Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत 28 अगस्त को, नोट करें लक्ष्मी पूजा के 4 सबसे शुभ स्थिर लग्न मुहूर्त

Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत 28 अगस्त को, नोट करें लक्ष्मी पूजा के 4 सबसे शुभ स्थिर लग्न मुहूर्त

सनातन धर्म में सावन (श्रावण) के पवित्र महीने का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। इस पावन महीने में जहां एक तरफ भगवान शिव की आराधना की जाती है, वहीं दूसरी तरफ सावन के आखिरी शुक्रवार को रखा जाने वाला वरलक्ष्मी व्रत (Varalakshmi Vrat 2026) सुख, समृद्धि और अटूट धन-वैभव का महा-आशीर्वाद लेकर आता है। वर्ष 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इस श्रृंखला में सबसे प्रमुख माना जाने वाला वरलक्ष्मी व्रत 28 अगस्त 2026 को पूरे देश, विशेषकर दक्षिण भारत में बेहद धूमधाम से मनाया जाएगा। इस महाव्रत के ठीक दो दिन बाद सावन पूर्णिमा मनाई जाएगी। धार्मिक पुराणों के अनुसार, इस एक व्रत का फल वर्ष भर के सभी लक्ष्मी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ और दीपावली की महालक्ष्मी पूजा के समान फलदायी माना गया है।

स्थिर लग्न में करें वरलक्ष्मी पूजा: दीर्घकालीन सुख-समृद्धि के लिए नोट करें 4 महा-मुहूर्त

मुहूर्त ज्योतिष के अनुसार, धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना करने का सबसे सर्वोत्तम और अचूक समय 'स्थिर लग्न' (Sthira Lagna) को माना गया है। ऐसी मान्यता है कि स्थिर लग्न के दौरान की गई पूजा से मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से वास करती हैं और जातक को कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मां वरलक्ष्मी की पूजा के लिए दिनभर में चार विशेष स्थिर लग्न मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जो इस प्रकार हैं:

  • सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (प्रातः): सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक।

  • वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (अपराह्न): दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक।

  • कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त (सन्ध्या): शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात 07 बजकर 37 मिनट तक।

  • वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 10 बजकर 37 मिनट से देर रात 12 बजकर 33 मिनट तक।

कौन हैं देवी वरलक्ष्मी? जानिए क्षीर सागर से प्रकट हुईं माता का अद्भुत स्वरूप

इस पावन व्रत में मुख्य रूप से मां वरलक्ष्मी की अर्चना की जाती है, जो साक्षात धनलक्ष्मी महालक्ष्मी का ही वरदान देने वाला परम दयालु स्वरूप हैं। शास्त्रों में 'वर' का अर्थ वरदान बताया गया है, अर्थात जो लक्ष्मी अपने भक्तों की सभी न्यायसंगत मनोकामनाएं तुरंत पूर्ण करती हैं, उन्हें वरलक्ष्मी कहा जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, देवी वरलक्ष्मी का प्रादुर्भाव दूध के अलौकिक क्षीर सागर से हुआ था। उनके दिव्य रूप का वर्णन करते हुए ऋषियों ने बताया है कि उनका रंग-रूप दूधिया सागर के समान अत्यंत श्वेत और चमकीला है और वे उसी पवित्र रंग के दिव्य वस्त्र धारण करती हैं।

जब भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया इस व्रत का रहस्य: कुंडिनपुर की चारुमति की कथा

स्कन्द पुराण और भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत की महिमा का एक श्लोक के माध्यम से सुंदर वर्णन मिलता है—वरलक्ष्मीव्रतं नाम सर्वसौभाग्यवर्धनम्। आयुरारोग्यसम्पत्तिं पुत्रपौत्रप्रवर्धनम्॥ अर्थात यह व्रत सौभाग्य, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, धन-संपत्ति और वंश वृद्धि देने वाला है। स्कन्द पुराण के अनुसार, स्वयं देवों के देव महादेव ने माता पार्वती को इस व्रत का महत्व समझाते हुए एक कथा सुनाई थी। प्राचीन काल में मगध देश के कुंडिनपुर नगर में चारुमति नाम की एक अत्यंत पतिव्रता और संस्कारी महिला रहती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात माता लक्ष्मी ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और सावन के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत करने का आदेश दिया। चारुमति ने नगर की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर पूरे विधि-विधान से यह व्रत संपन्न किया, जिसके प्रभाव से उनका पूरा घर धन, धान्य, स्वर्ण और अटूट सौभाग्य से भर गया।

अखंड सौभाग्य से लेकर दरिद्रता मुक्ति तक: वरलक्ष्मी व्रत रखने के 8 चमत्कारी फल

शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस दिन उपवास रखकर चारुमति की कथा का श्रवण करते हैं और स्थिर लग्न में दीप जलाते हैं, उन्हें निम्नलिखित दिव्य फलों की प्राप्ति होती है:

  • महिलाओं को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में मधुरता का वरदान मिलता है।

  • पति की आयु लंबी होती है और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

  • घर के व्यापार और तिजोरी में धन, वैभव व अन्न-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

  • परिवार के सदस्यों के बीच गृहक्लेश समाप्त होकर सुख-शांति का माहौल बनता है।

  • योग्य संतान का सुख मिलता है और वंश की परंपरा आगे बढ़ती है।

  • जीवन में लंबे समय से चला आ रहा आर्थिक संकट और भयंकर दरिद्रता दूर होती है।

  • घर की चौखट पर स्थायी रूप से सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का वास होता है।

  • जातक के रुके हुए सभी कार्य संपन्न होते हैं और करियर में अपार सफलता मिलती है।

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