टाइफाइड बुखार में भूलकर भी न करें लापरवाही! एंटीबायोटिक दवाओं के साथ अपनाएं ये 5 असरदार self-care टिप्स, बहुत तेजी से होगी रिकवरी और दूर होगी शरीर की कमजोरी

टाइफाइड बुखार में भूलकर भी न करें लापरवाही! एंटीबायोटिक दवाओं के साथ अपनाएं ये 5 असरदार self-care टिप्स, बहुत तेजी से होगी रिकवरी और दूर होगी शरीर की कमजोरी

मौसम में बदलाव, दूषित पेयजल और असुरक्षित खान-पान के कारण फैलने वाली बीमारियों में 'टाइफाइड बुखार' (Typhoid Fever) सबसे प्रमुख और गंभीर संक्रमणों में से एक माना जाता है। इसे आम भाषा में 'मियादी बुखार' या 'आंतों का बुखार' भी कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, टाइफाइड की बीमारी 'साल्मोनेला टाइफी' (Salmonella typhi) नामक खतरनाक जीवाणु (बैक्टीरिया) के शरीर में प्रवेश करने से होती है। जब यह बैक्टीरिया दूषित पानी या भोजन के माध्यम से मनुष्य के पाचन तंत्र में पहुंचता है, तो सबसे पहले आंतों पर हमला करता है और फिर धीरे-धीरे रक्तप्रवाह में फैल जाता है। इसके कारण मरीज को तेज बुखार (102 से 104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक), सिरदर्द, पेट में तेज दर्द, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी, भूख न लगना, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा में एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए टाइफाइड का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन अक्सर देखा गया है कि केवल दवाएं खाने से मरीज को पूरी तरह ठीक होने में लंबा समय लग जाता है। बाल रोग विशेषज्ञों, फिजिशियन और संक्रामक रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि टाइफाइड के इलाज में दवाओं जितनी ही अहम भूमिका सही देखभाल, खान-पान और जीवनशैली के नियमों की होती है। यदि मरीज दवाइयों के साथ-साथ अपनी उचित देखभाल में थोड़ी सी भी लापरवाही बरतता है, तो आंतों में घाव (Intestinal Perforation), अंदरूनी ब्लीडिंग या बीमारी के दोबारा लौटने (Relapse) का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य टाइफाइड से जूझ रहा है, तो डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाओं के साथ इन 5 जरूरी रिकवरी टिप्स को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।

1. डिहाइड्रेशन से बचें – उबला पानी, ओआरएस और तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें

टाइफाइड बुखार के दौरान मरीज को लगातार तेज बुखार रहने, पसीना आने, दस्त लगने और कई बार उल्टी होने के कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी हो जाती है। शरीर में पानी की कमी होने से बीपी लो होना, चक्कर आना, किडनी पर दबाव बढ़ना और अत्यधिक सुस्ती जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए टाइफाइड में हाइड्रेशन को सबसे पहली प्राथमिकता देना अनिवार्य है। मरीज को दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर शुद्ध और सुरक्षित तरल पदार्थ पीने चाहिए। पीने का पानी हमेशा 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालकर, फिर ठंडा करके ही इस्तेमाल करें। उबला हुआ पानी पानी में मौजूद सभी जीवाणुओं को नष्ट कर देता है और आंतों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालता। इसके अलावा पानी में ओआरएस (ORS) का घोल, ताजे नारियल का पानी, पतली छाछ, जौ का पानी और नींबू पानी मिलाकर पिलाएं। नारियल पानी में प्राकृतिक पोटेशियम और सोडियम होता है, जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को तुरंत रीसेट करता है और कमजोरी को दूर भगाता है।

2. आंतों की सुरक्षा के लिए लें हल्का, सुपाच्य और सात्विक आहार

चूंकि साल्मोनेला बैक्टीरिया सीधे छोटी आंत के पेयर्स पैच (Peyer's Patches) पर हमला करके वहां सूजन और अल्सर पैदा करता है, इसलिए टाइफाइड के दौरान पाचन तंत्र बेहद कमजोर और संवेदनशील स्थिति में होता है। ऐसे में भोजन को लेकर की गई एक छोटी सी गलती भी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस दौरान तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, मिर्च-मसाले वाला, कच्चा सलाद, जंक फूड और फाइबर से भरपूर भारी भोजन पूरी तरह से वर्जित होना चाहिए। भारी भोजन आंतों की सूजन को बढ़ा सकता है और आंतों में छिद्र या ब्लीडिंग का कारण बन सकता है। मरीज को ऐसा आहार देना चाहिए जो पचने में बेहद आसान हो और आंतों को आराम दे। मूंग दाल की पतली खिचड़ी, सादा दलिया, उबले हुए आलू, मसला हुआ केला, उबला हुआ चावल, गाजर का सूप और पतली दाल का पानी टाइफाइड के मरीज के लिए सबसे उत्तम आहार माने जाते हैं। इसके साथ ही, एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय हर 2 से 3 घंटे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हल्का भोजन देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।

