ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर किया 'परमानेंट कंट्रोल' का बड़ा दावा: डेनमार्क के साथ ऐतिहासिक सुरक्षा डील, क्या सच में बदल गया नक्शा?

ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर किया 'परमानेंट कंट्रोल' का बड़ा दावा: डेनमार्क के साथ ऐतिहासिक सुरक्षा डील, क्या सच में बदल गया नक्शा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने लंबे समय से चले आ रहे एजेंडे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए दावा किया है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते पर सहमति बना ली है। ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता वाशिंगटन को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों पर 'परमानेंट कंट्रोल' (स्थायी नियंत्रण) प्रदान करता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस समझौते की घोषणा करते हुए ट्रंप ने इसे एक 'इनफिनिट लाइफ एग्रीमेंट' (अनंत काल तक चलने वाला समझौता) करार दिया, जिसकी कोई समाप्ति तिथि नहीं होगी। ट्रंप का दावा है कि इस समझौते के बाद अब अमेरिका का कोई भी प्रतिद्वंद्वी देश अमेरिका की लिखित अनुमति के बिना न तो ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बना सकेगा, न सैन्य मौजूदगी रख सकेगा और न ही किसी संवेदनशील सेक्टर में निवेश कर पाएगा।

क्या अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कर लिया है कब्जा? जानिए असल हकीकत

ट्रंप के आक्रामक बयानों के बावजूद इस डील का मतलब यह कतई नहीं है कि ग्रीनलैंड अब अमेरिका का भूभाग बन गया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता डेनमार्क के साम्राज्य की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखता है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र बना रहेगा। 1951 और 2004 के पुराने रक्षा समझौतों के तहत अमेरिका के पास पहले से ही उत्तरी ग्रीनलैंड में पिटुफिक (पिटुफिक स्पेस बेस) में सैन्य उपस्थिति है। नए समझौते के तहत केवल वाशिंगटन की सुरक्षा और सैन्य भूमिका को विस्तार दिया जा रहा है, न कि राजनीतिक प्रभुत्व सौंपा गया है। यह समझौता औपचारिक रूप से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान हस्ताक्षरित होने और दोनों संसदों द्वारा अनुमोदित होने के बाद लागू होगा।

इस समझौते के पीछे की असली वजह: चीन और रूस की घेराबंदी

आर्कटिक क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका, रूस और चीन के बीच प्रभाव जमाने की जंग तेज हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते बर्फ पिघलने से नए समुद्री व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं और आर्कटिक के विशाल तेल, गैस और दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals) संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है। चीन ने खुद को 'नियर-आर्कटिक स्टेट' घोषित कर ग्रीनलैंड के खनन और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने की कोशिश की थी, जबकि रूस अपनी आर्कटिक सैन्य चौकियों को आधुनिक बना रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस नए रक्षा तंत्र का मुख्य मकसद बीजिंग और मॉस्को को ग्रीनलैंड की रणनीतिक परिधि से पूरी तरह बाहर रखना और पूरे उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप की हवाई और मिसाइल रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना है।

भू-राजनीतिक मायने और नाटो (NATO) के अंदरूनी समीकरण

इस समझौते के सामने आने से यूरोप और नाटो गठबंधन के भीतर राहत और सतर्कता दोनों के सुर सुनाई दे रहे हैं। जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने या ताकत के दम पर नियंत्रण लेने के संकेत दिए थे, तब ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में भारी तनाव आ गया था। जानकारों का मानना है कि राजनयिक स्तर पर तैयार की गई यह रूपरेखा ट्रंप को घरेलू स्तर पर अपनी 'जीत' का डंका पीटने का मौका देती है, जबकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने में सफल रहे हैं। कुल मिलाकर, यह समझौता अमेरिका को आर्कटिक के फ्रंटलाइन पर बिना किसी युद्ध या विलय के एक स्थायी सुरक्षा ढाल मुहैया कराता है।

Latest Posts