रक्षा बंधन पर सुबह 8 बजे से चंद्र ग्रहण, क्या बदल जाएगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त? धर्मशास्त्र के अनुसार जानें सूतक काल का सच और सटीक समय

रक्षा बंधन पर सुबह 8 बजे से चंद्र ग्रहण, क्या बदल जाएगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त? धर्मशास्त्र के अनुसार जानें सूतक काल का सच और सटीक समय

भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का महापर्व रक्षा बंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को पूरे देश और दुनिया में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षा बंधन के पावन पर्व पर एक बड़ी खगोलीय घटना को लेकर श्रद्धालुओं और बहनों के बीच संशय की स्थिति बनी हुई है। पंचांग और खगोलीय गणनाओं के अनुसार रक्षा बंधन के दिन ही सुबह लगभग 8 बजे से आकाशमंडल में गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण घटित होने जा रहा है।

ऐसे में सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं के बीच यह प्रश्न सबसे तेजी से उठ रहा है कि क्या चंद्र ग्रहण के कारण राखी बांधने का समय बदल जाएगा और क्या ग्रहण के दौरान सूतक काल के नियम लागू होंगे? ज्योतिष शास्त्र और वैदिक धर्मशास्त्रों के सूक्ष्म अध्ययन के अनुसार, भारतीय नागरिकों और श्रद्धालुओं को इस चंद्र ग्रहण से तनिक भी भयभीत या असमंजस में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। भारत में रक्षा बंधन का पर्व पूरी गरिमा, उल्लास और बिना किसी समय परिवर्तन के अपने पूर्व निर्धारित शुभ मुहूर्त में ही मनाया जाएगा।

चंद्र ग्रहण का सटीक समय और खगोलीय स्थिति: जानिए कब से कब तक रहेगा ग्रहण

खगोल विज्ञान और राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार यह साल का दूसरा चंद्र ग्रहण है, जो एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Deep Partial Lunar Eclipse) होगा। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93 से 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी प्रच्छाया (Umbra) में प्रवेश करेगा।

भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार चंद्र ग्रहण के विभिन्न चरणों का समय इस प्रकार रहेगा:

  • उपच्छाया ग्रहण प्रारंभ (Penumbral Begins): सुबह 06:53 बजे

  • खंडग्रास/प्रच्छाया स्पर्श (Partial/Umbral Begins): सुबह 08:03 बजे से 08:04 बजे

  • ग्रहण का परमग्रास/चरम समय (Maximum Eclipse Peak): सुबह 09:43 बजे

  • प्रच्छाया समाप्त (Partial Ends): सुबह 11:21 बजे से 11:22 बजे

  • ग्रहण का पूर्ण मोक्ष (Penumbral Ends): दोपहर 12:31 बजे से 12:32 बजे

  • ग्रहण की कुल अवधि: लगभग 5 घंटे 39 मिनट।

क्या भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण और लगेगा सूतक काल? धर्मशास्त्र का नियम

वैदिक ज्योतिष और धर्मसिंधु व निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में ग्रहण और सूतक काल के संबंध में एक बहुत ही स्पष्ट नियम दिया गया है—'यस्य दर्शनं तस्य फलम्' अर्थात ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक प्रभाव केवल उन्हीं भू-भागों और क्षेत्रों में मान्य होता है जहाँ वह नग्न आंखों से दिखाई दे।

चूँकि यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:32 बजे के मध्य घटित हो रहा है, उस समय संपूर्ण भारत (दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित सभी राज्यों) में दिन का उजाला रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे स्थित रहेगा। भारत के किसी भी हिस्से में चंद्रमा दृश्यमान नहीं होगा।

शास्त्रों के अनुसार जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो:

  1. भारत में चंद्र ग्रहण का कोई भी 'सूतक काल' (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा।

  2. मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे और दैनिक पूजा-पाठ निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

