कुकर में दाल नहीं गल रही? अपनाएं 2 मिनट का यह सीक्रेट किचन हैक, घंटों का काम मिनटों में होगा और गैस भी बचेगी
भारतीय थाली बिना दाल के अधूरी मानी जाती है। चाहे दोपहर का लंच हो या रात का डिनर, अरहर, मूंग, चना या उड़द की दाल लगभग हर घर के मेन्यू का जरूरी हिस्सा होती है। हालांकि, कई बार रसोई में गृहिणियों और खाना पकाने वालों के सामने यह बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है कि प्रेशर कुकर में कई सीटी लगाने के बावजूद दाल पूरी तरह गलती नहीं है। कभी चने की दाल कड़क रह जाती है, तो कभी राजमा या साबुत उड़द घंटों गैस पर चढ़े रहने के बाद भी सख्त बने रहते हैं। इससे न केवल रसोई में घंटों का अतिरिक्त समय बर्बाद होता है, बल्कि रसोई गैस (LPG) की भी भारी खपत होती है। खासकर कठोर पानी (Hard Water) वाले इलाकों में यह समस्या और भी ज्यादा देखने को मिलती है। अच्छी बात यह है कि कुछ साधारण और आजमाए हुए सीक्रेट किचन हैक्स से आप किसी भी दाल को महज चंद मिनटों में एकदम मक्खन जैसी मुलायम और घुली हुई पका सकते हैं।
चुटकी भर बेकिंग सोडा का जादुई असर
अगर आप चना दाल, साबुत मूंग, राजमा या छोले जैसी सख्त चीजें पका रहे हैं और आपके पास उन्हें पहले से भिगोने का समय नहीं था, तो मीठा सोडा यानी बेकिंग सोडा सबसे बड़ा लाइफ सेवर साबित होता है।
कुकर में दाल, पानी, हल्दी और नमक डालने के साथ ही बस एक चुटकी (एक चौथाई चम्मच से भी कम) बेकिंग सोडा मिला दें। बेकिंग सोडा पानी के क्षारीय स्तर (Alkalinity) को बढ़ा देता है, जिससे दाल के बाहरी रेशे यानी पेक्टिन बहुत तेजी से टूटने लगते हैं। इस छोटे से नुस्खे की मदद से जो दाल 5 से 6 सीटियों में भी सख्त रह जाती थी, वह केवल 2 से 3 सीटियों में पूरी तरह गलकर एकसार हो जाती है। ध्यान रखें कि बेकिंग सोडा सिर्फ एक चुटकी ही डालना है, अत्यधिक मात्रा में डालने से दाल का प्राकृतिक स्वाद बदल सकता है।
गुनगुने पानी और एक चम्मच देसी घी का फॉर्मूला
दाल बनाते समय अधिकांश लोग सीधे नल का ठंडा या सामान्य पानी कुकर में डाल देते हैं। ठंडा पानी कुकर का तापमान बढ़ाने में लंबा वक्त लेता है, जिससे दाल का पकना धीमा हो जाता है।
हमेशा कुकर में दाल डालने के बाद उसमें पहले से हल्का गर्म या उबला हुआ पानी डालें। इसके साथ ही दाल में आधा चम्मच शुद्ध देसी घी या सरसों का तेल डाल दें। तेल या घी डालने से दो जबरदस्त फायदे होते हैं। पहला, चिकनाई दाल के दानों के अंदर तक तेजी से गर्मी पहुंचाने का काम करती है जिससे दाने जल्दी फूटते हैं। दूसरा, घी डालने से सीटी आते वक्त कुकर के ढक्कन से पानी और झाग बाहर नहीं फेंकता, जिससे गैस चूल्हा गंदा होने से बच जाता है।
सिरका या खटाई डालने की टाइमिंग का रखें ध्यान
दाल न गलने के पीछे सबसे बड़ी गलती अक्सर खाना बनाते समय खट्टी चीजों का गलत इस्तेमाल होती है। कई लोग दाल चढ़ाते समय ही उसमें टमाटर, अमचूर, इमली या नींबू का रस डाल देते हैं।
विज्ञान के अनुसार, किसी भी अम्लीय (Acidic) पदार्थ के संपर्क में आते ही दाल के छिलके और रेशे कड़े हो जाते हैं, जिससे दाल को गलने में सामान्य से दोगुना समय लगता है। इसलिए जब तक दाल पूरी तरह पककर मुलायम न हो जाए, तब तक उसमें टमाटर या कोई भी खट्टी चीज न डालें। टमाटर और खटाई को हमेशा बाद में तड़का लगाते समय ही शामिल करें ताकि दाल की रंगत और बनावट दोनों बेहतरीन बनी रहें।
10 मिनट का क्विक सोकिंग हैक
अगर आप दाल पकाने से पहले उसे घंटों भिगोना भूल गए हैं, तो एक कटोरी में दाल निकालें और उसमें खौलता हुआ गर्म पानी डालकर ऊपर से एक प्लेट से 10 मिनट के लिए ढक दें। गर्म पानी के भाप में दाल के दाने तेजी से पानी सोखकर फूल जाते हैं। इसके बाद जब आप इसे कुकर में पकाएंगे, तो यह बिल्कुल वैसे ही गलेगी जैसे रात भर भिगोई गई दाल गलती है।
कुकर का प्रेशर खुद से निकलने दें
दाल को जल्दी पकाने की जल्दबाजी में कई लोग सीटी को चम्मच से उठाकर जबरन भाप बाहर निकाल देते हैं। यह दाल को कच्चा रखने का सबसे बड़ा कारण है। जब कुकर में तय सीटियां आ जाएं, तो गैस बंद कर दें और कुकर को खुद ही ठंडा होने दें। कुकर के अंदर बची हुई भाप में दाल कुछ मिनटों तक धीमी आंच के प्रभाव में पकती रहती है (Carryover Cooking), जिससे उसके दाने अंदर तक घुट जाते हैं और दाल बेहद स्वादिष्ट बनती है।