ईयर ड्रॉप डालते समय की जाने वाली ये 4 गलतियां बना सकती हैं बहरा, जानें इस्तेमाल का एकदम सही तरीका

ईयर ड्रॉप डालते समय की जाने वाली ये 4 गलतियां बना सकती हैं बहरा, जानें इस्तेमाल का एकदम सही तरीका

कान में अचानक तेज दर्द होना, सनसनाहट महसूस होना या ईयरवैक्स (कान का मैल) जमा हो जाना बेहद आम समस्याएं हैं। इन परेशानियों से तुरंत राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग डॉक्टर की सलाह पर या सीधे मेडिकल स्टोर से ओवर-द-काउंटर (OTC) ईयर ड्रॉप्स खरीदकर कान में डाल लेते हैं। वैसे तो ईयर ड्रॉप्स कान की बीमारियों को ठीक करने का सबसे असरदार और आसान जरिया हैं, लेकिन लाइफस्टाइल और हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके इस्तेमाल में की गई जरा सी भी लापरवाही आपके कान के पर्दे को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है। ईयर ड्रॉप डालते समय अनजाने में की जाने वाली सिर्फ 4 आम गलतियां कान के भीतर दर्दनाक फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन (Otomycosis) को जन्म दे सकती हैं। आइए जानते हैं कि ड्रॉप्स का इस्तेमाल करते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

भूलकर भी न करें ये 4 बड़ी गलतियां: बढ़ सकता है फंगल इंफेक्शन का खतरा

कान एक बेहद संवेदनशील अंग है और इसके इलाज में की गई कोई भी छोटी चूक इंफेक्शन को कई गुना बढ़ा सकती है। यदि आप ईयर ड्रॉप यूज कर रहे हैं, तो इन आदतों को तुरंत बदलें:

  • ड्रॉपर की टिप को छूना: ईयर ड्रॉप की बोतल के ड्रॉपर की टिप को कभी भी अपने हाथ की उंगलियों या कान के अंदरूनी हिस्से से टच नहीं होने देना चाहिए। ऐसा करने से हाथों और कान के बैक्टीरिया ड्रॉपर पर लग जाते हैं और पूरी दवा संक्रमित हो जाती है, जिससे अगली बार ड्रॉप डालने पर कान में गंभीर फंगल इंफेक्शन हो जाता है।

  • इलाज के दौरान पानी का इस्तेमाल: जब कान का ट्रीटमेंट चल रहा हो, तब कान के भीतर पानी जाने से हर हाल में बचाना चाहिए। बहुत से लोग नहाते समय कान को पानी से साफ करने की भूल करते हैं। नमी मिलने के कारण कान के अंदर फंगस तेजी से पनपने लगती है और हीलिंग की गति बेहद धीमी हो जाती है।

  • अधूरा कोर्स छोड़ना: अक्सर लोग कान का दर्द या खुजली थोड़ी कम होते ही एंटीबायोटिक या एंटीफंगल ईयर ड्रॉप्स डालना बंद कर देते हैं। ऐसा करने से बैक्टीरिया और फंगस पूरी तरह खत्म नहीं होते और वे दवा के प्रति रेजिस्टेंट हो जाते हैं, जिससे दोबारा होने वाला इंफेक्शन पहले से ज्यादा खतरनाक होता है।

  • ईयर बड से सफाई करना: ड्रॉप डालने के बाद कान के मैल को निकालने के लिए कभी भी कॉटन ईयर बड्स, माचिस की तीली या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल न करें। यह आदत कान के पर्दे को फाड़ सकती है और दवा के असर को खत्म कर देती है।

यह है ईयर ड्रॉप्स डालने का साइंटिफिक और सही तरीका: ग्रेविटी का लें सहारा

अगर आप चाहते हैं कि आपकी दवा का आपके कान पर पूरा और सही असर हो, तो हमेशा इन स्टेप्स को फॉलो करते हुए ही ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें:

  • हथेलियों के बीच बोतल को रगड़ें: फ्रिज या ठंडी जगह पर रखी सीधे कोल्ड ईयर ड्रॉप कान में कभी नहीं डालनी चाहिए। ठंडी दवा कान के आंतरिक हिस्से में जाते ही मस्तिष्क की नसों को प्रभावित करती है, जिससे आपको अचानक तेज चक्कर (Vertigo) आ सकता है। इसलिए डालने से पहले बोतल को दोनों हथेलियों के बीच रखकर थोड़ी देर रगड़ें ताकि वह शरीर के तापमान के बराबर वॉर्म हो जाए।

  • सिर और कान की पोजीशन: ड्रॉप डालते समय अपने सिर को पूरी तरह से एक तरफ झुकाएं, जिससे प्रभावित कान आसमान की तरफ ऊपर रहे। इसके बाद कान के ऊपरी हिस्से (पिन्ना) को हल्के से ऊपर और पीछे की तरफ खींचें। ऐसा करने से कान की टेढ़ी नली (ईयर कैनाल) बिल्कुल सीधी हो जाती है।

  • ग्रेविटी और हल्का दबाव: अब निर्धारित बूंदें कान में डालें। ड्रॉप डालने के तुरंत बाद कान के आगे के छोटे हिस्से (ट्रेगस) को उंगली से हल्के से दबाएं और छोड़ें। ग्रेविटी और इस हल्के दबाव के कारण दवा तुरंत ईयर कैनाल के सबसे गहरे हिस्से तक पहुंच जाती है, और आपको बहुत लंबे समय तक सिर झुकाकर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती।

इन 4 गंभीर लक्षणों को न करें नजरअंदाज: तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क

कान की हर समस्या एक जैसी नहीं होती और हर दर्द के लिए एक ही ईयर ड्रॉप का इस्तेमाल करना सबसे घातक तरकीब है। यदि आपको ईयर ड्रॉप इस्तेमाल करने के दौरान या बाद में निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो बिना समय गंवाए तुरंत किसी अच्छे ईएनटी (ENT) स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाएं:

  • कान के भीतर अचानक बहुत तेज या असहनीय दर्द शुरू हो जाना।

  • ईयर ड्रॉप डालने के बाद कान का दर्द कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ जाना।

  • अचानक से सुनने की क्षमता (Hearing Power) में कमी महसूस होना या कम सुनाई देना।

  • सिर घूमने या चक्कर आने की समस्या होना, या फिर कान के भीतर लगातार सीटी और घंटी बजने जैसी आवाजें (Tinnitus) आना।

 

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