पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला, एक्सपोर्ट ड्यूटी दरों में भारी बदलाव; जानें आम जनता पर क्या होगा असर?

पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला, एक्सपोर्ट ड्यूटी दरों में भारी बदलाव; जानें आम जनता पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ईंधन की कीमतों और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता को संतुलित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी (विंडफॉल टैक्स) की दरों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस नए फैसले के तहत जहां एक तरफ डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती की गई है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी को बढ़ा दिया गया है।

यह संशोधित दरें आज, यानी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गई हैं। आइए जानते हैं कि सरकार के इस फैसले से तेल की कीमतों में कितना अंतर आया है और क्या इसका असर आपकी जेब या स्थानीय पेट्रोल पंप के भाव पर पड़ने वाला है।

क्या आज से महंगा होगा आपकी गाड़ी का पेट्रोल-डीजल?

इस खबर को सुनते ही आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ जाएंगी? तो आपको बता दें कि इस फैसले से आम जनता की जेब पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव केवल देश से बाहर भेजे जाने वाले (एक्सपोर्ट होने वाले) ईंधन पर किया गया है। घरेलू इस्तेमाल के लिए भारत के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले तेल की मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए स्थानीय रिटेल कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी रहेंगी।

तेल के एक्सपोर्ट पर कितना घटा और बढ़ा टैक्स? समझें गणित

वित्त मंत्रालय के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों को देखते हुए एक्सपोर्ट ड्यूटी में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:

  • डीजल पर टैक्स घटा: डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 14 रुपये प्रति लीटर से भारी कटौती के साथ अब 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • हवाई ईंधन (ATF) पर राहत: जेट फ्यूल या एटीएफ पर लगने वाले टैक्स को भी 12.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर अब 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • पेट्रोल पर बढ़ा टैक्स: इसके ठीक उलट, पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर सख्ती दिखाते हुए ड्यूटी को 1.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

मिडिल ईस्ट संकट के बीच क्यों लिया गया यह फैसला?

दरअसल, मार्च महीने में मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष बढ़ने के बाद से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर यह स्पेशल टैक्स लगाया था, जिसकी हर 15 दिनों में समीक्षा (Review) की जाती है।

शुरुआत में यह टैक्स केवल डीजल और एटीएफ पर था, लेकिन मई महीने में पेट्रोल को भी इसके दायरे में ले आया गया। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल कंपनियां घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न होने दें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगे दामों में तेल बेचकर अनुचित लाभ (Windfall Profit) न कमाएं।

इन पड़ोसी देशों को टैक्स में मिलेगी विशेष छूट

वित्त मंत्रालय ने भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों (PSU Oil Companies) को राहत देते हुए एक और बड़ा ऐलान किया है। पहले से ही नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले तेल निर्यात पर टैक्स में छूट दी जा रही थी। अब इस रियायत के दायरे को बढ़ाते हुए सरकार ने इसमें मॉरीशस और मालदीव को भी शामिल कर लिया है। इन मित्र देशों को निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर इस बढ़ी हुई ड्यूटी का असर नहीं होगा।

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