अब छोटे क्लिनिक और OPD भी होंगे डिजिटल, सरकार लाई Cloud-Based हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम

अब छोटे क्लिनिक और OPD भी होंगे डिजिटल, सरकार लाई Cloud-Based हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम

भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा कदम उठाया है। देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में चल रहे लाखों छोटे क्लिनिक और ओपीडी (OPD) आज भी मरीजों का रिकॉर्ड रखने के लिए पुराने कागजी रजिस्टरों पर निर्भर हैं। इसी पारंपरिक व्यवस्था को जड़ से बदलने और छोटे डॉक्टरों को सशक्त बनाने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने एक अत्याधुनिक क्लाउड-आधारित हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) लॉन्च किया है, जिसका नाम eSushrut@Clinic रखा गया है। सरकार की इस महा-योजना के तहत अब देश के सभी प्राइमरी हेल्थ सेंटर, सब-सेंटर, वेलनेस सेंटर और निजी क्लिनिक बेहद आसानी से डिजिटल नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।

छोटे डॉक्टरों की बड़ी समस्या का अंत: भारी-भरकम और महंगे सॉफ्टवेयरों से मिली मुक्ति

स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक बाजार में मौजूद बड़े और कॉर्पोरेट स्तर के एचएमआईएस (HMIS) सॉफ्टवेयर काफी जटिल और अत्यधिक महंगे होते थे। यही वजह थी कि सीमित बजट में काम करने वाले छोटे क्लीनिक डिजिटल हेल्थ की इस रेस में पीछे छूट रहे थे और हाथ से पर्चे लिखने को मजबूर थे। काफी समय से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एक ऐसे हल्के, सुलभ और किफायती सरकारी सॉफ्टवेयर की मांग की जा रही थी जो स्थानीय स्तर पर काम कर सके। eSushrut@Clinic ने डॉक्टरों की इस लंबी प्रतीक्षा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

बोलकर दर्ज करें मरीजों की बीमारी: eSushrut@Clinic के ये 5 एडवांस फीचर्स उड़ा देंगे होश

यह सरकारी प्लेटफॉर्म डॉक्टरों और क्लिनिक स्टाफ के रोजमर्रा के कामों को ऑटोमैटिक और बेहद आसान बना देगा। इस सिस्टम की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी 'स्पीच-टू-टेक्स्ट' (Speech-to-Text) तकनीक है, जिसकी मदद से डॉक्टर बिना टाइप किए सिर्फ बोलकर भी मरीज का पर्चा और दवाइयां कंप्यूटर में दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें:

  • मरीजों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन, ऑटोमैटिक बिलिंग और विस्तृत एमआईएस (MIS) रिपोर्टिंग की सुविधा है।

  • क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS) दिया गया है, जो इलाज और दवाओं के चयन में डॉक्टरों की मदद करेगा और मानवीय चूक की गुंजाइश को न्यूनतम करेगा।

  • इसे चलाने के लिए किसी भारी-भरकम कंप्यूटर सेटअप या विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है; इसे मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप से कहीं भी एक्सेस किया जा सकता है।

  • यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के नवीनतम फीचर्स जैसे 'Find ABHA' और 'Scan & Share' से पूरी तरह लिंक है।

केवल प्रमाणित डॉक्टर ही कर सकेंगे इस्तेमाल: जानिए कौन उठा सकता है इस डिजिटल सेवा का लाभ

इस संवेदनशील हेल्थ प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त नियम तय किए हैं। eSushrut@Clinic से जुड़ने के लिए देश के डॉक्टरों का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) और उनकी क्लिनिक का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) में पंजीकृत होना अनिवार्य है। जो चिकित्सा पेशेवर एचपीआर (HPR) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे इस सॉफ्टवेयर को लॉगिन नहीं कर पाएंगे। इस कड़े सुरक्षा चक्र से यह पूरी तरह सुनिश्चित होगा कि केवल असली, योग्य और सरकार द्वारा प्रमाणित डॉक्टर ही इस संवेदनशील डिजिटल सिस्टम का संचालन कर सकें और मरीजों का डेटा सुरक्षित रहे।

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इस डिजिटल क्रांति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने इसकी कीमतें हैरान करने वाली रखी हैं। पांच यूजर (कर्मचारियों) तक के उपयोग के लिए इस सॉफ्टवेयर का मूल शुल्क 499 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया है। लेकिन एनएचए (NHA) के साथ हुए विशेष समझौते के तहत डॉक्टरों को इस पर 200 रुपये की सीधी छूट मिलेगी, जिसके बाद प्रभावी कीमत केवल 299 रुपये प्रति महीना रह जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि शुरुआती तीन महीनों के लिए यह सॉफ्टवेयर डॉक्टरों को बिल्कुल मुफ्त (Free of Cost) दिया जा रहा है। यदि कोई क्लिनिक 5 से अधिक यूजर जोड़ना चाहता है, तो उसे प्रति अतिरिक्त यूजर के लिए मात्र 50 रुपये अलग से देने होंगे।

NHA और C-DAC का महा-गठबंधन: 15 से ज्यादा एम्स (AIIMS) में पहले से सफल है यह सिस्टम

इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुचारू रूप से चलाने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) और प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत सॉफ्टवेयर के तकनीकी रख-रखाव और नए अपडेट्स का पूरा जिम्मा सी-डैक (C-DAC) संभालेगा, जबकि वित्तीय मदद और क्लाउड होस्टिंग का पूरा खर्च एनएचए उठाएगा। मरीजों को भेजे जाने वाले आईवीडीएम (ABDM) एसएमएस और डॉक्टरों की सहायता के लिए 24/7 कॉल सेंटर की सुविधा भी एनएचए द्वारा मुफ्त दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश भर में 800 से ज्यादा छोटी स्वास्थ्य सुविधाएं eSushrut@Clinic से जुड़ चुकी हैं और 680 से अधिक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स बनाए जा चुके हैं। आपको बता दें कि सी-डैक का मुख्य ई-सुश्रुत सॉफ्टवेयर पहले से ही देश के 15 से अधिक एम्स (AIIMS) और बड़े राजकीय अस्पतालों में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहा है।

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