अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: सरकार ने ट्रस्ट को सौंपी SIT की फाइनल रिपोर्ट, पूर्व महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा को बड़ी क्लीन चिट; 8 आरोपियों पर शिकंजा
अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में हेरफेर और चोरी के बहुचर्चित मामले में बड़ा प्रशासनिक व कानूनी मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग ने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा तैयार की गई विस्तृत और अंतिम जांच रिपोर्ट का विधि सम्मत परीक्षण करने के उपरांत इसे आगे की आवश्यक विधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया है।
इस फाइनल रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह निकलकर सामने आई है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं हैं। शासन और जांच एजेंसी के इस कदम से दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को मामले में बड़ी क्लीन चिट मिल गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि और ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे
राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों रामभक्तों द्वारा समर्पित किए जाने वाले चढ़ावे की धनराशि के प्रबंधन में कथित गड़बड़ी और चोरी का मुद्दा जून 2026 के पहले पखवाड़े में उस समय गरमाया था, जब विपक्षी दलों द्वारा मंदिर के दान पात्रों और गणना कक्ष से नकदी गायब होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
विवाद के राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ने के बाद, ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग करते हुए 27 जून को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। चंपत राय ने जांच एजेंसियों के समक्ष दिए अपने बयानों में शुरू से ही किसी भी प्रकार की संलिप्तता से स्पष्ट इनकार किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि चढ़ावा प्रबंधन कक्ष में संदिग्ध गतिविधियों की प्रारंभिक सूचना उन्होंने ही दी थी, जिसके आधार पर तत्काल आंतरिक सतर्कता और पुलिस कार्रवाई शुरू कराई गई थी।
तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय SIT की सघन पड़ताल
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस टीम का नेतृत्व लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि लखनऊ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
एसआईटी ने 15 जून से 20 जून के बीच अयोध्या में डेरा डालकर दान प्रबंधन की पूरी श्रृंखला की गहन फोरेंसिक व दस्तावेजी जांच की। इसमें दान पेटियों से नकदी निकालने, स्ट्रांग रूम में नकदी के भंडारण, नोटों की गिनती के काउंटिंग रूम, सीसीटीवी कैमरों के बैकअप फुटेज, एक्सेस कंट्रोल रजिस्टर तथा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों के साथ समन्वय तंत्र की विस्तृत पड़ताल की गई।
गिनती कक्ष में 70 बार हुई चोरी, 8 कर्मचारी और सहयोगी गिरफ्तार
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच दान गणना कक्ष (Counting Room) के भीतर लगभग 70 अलग-अलग मौकों पर नकदी चुराने और छिपाने की घटनाएं सीसीटीवी फुटेज में प्रमाणित पाई गईं। जांच में यह बात भी उजागर हुई कि ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा संयुक्त रूप से तय किए गए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कड़े नियमों की अनदेखी की गई थी, जिसमें प्रवेश और निकास द्वारों पर कर्मियों की नियमित व सघन तलाशी (फ्रिस्किंग) न होना मुख्य खामी रही।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर 25 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। फाइनल रिपोर्ट में भी केवल इन्हीं 8 आरोपियों को प्रत्यक्ष दोषी माना गया है:
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अविनाश शुक्ला
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अनुकल्प मिश्रा
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लवकुश मिश्रा
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मनीष कुमार यादव
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करुणेश पांडेय
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रमाशंकर मिश्रा
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सुभाष श्रीवास्तव
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राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू
इन आरोपियों ने पूछताछ और जांच के दौरान नोटों की गड्डियों से रकम चुराने के तौर-तरीकों को स्वीकार किया है, जिसके बाद अब इनके विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दाखिल कर कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली दूसरी SIT की जांच जारी
राज्य सरकार द्वारा गठित पहली एसआईटी द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत गठित दूसरी विशेष जांच टीम अभी भी मामले से जुड़े अन्य तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की गहराई से विवेचना कर रही है। आईजी किरण एस. के नेतृत्व में यह जांच टीम यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि भविष्य में मंदिर परिसर की संपूर्ण सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक या लीकेज की गुंजाइश न रहे।
इसके समानांतर, राम मंदिर निर्माण निधि का हाल ही में स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म (M/S V Sankar Aiyer & Co.) द्वारा करवाया गया विशेष थर्ड पार्टी वित्तीय ऑडिट भी पूरा हुआ था, जिसमें भक्तों द्वारा दान किए गए ₹3,300 करोड़ के संपूर्ण फंड का हिसाब-किताब पूरी तरह प्रमाणित और सटीक पाया गया था।
राम मंदिर प्रशासन में बड़े सुधार, नया एसओपी और ड्रेस कोड लागू
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्थाओं और दान प्रबंधन में व्यापक स्तर पर नीतिगत व संरचनात्मक बदलाव किए हैं:
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चढ़ावे की गणना का समय अब सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक केवल एक ही शिफ्ट में सीमित कर दिया गया है।
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गणना कक्ष में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए मेटल डिटेक्टर और बायोमेट्रिक फ्रिस्किंग अनिवार्य कर दी गई है।
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गर्भगृह और पूजा व्यवस्था में लगे पुजारियों व अर्चकों के लिए 15 अगस्त से नया ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है।
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मंदिर के प्रशासनिक संचालन को और अधिक पारदर्शी व पेशेवर बनाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पैनल पर विचार चल रहा है।
चंपत राय का एकांतवास और अयोध्या में चातुर्मास साधना
इधर, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय इस्तीफे के बाद से ही अयोध्या के रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास में हैं। वे 21 नवंबर तक चलने वाले चार महीने के पारंपरिक चातुर्मास व्रत का पालन कर रहे हैं, जिसके तहत वे प्रतिदिन लगभग 6 घंटे मौन रहकर राम मंत्र जाप और श्रीरामचरितमानस का पाठ कर रहे हैं।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में नाम न होने और क्लीन चिट मिलने की खबर के बाद अयोध्या के संत समाज और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली है। ट्रस्ट की आगामी आम बैठक में इस रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से पटल पर रखा जाएगा, जहां मंदिर की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और चढ़ावा प्रबंधन के नए तंत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।