'ये कूड़ा कौन देखेगा?' जब OTT प्लेटफॉर्म ने की थी 'हनुमान अंश' के डायरेक्टर की बेइज्जती, छलका दर्द
बॉक्स ऑफिस पर यश की 'टॉक्सिक' और बड़े-बड़े दिग्गजों की फिल्मों के बीच सीना ताने खड़ी डिवोशनल-एक्शन फिल्म ‘हनुमान अंश’ आज सिनेमाघरों में इतिहास रच रही है। 29 दिनों में लगभग 83 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर 100 करोड़ क्लब की दहलीज पर खड़ी इस फिल्म की सराहना पूरे देश में हो रही है। लेकिन इस चकाचौंध और ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे वर्षों का तिरस्कार, बेइज्जती और कड़वा संघर्ष छिपा हुआ है।
हाल ही में एक भावुक इंटरव्यू के दौरान फिल्म के निर्देशक ने अपने संघर्ष के दिनों का एक ऐसा चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला संस्मरण साझा किया, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। निर्देशक ने खुलासा किया कि फिल्म की थियेट्रिकल रिलीज से पहले जब वे वित्तीय संकट से जूझ रहे थे, तब देश के एक नामी और बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platform) के कंटेंट हेड्स ने न केवल उनकी कहानी का खुला मजाक उड़ाया, बल्कि उनकी घोर बेइज्जती कर उन्हें बेहद अपमानजनक तरीके से रिजेक्ट कर दिया था।
'पौराणिक अंधविश्वास कौन देखेगा?' कांच के केबिन में उड़ाई गई थी खिल्ली
निर्देशक ने उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए बताया कि पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान जब बजट खत्म हो चुका था और फिल्म को आगे बढ़ाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी, तब वे डिजिटल राइट्स बेचने के सिलसिले में मुंबई स्थित एक दिग्गज ओटीटी प्लेटफॉर्म के कॉर्पोरेट ऑफिस पहुंचे थे:
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10 मिनट में बंद करवा दिया रफ कट: निर्देशक ने बताया, "मैंने बड़ी उम्मीदों के साथ उनके सामने फिल्म का 20 मिनट का रफ कट और स्क्रीनप्ले की पिचिंग शुरू की। अभी 10 मिनट भी नहीं बीते थे कि उस ओटीटी प्लेटफॉर्म की युवा कंटेंट हेड ने चिढ़कर स्क्रीन बंद करवा दी।"
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कंटेंट को बताया गया 'थर्ड क्लास': निर्देशक के अनुसार, उस अधिकारी ने बेहद उपहास भरे लहजे में कहा—'आप लोग आज के दौर में भी वही घिसी-पिटी भक्ति, आस्था और पौराणिक अंधविश्वास लेकर क्यों चले आते हैं? आज की जेन-जी (Gen-Z) और मॉडर्न ऑडियंस को डार्क, बोल्ड, साइकोलॉजिकल थ्रिलर और क्राइम शोज चाहिए। यह धार्मिक और भक्ति का कंटेंट हमारे प्लेटफॉर्म के क्लास से बिल्कुल मैच नहीं करता। यह कूड़ा कौन देखेगा?'
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मीटिंग से बाहर निकलने का फरमान: जब निर्देशक ने अपनी विजुअल स्टाइल और सनातन दर्शन की गहराई को समझाने की कोशिश की, तो अधिकारियों ने उनकी बात तक सुनने से इनकार कर दिया और हाथ का इशारा करते हुए कहा कि वे उनका कीमती वक्त बर्बाद न करें और तुरंत केबिन से बाहर निकल जाएं।
'उस दिन मुंबई की सड़कों पर घंटों रोया था, लेकिन संकल्प नहीं टूटा'
उस अपमानजनक मुलाकात को याद करते हुए निर्देशक की आंखें नम हो गईं। उन्होंने साझा किया कि उस दिन वे उस कॉर्पोरेट बिल्डिंग की सीढ़ियों से नीचे उतरकर मुंबई की बारिश में फुटपाथ पर खड़े होकर घंटों रोते रहे थे।
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आत्मविश्वास पर हुआ था गहरा आघात: उन्होंने कहा, "उस दिन ऐसा लगा मानो मेरी वर्षों की तपस्या, निष्ठा और भगवान हनुमान के प्रति मेरी आस्था को चंद अहंकारी लोगों ने पैरों तले रौंद दिया हो। मेरे पास अपनी टीम को देने के लिए पैसे नहीं थे और हर दरवाजा बंद नजर आ रहा था।"
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संकटमोचन पर था अटूट भरोसा: निर्देशक ने आगे कहा, "लेकिन उस अपमान के आंसुओं ने मुझे तोड़ा नहीं, बल्कि मेरे भीतर एक जिद पैदा कर दी। मैंने मन ही मन प्रभु श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान का स्मरण किया और खुद से कहा कि अब मैं इस फिल्म को सीधे जनता की अदालत यानी सिनेमाघरों के 70 एमएम पर्दे पर ही लेकर जाऊंगा। अगर मेरी नीयत और भक्ति सच्ची है, तो इसका फैसला कॉर्पोरेट केबिन में बैठे चार लोग नहीं, बल्कि इस देश का आम दर्शक करेगा।"
अब वही OTT प्लेटफॉर्म करोड़ों का ऑफर लेकर लगा रहे हैं चक्कर
वक्त का पहिया कितनी तेजी से घूमता है, इसका सबसे बड़ा गवाह आज बॉक्स ऑफिस बन चुका है। जिस फिल्म को 'आउटडेटेड' और 'कचरा' बताकर रिजेक्ट किया गया था, उसी फिल्म ने रिलीज के 29वें दिन भी 10 करोड़ रुपये की सिंगल डे कमाई कर बड़े-बड़े ट्रेड एनालिस्ट्स के होश उड़ा दिए हैं।
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करोड़ों की बिडिंग वॉर शुरू: सूत्रों के अनुसार, फिल्म की अप्रत्याशित ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद अब वही दिग्गज स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स इसके पोस्ट-थियेट्रिकल डिजिटल राइट्स (OTT Streaming Rights) खरीदने के लिए फिल्म के निर्माताओं के चक्कर काट रहे हैं।
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चार गुना बढ़ गए डिजिटल राइट्स के दाम: बताया जा रहा है कि जो प्लेटफॉर्म कभी इस प्रोजेक्ट को दो करोड़ रुपये में भी खरीदने को तैयार नहीं थे, आज वही प्लेटफॉर्म्स इसके स्ट्रीमिंग राइट्स के लिए 30 से 40 करोड़ रुपये की खुली बोली लगाने को मजबूर हैं।
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निर्देशक का दो-टूक रुख: हालांकि, निर्देशक ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी ऐसे प्लेटफॉर्म के दबाव या लालच में नहीं आएंगे जिन्होंने उनके संघर्ष के दिनों में उनकी आस्था और भारतीय संस्कृति का उपहास उड़ाया था।
भारतीय दर्शकों ने साबित किया: सनातन संस्कृति और आस्था में है असीम शक्ति
'हनुमान अंश' के निर्देशक का यह संघर्ष उन तमाम नए और स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है, जो कॉर्पोरेट घरानों की बेरुखी और अहंकार का शिकार होते हैं। इस फिल्म की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय सिनेमा की असली नब्ज मुंबई के वातानुकूलित केबिनों में नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आम दर्शकों के दिलों में धड़कती है, जो अपनी मिट्टी, संस्कृति और आस्था से दिल से जुड़े हुए हैं।