भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 107 सड़कें ब्लॉक, देहरादून-नैनीताल समेत 7 जिलों में रेड अलर्ट जारी
देवभूमि उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है, जिससे पूरे राज्य में आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हुआ है, जिससे चारधाम यात्रा रूट सहित प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह ठप हो गए हैं। नदियां उफान पर हैं और मौसम के बिगड़ते मिजाज को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 7 संवेदनशील जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' (Red Alert) जारी कर दिया है। शासन ने किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और जिला प्रशासन को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
लैंडस्लाइड से नौ स्टेट हाईवे और बीआरओ की सड़कें बंद: थम गई पहाड़ों की रफ्तार
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ों से लगातार गिरते पत्थरों और मलबे के कारण राज्य की परिवहन व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ गई है। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों ही मंडलों में भूस्खलन के चलते 9 महत्वपूर्ण स्टेट हाईवे और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की मुख्य सामरिक सड़क समेत कुल 107 रास्तों पर ट्रैफिक पूरी तरह रुक गया है। सड़कें बंद होने से सैकड़ों सैलानी और स्थानीय लोग जगह-जगह फंस गए हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें जेसीबी मशीनों की मदद से युद्धस्तर पर मलबा हटाकर रास्तों को साफ करने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी बाधा बन रही है।
काशीपुर में रिकॉर्ड 206 एमएम मूसलाधार बारिश: टिहरी में भूस्खलन से ढहा मकान
उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी दोनों ही इलाकों में कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटों में उधम सिंह नगर के काशीपुर में सबसे ज्यादा 206 मिलीमीटर (mm) बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा जसपुर में 190 mm, लक्सर में 180 mm, कोटद्वार में 160 mm और तीर्थ नगरी हरिद्वार में 132.9 mm पानी बरसा है। भारी बारिश का असर देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में भी साफ दिख रहा है। उधर टिहरी गढ़वाल के कद्दूखाल क्षेत्र से एक डराने वाली तस्वीर सामने आई, जहां बुधवार शाम को भारी लैंडस्लाइड के कारण एक मकान भरभराकर ढह गया। राहत की बात यह रही कि यह मकान खाली था और प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए डेंजर ज़ोन में बने दो रेस्टोरेंट और कई अस्थाई ठिकानों को पहले ही खाली करा लिया था, जिससे एक बड़ा जानमाल का नुकसान टल गया।
देहरादून समेत 7 जिलों में रेड अलर्ट का सायरन: 4 जनपदों में कक्षा 12वीं तक के स्कूल बंद
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने मौसम की गंभीरता को देखते हुए देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' घोषित किया है। इन इलाकों में बिजली कड़कने, तेज अंधड़ चलने और कुछ ही घंटों में अत्यधिक तीव्र बारिश होने की आशंका जताई गई है। राज्य के बाकी हिस्सों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को भी नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर में रेड अलर्ट लागू रहेगा। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देहरादून सहित चार बड़े जिलों के जिलाधिकारियों ने कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पूर्ण अवकाश घोषित कर दिया है।
खतरे के निशान के पास पहुंची अलकनंदा और गंगा: नदियों के किनारे न जाने की सख्त अपील
लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण उत्तराखंड की जीवनदायिनी नदियां उफान पर आ गई हैं। सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनगर में अलकनंदा, कर्णप्रयाग में पिंडर, देवप्रयाग और ऋषिकेश में गंगा, धारचूला में काली, पिथौरागढ़ में सरयू और जौलजीबी में गौरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, वर्तमान में सभी नदियां खतरे के निशान से थोड़ा नीचे हैं, लेकिन प्रशासन फ्लड कंट्रोल रूम के जरिए पल-पल की निगरानी कर रहा है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जनता से बेहद भावुक और सख्त अपील करते हुए कहा है कि लोग इस खराब मौसम में किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी यात्रा (Travel) से पूरी तरह बचें। उन्होंने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदियों के तटों और भूस्खलन संभावित संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की हिदायत दी है और केवल आधिकारिक बुलेटिन पर ही भरोसा करने को कहा है।