बार-बार बेहोश होना सिर्फ कमजोरी नहीं! न्यूरोलॉजिस्ट से जानें हार्ट या ब्रेन की गंभीर बीमारी के छिपे हुए संकेत

बार-बार बेहोश होना सिर्फ कमजोरी नहीं! न्यूरोलॉजिस्ट से जानें हार्ट या ब्रेन की गंभीर बीमारी के छिपे हुए संकेत

भागदौड़ भरी जिंदगी में कभी खाना स्किप करने, धूप में ज्यादा देर रहने या अचानक उठने पर चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छा जाना एक आम बात मानी जाती है। लोग अक्सर इसे कमजोरी या डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, अगर आपको या आपके परिवार में किसी को बार-बार बेहोशी (Blackouts) आ रही है, तो सावधान हो जाइए। यह सिर्फ थकान नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदर पल रही किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल (मस्तिष्क) या कार्डियक (हृदय) बीमारी का बड़ा अलार्म हो सकता है।

बेहोशी (Syncope) आखिर क्यों आती है?

मेडिकल साइंस की भाषा में बेहोशी को 'सिंकोप' कहा जाता है। गुरुग्राम के मणिपाल अस्पताल (Manipal Hospital, Gurugram) में न्यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अपूर्वा शर्मा के मुताबिक, जब हमारे मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में रक्त (Blood flow) और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, तो इंसान कुछ पलों के लिए अपना होश खो बैठता है। कभी-कभार ऐसा होना तनाव, लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) या डिहाइड्रेशन का नतीजा हो सकता है। लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो इसका सीधा कनेक्शन दिल की धड़कन के अनियमित होने या ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन की भारी कमी से हो सकता है। इसे भूलकर भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

इन 10 चेतावनी संकेतों (Red Flags) को कभी न करें इग्नोर

डॉ. शर्मा चेतावनी देती हैं कि अगर बेहोशी के साथ शरीर में नीचे बताए गए लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • बिना किसी स्पष्ट कारण (जैसे गर्मी या थकान) के अचानक बेहोश हो जाना।

  • बेहोश होते समय शरीर में झटके आना या ऐंठन होना।

  • होश में आने के बाद लंबे समय तक कंफ्यूजन (भ्रम) की स्थिति में रहना।

  • होश आने के बाद अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस होना।

  • बेहोश होने से ठीक पहले छाती में तेज दर्द या दिल की धड़कन का असामान्य रूप से बढ़ जाना।

  • बेहोशी के दौरान यूरिन (मूत्राशय) पर से कंट्रोल खो देना।

  • जिम में वर्कआउट या कोई भी भारी एक्सरसाइज करते समय अचानक चक्कर खाकर गिर जाना।

  • बिना किसी चेतावनी के अचानक जमीन पर गिर पड़ना।

  • कुछ पलों के लिए आंखों का एक जगह टिक जाना (घूरना) या याददाश्त का चला जाना।

इग्नोर करने के गंभीर परिणाम और जरूरी मेडिकल टेस्ट

बार-बार ब्लैकआउट होने को नजरअंदाज करने से अचानक गिरने के कारण गंभीर चोट, फ्रैक्चर या सड़क दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सही समय पर बीमारी न पकड़ में आने से स्थिति जानलेवा हो सकती है। बीमारी की जड़ तक पहुंचने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट कुछ खास टेस्ट की सलाह देते हैं:

  • ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग: बीपी में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को जांचने के लिए।

  • ECG (ईसीजी) / हार्ट इवैल्यूएशन: हृदय की कार्यप्रणाली और धड़कन की जांच के लिए।

  • ब्रेन स्कैन (MRI/CT): मस्तिष्क में किसी ब्लॉकेज या ट्यूमर का पता लगाने के लिए।

  • EEG (ईईजी): ब्रेन की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी मापने और मिर्गी (Seizures) के दौरों की पुष्टि के लिए।

  • ब्लड टेस्ट: शरीर में शुगर लेवल और अन्य कमियों को जांचने के लिए।

डॉ. शर्मा के अनुसार, बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आती है, इलाज उतना ही सफल होता है। मेडिकल साइंस अब इतना उन्नत है कि जिन मरीजों में दवाइयों के बावजूद मिर्गी (Epilepsy) के दौरे कंट्रोल नहीं होते, उनके लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) जैसी एडवांस थेरेपी मौजूद है, जो लाइफसेवर साबित हो रही है।

अचानक कोई बेहोश हो जाए तो तुरंत क्या करें? (First Aid Tips)

अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है, तो डॉक्टर के पहुंचने तक सही प्राथमिक उपचार उसकी जान बचा सकता है:

  • मरीज को सीधा लिटाएं: व्यक्ति को तुरंत जमीन पर या किसी सपाट जगह पर सीधा लिटा दें। इससे गुरुत्वाकर्षण के कारण मस्तिष्क की ओर खून का प्रवाह तेज हो जाता है।

  • कपड़े ढीले करें: सांस लेने में आसानी के लिए गले की टाई, कॉलर के बटन या तंग कपड़ों को तुरंत ढीला कर दें।

  • कुछ भी खिलाने-पिलाने की गलती न करें: जब तक व्यक्ति पूरी तरह से होश में न आ जाए, उसके मुंह में पानी या कोई भी खाने की चीज न डालें। इससे खाना या पानी सांस की नली में फंस सकता है और दम घुटने (Choking) का खतरा रहता है।

  • लक्षणों पर नजर रखें: होश में आने के बाद अगर मरीज छाती में दर्द, तेज धड़कन या भारी कंफ्यूजन की शिकायत करे, तो बिना देरी किए उसे इमरजेंसी वार्ड में ले जाएं।

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