LIC से लेकर सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी; खजाना भरने के लिए बना मेगा प्लान

LIC से लेकर सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी; खजाना भरने के लिए बना मेगा प्लान

केंद्र की मोदी सरकार ने अपने खजाने को मजबूत करने और वित्तीय गुंजाइश बढ़ाने के लिए एक बड़ा विनिवेश (Disinvestment) मास्टरप्लान तैयार किया है। आने वाले महीनों में सरकार कई बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) और सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। ब्लूमबर्ग की एक होलिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मेगा प्लान की सूची में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC, हिंदुस्तान जिंक और कई बड़े सरकारी बैंक शामिल हैं।

LIC और हिंदुस्तान जिंक से जुटेंगे ₹15,000 करोड़

इस विनिवेश प्रक्रिया के तहत सरकार अकेले लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये (1.05 अरब डॉलर) जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा, हिंदुस्तान जिंक में शेयर बिक्री के जरिए सरकार के खाते में 5,000 करोड़ रुपये और आने की उम्मीद है। निवेश बैंकरों के साथ सरकार के उच्च अधिकारी हर हफ्ते बैठकें कर रहे हैं, जिसमें शेयरों की सही कीमत, निवेशकों की मांग और बाजार के सेंटिमेंट के हिसाब से सटीक समय (Timing) पर रणनीति बनाई जा रही है।

IDBI बैंक को लेकर नई रणनीति: शेयरों में आया उछाल

लंबे समय से अटके IDBI बैंक लिमिटेड के निजीकरण को लेकर भी सरकार अब एक नई योजना पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार नए सिरे से बोलियां (New Bids) आमंत्रित कर सकती है और इसके लिए रिजर्व प्राइस (न्यूनतम कीमत) को भी कम किया जा सकता है। हालांकि, यह मौका केवल उन्हीं खरीदारों को मिलेगा जिन्होंने पिछले राउंड की बोली प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इस खबर के बाजार में आते ही शेयर मार्केट में IDBI बैंक के शेयरों में 5% तक की तगड़ी बढ़त दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, LIC और हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में निवेशकों का रिस्पॉन्स फिलहाल सामान्य बना हुआ है।

पहली तिमाही में ही बना दिया रिकॉर्ड, 3 साल का आंकड़ा पीछे छूटा

हाल के महीनों में कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India) और एनएचपीसी लिमिटेड (NHPC) के शेयरों की बिक्री को निवेशकों से जो धमाकेदार रिस्पॉन्स मिला है, उसने सरकार का हौसला काफी बढ़ा दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए सरकार ने एसेट बिक्री के जरिए 800 अरब रुपये (₹80,000 करोड़) जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में ही विभिन्न सरकारी कंपनियों के शेयर बेचकर लगभग 2 अरब डॉलर जुटा लिए हैं, जो पिछले तीन सालों में हर साल विनिवेश से मिली कुल रकम से भी कहीं अधिक है।

निजी कंपनियों के बड़े IPO से मिलेगी कड़ी टक्कर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती भी होगी। घरेलू शेयर बाजार में जल्द ही रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे देश के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) दस्तक देने की तैयारी में हैं। ऐसे में सरकारी कंपनियों के शेयर्स को निवेशकों की पूंजी आकर्षित करने के लिए इन दिग्गज निजी कंपनियों से सीधी और कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है।

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