सिंधु के पानी पर बिलबिलाया पाकिस्तान, बिलावल भुट्टो ने भारत को दी परमाणु युद्ध की 'गीदड़भभकी'

सिंधु के पानी पर बिलबिलाया पाकिस्तान, बिलावल भुट्टो ने भारत को दी परमाणु युद्ध की 'गीदड़भभकी'

इस्लामाबाद/नई दिल्ली ब्यूरो: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर चल रहा तनाव अब एक नए चरम पर पहुंच गया है। वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ने और आंतरिक मोर्चों पर विफल रहने के बाद पाकिस्तानी राजनेता एक बार फिर भारत के खिलाफ परमाणु कार्ड खेलने लगे हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भारत को सीधे तौर पर परमाणु युद्ध (Nuclear War) की धमकी दे डाली है।

बिलावल भुट्टो ने अपने भड़काऊ भाषण में कहा कि पाकिस्तान के जल अधिकारों को कमजोर करने या नदी के बहाव को रोकने का भारत का कोई भी प्रयास पाकिस्तान के 'राष्ट्रीय अस्तित्व' पर हमला माना जाएगा, जिसका जवाब परमाणु हमले से दिया जा सकता है।

'पानी रोकना परमाणु युद्ध की शुरुआत जैसा है' — बिलावल भुट्टो

इस्लामाबाद में बोलते हुए बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत (Nuclear Doctrine) का हवाला देते हुए गीदड़भभकी दी। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • अस्तित्व पर हमला: भुट्टो ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित किए जाने के बाद यह मुद्दा अब केवल कूटनीतिक या पर्यावरणीय नहीं रह गया है, बल्कि यह पाकिस्तान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला बन चुका है।

  • परमाणु सिद्धांत का हवाला: उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की परमाणु नीति का एक प्रमुख पहलू यह है कि यदि देश की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने या उसके जलमार्गों (Waterways) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जाता है, तो पाकिस्तान 'पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल' (First Use) करने का विकल्प खुला रखता है।

  • दबाव का हथियार: भुट्टो ने भारत पर पानी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा, "सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है, यह किसी के हाथों की कठपुतली या सौदेबाजी का मोहरा नहीं है। हम गरिमापूर्ण शांति चाहते हैं, समर्पण नहीं।"

पहले भी उगल चुके हैं ज़हर: "या हमारा पानी बहेगा, या उनका खून"

यह कोई पहली बार नहीं है जब बिलावल भुट्टो ने इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और हिंसक बयानबाजी की है। इससे पहले अप्रैल 2025 में, जब भारत ने पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि की समीक्षा करते हुए इसे स्थगित करने का कड़ा फैसला लिया था, तब भी भुट्टो ने सीमा पार से जहर उगला था।

उस समय उन्होंने बेहद भड़काऊ लहजे में कहा था, "सिंधु नदी हमारी है और हमारी ही रहेगी। या तो हमारा पानी बहेगा, या उनका खून।" उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान का परमाणु सिद्धांत 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध' से विकसित होकर अब 'फुल-स्पेक्ट्रम डिटेरेंस' बन चुका है और देश 'नो फर्स्ट यूज़' (No First Use) की नीति का पालन नहीं करता।

पानी के लिए क्यों छटपटा रहा है पाकिस्तान?

पाकिस्तानी नेताओं की इस बौखलाहट के पीछे की मुख्य वजह यह है कि सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियां पाकिस्तान के लिए जीवनदान हैं:

  • सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि को सिंचाई का पानी प्रदान करती है।

  • यदि भारत इन नदियों के पानी का सही इस्तेमाल अपनी पनबिजली परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) और सिंचाई के लिए कड़ाई से करने लगे, तो पाकिस्तान में भुखमरी और सूखे के हालात पैदा हो जाएंगे।

  • पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी गिड़गिड़ा चुका है, लेकिन भारत के तार्किक और कानूनी पक्ष के आगे उसे हर जगह मुंह की खानी पड़ी है।

भारत का रुख स्पष्ट: भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों और सरकार का रुख हमेशा से साफ रहा है कि आतंकवाद और बातचीत (या समझौते) एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान की इन खोखली परमाणु धमकियों का भारत पर पहले कभी कोई असर पड़ा है और न ही आगे पड़ेगा। भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने हितों की रक्षा करना बखूबी जानता है।

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