फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज से पहले क्यों किए गए थे लगातार 8 बड़े मंगल पर विशाल भंडारे?
सिनेमाघरों में रिलीज के 29वें दिन भी पांचवें हफ्ते में 10 करोड़ रुपये की दैनिक कमाई कर ट्रेड पंडितों को चौंकाने वाली डिवोशनल-एक्शन फिल्म ‘हनुमान अंश’ आज हर जुबान पर छाई हुई है। जहां भारी बजट की कई एक्शन फिल्में चंद दिनों में दर्शकों की बेरुखी का शिकार होकर सिमट गईं, वहीं सीमित बजट और बिना किसी विशाल स्टारकास्ट के बनी ‘हनुमान अंश’ का टिकट खिड़की पर डटे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
लेकिन इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे केवल बेहतरीन वीएफएक्स (VFX), कसा हुआ स्क्रीनप्ले और रोंगटे खड़े कर देने वाला बैकग्राउंड स्कोर ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे मेकर्स का एक गहरा आध्यात्मिक संकल्प भी छिपा हुआ है। फिल्म से जुड़े अंदरूनी सूत्रों और निर्माण टीम के करीबी सदस्यों से हुई खास बातचीत में यह सनसनीखेज और भावनात्मक खुलासा हुआ है कि फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन और रिलीज से ठीक पहले निर्माताओं ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक परंपरा का पालन करते हुए लगातार 8 बड़े मंगलवार (Bada Mangal) को विशाल भंडारों और अन्नदान का आयोजन करवाया था।
लखनऊ के ऐतिहासिक 'बड़ा मंगल' से जुड़ा है संकल्प: क्या था पूरा वाकया?
फिल्म निर्माण से जुड़े एक वरिष्ठ क्रू मेंबर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस संकल्प की जड़ें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सैकड़ों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक 'बड़ा मंगल' परंपरा से जुड़ी हुई हैं। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवारों को लखनऊ और अवध क्षेत्र में 'बड़ा मंगल' के रूप में मनाया जाता है, जहां हर गली, नुक्कड़ और मंदिर के बाहर हर वर्ग और धर्म के लोगों के लिए पूड़ी-सब्जी, बूंदी और शरबत के भंडारे लगाए जाते हैं।
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फिल्म पर छा गए थे संकट के बादल: बताया जाता है कि पोस्ट-प्रोडक्शन के अंतिम चरण में फिल्म तकनीकी अड़चनों, वीएफएक्स स्टूडियो के अचानक बंद होने और बजट के भारी संकट में फंस गई थी। फिल्म का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा था और रिलीज टलने की नौबत आ गई थी।
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संकटमोचन के दरबार में मन्नत: इसी संकट के बीच फिल्म के लेखक, निर्देशक और प्रमुख निर्माता लखनऊ स्थित ऐतिहासिक अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने बजरंगबली के चरणों में फिल्म की पटकथा रखी और संकल्प लिया कि वे अपनी व्यावसायिक आकांक्षाओं से परे जाकर लगातार 8 बड़े मंगलवार तक बिना किसी प्रचार या नाम के व्यापक स्तर पर अन्नदान और सेवा कार्य करेंगे।
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8 बड़े मंगल का चुनाव क्यों? सनातन परंपरा में 'अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता' कहे जाने वाले भगवान हनुमान की अष्ट सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और फिल्म निर्माण के दौरान जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल की क्षमा याचना के लिए 8 बड़े मंगलवारों का चयन किया गया था।
न कोई बैनर, न कोई पब्लिसिटी: गुप्त भाव से बांटी गई लाखों श्रद्धालुओं को प्रसादी
इस भंडारा अभियान की सबसे अनूठी और हैरान कर देने वाली बात यह रही कि इसे फिल्म के किसी पीआर (PR) या प्रमोशनल स्टंट का हिस्सा नहीं बनाया गया:
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पूरी तरह गुप्त रखा गया आयोजन: लखनऊ के अलीगंज, हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, संकट मोचन मंदिर वाराणसी और अयोध्या के हनुमानगढ़ी के तलहटी इलाकों में यह सेवा कार्य संचालित किया गया।
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प्रति मंगलवार 20 हजार से अधिक लोगों को भोजन: हर मंगलवार को सुबह 9 बजे से देर शाम तक विशाल स्तर पर पूरी-कद्दू की सब्जी, आलू-छोले, बूंदी और ठंडे शरबत का वितरण हुआ। आठों मंगलवारों को मिलाकर अनुमान के मुताबिक 2 लाख से अधिक राहगीरों, गरीब बच्चों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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क्रू मेंबर्स ने स्वयं की सेवा: फिल्म के निर्देशक, बैकग्राउंड स्कोर कंपोजर और तकनीकी टीम के सदस्य खुद सादे कपड़ों में पसीना बहाते हुए पूड़ियां तलने, पत्तल उठाने और पानी पिलाने की सेवा में जुटे रहे। टीम का मानना था कि जब तक अहंकार नहीं टूटेगा, तब तक संकटमोचन की कृपा हासिल नहीं हो सकती।
जब 8वें मंगलवार के बाद अचानक सुलझ गईं सारी जटिलताएं
टीम से जुड़े सूत्रों का दावा है कि जैसे ही 8वें बड़े मंगल का भंडारा और विशेष सुंदरकांड पाठ संपन्न हुआ, फिल्म की राह में आ रही तमाम प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय बाधाएं एक-एक करके चमत्कारिक रूप से दूर होने लगीं:
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नए वीएफएक्स पार्टनर्स का मिलना: दक्षिण भारत के एक प्रतिष्ठित स्टूडियो ने फिल्म के रुके हुए विजुअल इफेक्ट्स को रियायती दरों पर और रिकॉर्ड समय के भीतर पूरा करने की हामी भर दी।
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सेंसर बोर्ड से मिला 'यू' सर्टिफिकेट: केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के दृश्यों और संवादों की प्रामाणिकता की सराहना करते हुए बिना किसी बड़े कट के 'यू' (U) सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
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वितरकों का बदला रुख: शुरुआत में जो सिनेमाघर मालिक फिल्म को स्क्रीन देने से कतरा रहे थे, उन्होंने प्रीमियर और शुरुआती रुझानों को देखकर स्वतः ही शोज की संख्या दोगुनी कर दी।
बॉक्स ऑफिस पर 29वें दिन भी जारी है फिल्म का 'अदृश्य कवच'
आज जब फिल्म 'हनुमान अंश' अपने पांचवें हफ्ते में पहुंच चुकी है और यश की 500 करोड़ी 'टॉक्सिक' जैसी मेगा-बजट पैन इंडिया फिल्मों के कलेक्शन लड़खड़ा चुके हैं, तब भी यह फिल्म हर रोज करोड़ों की कमाई कर 100 करोड़ क्लब की दहलीज पर खड़ी है।
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि फिल्म की अंतर्निहित पवित्रता, भगवान हनुमान के चरित्र का मर्यादापूर्ण चित्रण और दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव ही इसकी सबसे बड़ी ताकत बना है। वहीं, फिल्म की निर्माण टीम इसे पूरी तरह 'पवनपुत्र का आशीर्वाद' मानती है। टीम के सदस्यों का कहना है कि 8 बड़े मंगल के उन भंडारों में आम लोगों के चेहरों पर जो तृप्ति और दुआएं थीं, उसी सकारात्मक ऊर्जा ने आज फिल्म को बॉक्स ऑफिस की हर सुनामी के सामने एक अभेद्य ढाल की तरह सुरक्षित रखा है।