आषाढ़ मास शुरू; जगन्नाथ रथ यात्रा, देवशयनी एकादशी और गुप्त नवरात्रि समेत इस महीने आएंगे ये 4 बड़े त्योहार
नई दिल्ली/वाराणसी: हिंदू सनातन पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की समाप्ति के साथ ही धर्म, अध्यात्म और पवित्र व्रतों के पावन महीने 'आषाढ़' का भव्य शुभारंभ हो चुका है। आषाढ़ मास की शुरुआत 30 जून 2026 से हो गई है, जिसका समापन 29 जुलाई 2026 को होगा। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं में आषाढ़ के महीने को भक्ति, जप-तप और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
यह महीना न केवल ऋतु परिवर्तन (वर्षा ऋतु का आगमन) का संकेत है, बल्कि भगवान विष्णु और साक्षात शक्ति की आराधना के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इसी महीने से सृष्टि के पालनहार चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिससे 'चातुर्मास' का आरंभ होता है। आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं जुलाई के इस महीने में आने वाले आषाढ़ मास के 4 सबसे बड़े व्रत-त्योहारों की सटीक तारीखें और उनका धार्मिक महत्व।
1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (15 जुलाई से 23 जुलाई)
आषाढ़ मास के प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। साल में आने वाली दो मुख्य नवरात्रियों के उलट, गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की तंत्र साधना और गुप्त पूजा का विधान है।
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महत्व: यह पर्व शक्ति की उपासना, गुप्त साधना और आत्मबल को मजबूत करने के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान साधक मौन, उपवास और ध्यान के माध्यम से सिद्धियां प्राप्त करते हैं और जीवन से शत्रुओं व बाधाओं का नाश होता है।
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तारीख: इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 को समाप्त होगी।
2. भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा (16 जुलाई से 24 जुलाई)
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। यह भारत के सबसे प्राचीन, भव्य और पवित्र धार्मिक उत्सवों में से एक है।
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महत्व: इस पावन अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से अपनी मौसी के घर यानी गुंडीचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। मान्यता है कि रथ खींचने मात्र से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
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तारीख: इस साल यह भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 24 जुलाई 2026 तक चलेगी।
3. देवशयनी एकादशी और चातुर्मास (25 जुलाई)
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है।
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महत्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ 'चातुर्मास' का आरंभ हो जाता है। इन चार महीनों के दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है। देवशयन के कारण इन चार महीनों में विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है।
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तारीख: इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
4. आषाढ़ गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई)
आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को देश भर में 'गुरु पूर्णिमा' (Guru Purnima) के महापर्व के रूप में बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे महान वेद व्यास जी की जयंती के कारण 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है।
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महत्व: यह पावन दिन हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुओं को समर्पित होता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का पूजन करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। इसी दिन के साथ आषाढ़ महीने का समापन भी हो जाता है।
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तारीख: इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।