राम मंदिर दान चोरी खुलासा: पकड़े जाने से बचने के लिए गायब किए गए CCTV फुटेज, साजिशन हुई ऑडिट रिपोर्ट की अनदेखी
अयोध्या के ऐतिहासिक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हुए महा-अग्निकांड जैसे इस दान चोरी घोटाले में विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एसआईटी के ताजा और सबसे बड़े खुलासे के मुताबिक, यह कोई सामान्य चोरी नहीं बल्कि एक सोची-समझी गहरी साजिश थी, जिसमें साजिशन ऑडिट रिपोर्ट की गंभीर चेतावनियों को पूरी तरह रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया था। यही नहीं, जब आरोपियों को लगा कि वे कानूनी फंदे में फंस सकते हैं, तो उन्होंने अपने गुनाहों के सबूत मिटाने के लिए मंदिर परिसर और गणना कक्ष के बेहद संवेदनशील सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को ही सिस्टम से पूरी तरह डिलीट और गायब कर दिया। उपलब्ध कड़ियों के आधार पर 27 अप्रैल 2026 के बाद ही कैमरों में रिकॉर्ड 70 बार चोरी होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, जिससे साफ है कि यह खेल सालों से चल रहा था।
वित्तीय वर्ष 2022 से ही जारी थी धांधली: ऑडिटर्स की कड़क चेतावनियों को दबाया गया
एसआईटी की तफ्तीश में यह कड़वा सच सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 तक की अवधि में इंटरनल और एक्सटर्नल ऑडिट रिपोर्टों में मंदिर के धन प्रबंधन को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाली वित्तीय अनियमितताओं का ब्योरा दिया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा था कि मंदिर की कैश मैनेजमेंट प्रणाली में गंभीर बुनियादी कमियां हैं।
दानपात्र (हुंडी) को खोलने की तारीखों और कुल हुंडियों की वास्तविक संख्या के रिकॉर्ड में भारी हेराफेरी की जा रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जब हुंडियों से नोटों को निकालकर मुख्य गणना कक्ष में ट्रांसफर किया जाता था, उस पूरे रास्ते और प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी कैमरों की कोई कवरेज ही नहीं थी। इसके अलावा, भक्तों द्वारा दान में दी जाने वाली बहुमूल्य सोने-चांदी की वस्तुओं की कोई आधिकारिक रसीद तक जारी नहीं की जा रही थी। ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर 180 दिनों का सीसीटीवी बैकअप सुरक्षित रखने की कड़क सिफारिश की गई थी, जिसे ट्रस्ट के रसूखदार पदाधिकारियों ने साजिशन ठंडे बस्ते में डाल दिया।
27 अप्रैल से पहले भी साफ हो रहा था खजाना: आरोपियों के बैंक खातों ने खोली पोल
जांच के दौरान जब एसआईटी ने डिजिटल साक्ष्य जुटाने की कोशिश की, तो उन्हें सर्वर रूम से अनुशंसित 180 दिनों के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने बड़ी चतुराई से पुरानी रिकॉर्डिंग को पूरी तरह साफ कर दिया था। हालांकि, जो सीमित फुटेज एसआईटी के हाथ लगे, उसी में आरोपियों द्वारा करीब 70 बार दान पेटी से नोटों के बंडल उड़ाने के रोंगटे खड़े कर देने वाले प्रमाण मिल गए हैं।
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार आरोपियों के घरों से बरामद भारी-भरकम नकदी, सोने के आभूषण और उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा आय से अधिक बेहिसाब संपत्ति इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि चोरी का यह काला धंधा 27 अप्रैल 2026 से बहुत पहले से, संभवतः कई वर्षों से अनवरत चल रहा था। फुटेज न होने के कारण उससे पहले की घटनाओं का सटीक वित्तीय आकलन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
जानबूझकर ढीले किए गए सुरक्षा नियम: बिना तलाशी के तिजोरी तक थी सीधी पहुंच
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) दोनों के पर्यवेक्षकों को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि यह महा-अपराध सिर्फ इसलिए मुमकिन हो सका क्योंकि निर्धारित सुरक्षा मानकों का जमीन पर कोई वजूद ही नहीं था। नियम के मुताबिक गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के समय हर व्यक्ति की सघन तलाशी होनी थी, एक विशेष बिना जेब वाली वेशभूषा तय थी, और हर मूल्यवर्ग के नोटों का तुरंत दस्तावेजीकरण होना था, लेकिन व्यावहारिक तौर पर वहां कोई रोक-टोक नहीं थी।
इससे भी बड़ा घालमेल 20 सितंबर 2024 को तय की गई सख्त तलाशी व्यवस्था में किया गया। 6 फरवरी 2025 को जारी की गई नई एसओपी (SOP) में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अचानक एक रहस्यमयी संशोधन किया, जिसके तहत कड़क तलाशी के नियम को बदलकर उसे 'नियमित या रैंडम' (कभी-कभार) करने की भारी शिथिलता दे दी गई। एसआईटी ने इस बात पर गंभीर चिंता और गहरा संदेह जताया है कि आखिर किन गुप्त परिस्थितियों और दबावों में आकर ट्रस्ट के वीआईपी पदाधिकारियों ने सुरक्षा नियमों को इतना लचर बनाया। इस शिथिल प्रावधान की आड़ में हालात यह हो गए थे कि हफ्तों तक किसी भी कर्मचारी की कोई रैंडम चेकिंग तक नहीं की जाती थी, जिससे चोरों के हौसले आसमान पर पहुंच गए।