: तीसरे वनडे में इंग्लैंड के खिलाफ 388 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए नंबर-6 पर केएल राहुल को भेजा गया, जो इस रोल के लिए प्राकृतिक रूप से फिट नहीं हैं।
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अक्षर पर ही निर्भरता: नंबर-7 पर अक्षर पटेल मौजूद थे, लेकिन हर मैच में उनसे फिनिशिंग टच की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। वहीं, नंबर-8 पर कोई भी ऐसा गेंदबाज नहीं था जो उपयोगी बल्लेबाजी कर सके।
निचले क्रम की कमजोरी और चोटिल ऑलराउंडर्स
वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजी मुख्य रूप से नंबर-5 पर ही खत्म होती दिख रही है। जब श्रेयस अय्यर नंबर-4 और केएल राहुल नंबर-5 पर खेलते हैं, तब तक टीम मजबूत स्थिति में रहती है। लेकिन इसके बाद टीम के पास कोई आक्रामक बल्लेबाज नहीं बचता।
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नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा की फिटनेस: युवा ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा को नंबर 7 और 8 के लिए सही विकल्प माना जा रहा है, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी बीते कुछ समय से लगातार चोटों (Injuries) से परेशान रहे हैं।
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हार्दिक पर निर्भरता: जब भी हार्दिक पांड्या टीम से बाहर होते हैं, भारत को पहली ही गेंद से बड़े शॉट्स लगाने वाले फिनिशर की कमी खलने लगती है।
भारतीय टीम को दो 'इम्पैक्ट' ऑलराउंडर्स की सख्त जरूरत
आगामी वनडे सीरीज और 2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए भारत को नंबर 6 और 7 पर कम से कम दो ऐसे ऑलराउंडर्स की तलाश करनी होगी, जो बिना किसी दबाव के तेजी से रन बना सकें और आवश्यकता पड़ने पर सिंगल-डबल से स्ट्राइक रोटेट कर सकें। हार्दिक पांड्या की वापसी से नंबर-6 का स्थान तो भर सकता है, लेकिन नंबर 7 और 8 के लिए एक मजबूत और टिकाऊ संयोजन खोजना मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।