3. पूर्ण शारीरिक विश्राम (Bed Rest) और भरपूर नींद है सबसे बड़ी दवा

टाइफाइड का बैक्टीरिया शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) को बहुत तेजी से निचोड़ देता है, जिससे मरीज को भारी शारीरिक थकावट और मांसपेशियों में तेज दर्द महसूस होता है। कई बार दवा शुरू होने के बाद बुखार उतरने पर मरीज खुद को ठीक समझकर दैनिक काम-काज या भागदौड़ शुरू कर देते हैं, जो बहुत बड़ी गलती है। पर्याप्त आराम न मिलने से बैक्टीरिया दोबारा सक्रिय हो सकता है और बीमारी दोबारा लौट सकती है। टाइफाइड में जब तक शरीर का तापमान पूरी तरह सामान्य न हो जाए और कमजोरी दूर न हो, तब तक मरीज को बेड रेस्ट (Bed Rest) करना चाहिए। दिनभर में कम से कम 8 से 10 घंटे की गहरी नींद लें ताकि शरीर की कोशिकाएं (Cells) खुद को रिपेयर कर सकें और इम्यून सिस्टम पूरी ताकत से बैक्टीरिया से लड़ सके। भारी वजन उठाने, सीढ़ियां बार-बार चढ़ने-उतरने या किसी भी प्रकार के भारी शारीरिक श्रम से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।

4. हाइजीन और स्वच्छता का कड़ाई से पालन करें ताकि दोबारा न फैले इंफेक्शन

टाइफाइड एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से 'फेकल-ओरल रूट' (Fecal-Oral Route) यानी दूषित हाथों और अस्वच्छता के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए मरीज की और उसके आसपास के वातावरण की स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि घर के अन्य सदस्य इस बीमारी की चपेट में न आएं और मरीज को दोबारा इंफेक्शन न हो। मरीज को शौच जाने के बाद और खाना खाने से पहले अपने हाथों को साबुन और बहते पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोने की सख्त आदत डालनी चाहिए। मरीज के इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन, तौलिए, कपड़े और बिस्तर के चादर को बिल्कुल अलग रखें। मरीज के कपड़ों और चादरों को गर्म पानी और डिस्इंफेक्टेंट लिक्विड में धोएं। इसके अलावा, मरीज जिस शौचालय का इस्तेमाल कर रहा है, उसकी नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर या फिनाइल से सफाई करें।

5. एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स करें और बुखार की नियमित ट्रैकिंग रखें

टाइफाइड के इलाज में सबसे बड़ी और जानलेवा लापरवाही दवाओं का कोर्स बीच में छोड़ देना है। डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबायोटिक दवाएं (जैसे एजिथ्रोमाइसिन, सेफ्ट्रियाक्सोन आदि) बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करने के लिए 7 से 14 दिनों के निश्चित कोर्स के लिए दी जाती हैं। अक्सर मरीज 3-4 दिन दवा खाने के बाद बुखार उतरने पर खुद ही दवाइयां बंद कर देते हैं। ऐसा करने से शरीर में बचे हुए जिद्दी बैक्टीरिया मरते नहीं हैं, बल्कि वे उस एंटीबायोटिक के प्रति 'रेजिस्टेंट' (Antibiotic Resistance) हो जाते हैं। इसके बाद वही दवा दोबारा काम नहीं करती और टाइफाइड ज्यादा गंभीर रूप में वापस आ जाता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं की खुराक और समय का कड़ाई से पालन करें और कोर्स पूरा करें। इसके साथ ही, दिन में 3 से 4 बार थर्मामीटर से शरीर का तापमान मापें और उसे एक डायरी में नोट करें। यदि बुखार 102 या 103 डिग्री से ऊपर जाता है, तो तुरंत माथे, हथेली और पैरों के तलवों पर सादे पानी की पट्टियां (Cold Sponging) रखें ताकि शरीर का तापमान सुरक्षित स्तर पर लाया जा सके।

टाइफाइड में कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? (Warning Signs)

यदि self-care और दवाइयों के बावजूद मरीज की स्थिति बिगड़ने लगे, तो बिना एक पल गंवाए डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए। यदि मरीज को अचानक पेट में असहनीय दर्द होने लगे, उल्टी में खून आए या मल का रंग काला या खूनी हो जाए, मरीज बहुत ज्यादा सुस्त या बेहोशी की हालत में जाने लगे, सांस लेने में तकलीफ हो या 5 से 7 दिन दवा खाने के बाद भी बुखार 103-104 डिग्री से नीचे न उतरे, तो यह आंतों में घाव या सेप्सिस का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर आईवी (IV Fluids) और उच्च स्तरीय चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता होती है। सही समय पर सही देखभाल और दवाओं के पूर्ण अनुपालन से टाइफाइड से पूरी तरह मुक्ति पाई जा सकती है।

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