Digital India Report: इंटरनेट कनेक्शन 107 करोड़ पार, UPI से रोजाना 75 करोड़ ट्रांजैक्शन का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
नई दिल्ली: भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है। देश में चल रही डिजिटल क्रांति ने रफ्तार के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने एक बेहद अहम जानकारी साझा करते हुए बताया है कि भारत में कुल इंटरनेट कनेक्शन का आंकड़ा अब 107 करोड़ के पार पहुंच गया है। इसके साथ ही, देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या भी लगभग 100 करोड़ के जादुई आंकड़े को छूने वाली है। पिछले 10 वर्षों में सरकार के नीतिगत फैसलों और मजबूत कनेक्टिविटी के दम पर भारत आज एक ग्लोबल डिजिटल पावरहाउस के रूप में उभर चुका है।
UPI बना दुनिया का सबसे बड़ा पेमेंट सिस्टम, 9 देशों ने अपनाया लोहा
भारत के स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी यूपीआई (UPI) ने देश में पैसों के लेनदेन का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है। वर्तमान में यूपीआई के जरिए हर दिन करीब 75 करोड़ ट्रांजैक्शन (Real-time Transactions) हो रहे हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी यूपीआई की सराहना करते हुए इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम घोषित किया है। भारत की इस कामयाबी को देखते हुए अब तक दुनिया के 9 बड़े देश इस सिस्टम को अपना चुके हैं और जल्द ही कई अन्य देश भी इस वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
डिजिलॉकर और DBT से जनता को मिला सीधा फायदा
डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए शुरू किए गए डिजिलॉकर (DigiLocker) के यूजर्स की संख्या आज 70 करोड़ से अधिक हो चुकी है। यह प्लेटफॉर्म लोगों को अपने जरूरी सरकारी और निजी दस्तावेजों को डिजिटल और सुरक्षित तरीके से रखने की आजादी देता है।
इसके अलावा, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सबसे बड़ी भूमिका डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी (DBT) सिस्टम ने निभाई है। वर्तमान में सरकार द्वारा कुल 323 डीबीटी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से अब तक 51.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है, जिससे बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो गया है।
स्मार्टफोन इंपोर्टर से एक्सपोर्टर बना भारत, अब सेमीकंडक्टर की बारी
साल 2014 तक भारत अपनी जरूरतों के ज्यादातर स्मार्टफोन विदेशों से आयात (Import) करता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और अब स्मार्टफोन देश के सबसे बड़े एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (Top Export Items) की लिस्ट में शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में वैल्यू एडिशन बढ़ाने के साथ ही सरकार अब 'सेमीकंडक्टर मिशन' को भी युद्ध स्तर पर आगे बढ़ा रही है। देश में अब तक 12 बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। बड़ी खबर यह है कि सीजी सेमी (CG Semi) द्वारा तैयार किया जा रहा अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट इसी हफ्ते चालू होने की उम्मीद है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी।
स्वदेशी AI मॉडल के साथ भारत का 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आत्मनिर्भर विजन'
बदलती हुई वैश्विक तकनीकों के बीच भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भी रणनीतिक कदम उठा रही है। साइबर सिक्योरिटी और डेटा संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए सरकार अब पूरी तरह से स्वदेशी एआई (Indigenous AI Models) विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अमेरिका और अन्य विकसित देशों की तरह भारत भी एडवांस एआई टेक्नोलॉजी के लिए सुरक्षित फ्रेमवर्क और नियम तैयार कर रहा है। भारत की विशाल आबादी, बेहतरीन टेक टैलेंट और मजबूत होते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए एआई जैसे भविष्य के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनना देश के लिए बेहद जरूरी है।