सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद लखनऊ में 101 अवैध इमारतों पर चलेगा बुलडोजर, 17 अगस्त से शुरू होगा महा-अभियान; लिस्ट में पूर्व राज्यपाल, मंत्रियों और रसूखदारों के बहुमंजिला अपार्टमेंट्स शामिल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों, अवैध प्लॉटिंग माफियाओं और बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिला इमारतें खड़ी करने वाले रसूखदारों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के बेहद कड़े रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर भर की 101 अवैध इमारतों को चिन्हित कर उनके ध्वस्तीकरण का विस्तृत एक्शन प्लान जारी कर दिया है। इस महा-अभियान की तारीख तय करते हुए 17 अगस्त से अवैध संरचनाओं को ढहाने के लिए बुलडोजर उतारने का निर्णय लिया गया है। खास बात यह है कि इस बार कार्रवाई के दायरे में केवल छोटे-मोटे निर्माण नहीं, बल्कि शहर के वीआईपी और पॉश इलाकों में स्थित कई अवैध बहुमंजिला अपार्टमेंट्स, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और प्रभावशाली व्यक्तियों की संपत्तियां शामिल हैं।
17 अगस्त से गरजेगा बुलडोजर: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद एलडीए का महा-अभियान
राजधानी में पिछले कुछ समय से अवैध निर्माणों और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार गंभीर रुख अपनाए हुए है। शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार और स्पष्ट आदेशों के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के नेतृत्व में शहर की अवैध इमारतों का व्यापक सर्वे कराया गया। इस सर्वे के आधार पर 100 से अधिक ऐसी इमारतों की अंतिम सूची को मंजूरी दी गई है, जिनका निर्माण या तो बिना किसी स्वीकृत मानचित्र (Sanctioned Map) के किया गया है या फिर स्वीकृत नक्शे से कई गुना अधिक अतिरिक्त निर्माण कर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, राजधानी में 100 से अधिक इमारतों को जमींदोज करने के लिए नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। प्राधिकरण ने अपने प्रवर्तन दस्ते (Enforcement Wing) को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। 17 अगस्त से शुरू होने वाले इस ध्वस्तीकरण अभियान को कई चरणों में चलाया जाएगा, ताकि शहर के अलग-अलग जोन्स में अवैध रूप से बने अवैध ढांचे पूरी तरह हटाए जा सकें।
निशाने पर अलीगंज की 51 इमारतें: 24 अगस्त को न्याय मित्र करेंगे ग्राउंड इंस्पेक्शन
इस पूरे ध्वस्तीकरण अभियान का सबसे संवेदनशील और प्रमुख केंद्र अलीगंज क्षेत्र बना हुआ है। एलडीए द्वारा तैयार की गई 101 इमारतों की सूची में अकेले अलीगंज क्षेत्र की 51 अवैध इमारतें शामिल हैं। इन 51 इमारतों को खुद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विशेष रूप से सूचीबद्ध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 'न्याय मित्र' (Amicus Curiae) की एक उच्चस्तरीय टीम 24 अगस्त को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र पहुंचेगी और चिन्हित की गई सभी 51 अवैध इमारतों का स्थलीय निरीक्षण (Ground Inspection) करेगी। इस निरीक्षण के दौरान न्याय मित्र की टीम यह जांचेगी कि किस भवन में कितने तल का अवैध निर्माण है, सेटबैक के नियमों का कितना उल्लंघन हुआ है और क्या वहां अग्नि सुरक्षा व निकास के पर्याप्त इंतजाम हैं।
निरीक्षण में सहायता के लिए एलडीए ने अपने योजना विभाग के दो अनुभवी ड्राफ्टमैन मुकेश वर्मा और दीपक को न्याय मित्र की टीम के साथ संबद्ध किया है। ये अधिकारी मौके पर ही सभी संबंधित मानचित्र, जोनल प्लान और मूल अभिलेख उपलब्ध कराएंगे। न्याय मित्र की यह ग्राउंड रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी, जिसके बाद कोर्ट की ओर से और भी कठोर आदेश आ सकते हैं।
रडार पर पूर्व राज्यपाल, मंत्री और रसूखदार: 101 अवैध संपत्तियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा तैयार