  3. भोजन बनाने, खान-पान, गर्भवती महिलाओं के नियमों या शुभ संस्कारों पर ग्रहण का कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

  4. अतः रक्षा बंधन पर राखी बांधने के समय में ग्रहण के कारण कोई बदलाव नहीं होगा।

भद्रा का साया भी समाप्त: जानिए 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त

रक्षा बंधन के त्योहार में ग्रहण से भी बड़ा विचार 'भद्रा काल' का किया जाता है, क्योंकि शास्त्रों में भद्रा काल के दौरान रक्षासूत्र बांधना पूर्णतः वर्जित माना गया है। इस बार रक्षा बंधन के दिन भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा, क्योंकि भद्रा तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

पूर्णिमा तिथि और शुभ चौघड़िया के आधार पर राखी बांधने का सबसे उत्तम समय इस प्रकार है:

  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे से

  • पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 28 अगस्त को सुबह 09:48 बजे तक

  • प्रातःकालीन अमृत व शुभ मुहूर्त (सर्वोत्तम): सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक (इस समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी और भद्रा दोष भी नहीं रहेगा)।

  • अभिजीत मुहूर्त (अति शुभ समय): दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक।

  • अपराह्न काल मुहूर्त (दोपहर का समय): दोपहर 01:45 बजे से शाम 04:15 बजे तक।

  • प्रदोष काल मुहूर्त (संध्या पूजन): शाम 06:45 बजे से रात्रि 08:55 बजे तक।

उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय होने के कारण पूरे दिन रक्षा बंधन का पवित्र पर्व मनाया जा सकता है, किंतु सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे के बीच राखी बांधना आध्यात्मिक रूप से सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

लखनऊ, दिल्ली और यूपी समेत देश भर में कैसा रहेगा उत्सव का माहौल?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, कानपुर से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक रक्षा बंधन को लेकर बाजारों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय ज्योतिषाचार्यों और आचार्यों ने भी स्पष्ट किया है कि भारत की भौगोलिक सीमा में ग्रहण का प्रभाव शून्य होने के कारण सुबह से ही बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।

सार्वजनिक परिवहन, मिठाई की दुकानें और पूजा सामग्री के प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे। किसी भी मंदिर या धार्मिक संस्थान में दर्शन-पूजन पर कोई रोक नहीं रहेगी।

रक्षा बंधन पर राखी बांधते समय थाली में जरूर रखें ये 5 वस्तुएं

रक्षा बंधन के दिन पूजा की थाली का सुसज्जित होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। थाली में निम्नलिखित शास्त्रसम्मत वस्तुएं अवश्य शामिल करें:

  • रोली और कुमकुम: विजय, पराक्रम और मंगल का प्रतीक।

  • अखंडित अक्षत (साबुत चावल): सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए।

  • दीपक (देसी घी का): नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और भाई की आरती उतारने के लिए।

  • मिठाई: रिश्तों में मिठास और प्रेम बढ़ाने के लिए।

  • पवित्र रक्षासूत्र (राखी): सुरक्षा कवच और अटूट विश्वास का संवाहक।

राखी बांधने की सही विधि और दिशा:

राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जबकि बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं, इसके बाद 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥' मंत्र का उच्चारण करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। इसके उपरांत भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।

विदेश में रह रहे भारतीयों (NRI) के लिए क्या हैं नियम?

यह चंद्र ग्रहण उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, ब्रिटेन (UK), कनाडा और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

  • जो भारतीय अमेरिका (न्यू यॉर्क, कैलिफोर्निया, शिकागो), कनाडा या इंग्लैंड में रह रहे हैं, उनके स्थानीय समय के अनुसार वहाँ ग्रहण की दृश्यता रहेगी।

  • अतः विदेशों में जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां के निवासियों को स्थानीय समयानुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल और खान-पान के नियमों का पालन करना चाहिए तथा ग्रहण समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने की रस्म करनी चाहिए।

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