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आने के बाद एलडीए द्वारा तैयार की गई इस सूची में कई हाई-प्रोफाइल और रसूखदार चेहरों के नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है। जांच के दायरे में आई संपत्तियों में एक पूर्व राज्यपाल, एक पूर्व कैबिनेट मंत्री, एक मौजूदा विधायक, एक राज्य मंत्री, कई बड़े उद्योगपति और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़े भवन शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एक पूर्व राज्यपाल और एक पूर्व कैबिनेट मंत्री से जुड़ी तीन-तीन संपत्तियां सीधे तौर पर अवैध निर्माण की श्रेणी में पाई गई हैं। एलडीए ने सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने के लिए प्रत्येक भवन की एक विस्तृत 'कुंडली' तैयार की है। इसमें भवन में निर्मित मंजिलों की संख्या, निर्माण किस अवधि में हुआ, निर्माण के समय उस जोन में कौन-कौन से जोनल अधिकारी, अधिशासी अभियंता और अवर अभियंता (JE) तैनात थे, पूर्व में क्या नोटिस जारी हुए और उन पर समय रहते सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई—इन सभी सवालों का बिंदुवार ब्योरा दर्ज किया गया है।
सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल की मांग: विशेष प्रवर्तन टीमों का गठन
अवैध इमारतों के ध्वस्तीकरण के दौरान संभावित विरोध, कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्राधिकरण ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं। एलडीए के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने पुलिस आयुक्त को आधिकारिक पत्र भेजकर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और पीएसी (PAC) की कंपनियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि बहुमंजिला इमारतों को गिराने के दौरान आसपास के आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, ट्रैफिक डायवर्जन और मलबे के सुरक्षित निस्तारण के लिए मजबूत पुलिस व्यवस्था अनिवार्य है। इसके लिए एलडीए ने कई विशेष प्रवर्तन टीमों का गठन किया है, जिनमें वरिष्ठ नगर नियोजक, स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स, भारी मशीनरी (पोकलेन व बुलडोजर) के ऑपरेटर और मजिस्ट्रेट स्तर के प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहेंगे।
अलीगंज अग्निकांड से एसआईटी जांच तक: लापरवाह अफसरों पर भी गिरेगी गाज
राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभूतपूर्व आक्रामकता अलीगंज अग्निकांड के बाद पैदा हुई परिस्थितियों का परिणाम है। अलीगंज की एक इमारत में आग लगने की दर्दनाक घटना को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद गंभीरता से लिया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि शहर में बिना फायर एनओसी और बिना पास नक्शे के चल रहे अवैध कॉम्प्लेक्सों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण में शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। एसआईटी अपनी जांच में उन सभी तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पहचान कर रही है, जिनकी मिलीभगत या घोर लापरवाही के चलते रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में बहुमंजिला अवैध इमारतें खड़ी हो गईं। सुप्रीम कोर्ट में इस ऐतिहासिक मामले की अंतिम सुनवाई सितंबर के मध्य में प्रस्तावित है। इससे पहले न्याय मित्र की रिपोर्ट और एसआईटी की जांच आख्या कोर्ट के पटल पर रखी जाएगी।
लखनऊ में अवैध कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आम नागरिकों और फ्लैट खरीदारों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करने से पहले प्राधिकरण से उसकी स्वीकृति और स्वीकृत मानचित्र की प्रामाणिकता अवश्य जांच लें। बिना नक्शा पास कराए बेसमेंट, अतिरिक्त मंजिलें या व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले भवन स्वामियों को अब किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
17 अगस्त से शुरू होने जा रहा यह महा-ध्वस्तीकरण अभियान लखनऊ के इतिहास में अवैध निर्माणों के खिलाफ सबसे बड़ा निर्णायक कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में हो रही इस कार्रवाई ने शहर के तमाम अवैध बिल्डरों और भू-माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है।