काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद: सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, मध्यस्थता के लिए कल वाराणसी में अहम बैठक
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के बीच दशकों पुराने कानूनी विवाद को सुलझाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में सीधे कोई फैसला सुनाने के बजाय, इसे आपसी बातचीत, विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए हल करने का निर्देश दिया है।
इसी क्रम में कल यानी 14 जुलाई 2026 को वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) के वादियों और अधिवक्ताओं की एक बेहद अहम बैठक बुलाई गई है।
डेढ़ साल बाद फिर बढ़ी हलचल, 30 से अधिक लोग होंगे शामिल
12 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी से जुड़े नए मुकदमों पर रोक लगाने के बाद से सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई काफी धीमी पड़ गई थी। अब करीब डेढ़ वर्ष के अंतराल के बाद इस नई पहल से मामले में सरगर्मी फिर से बढ़ गई है।
कल होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मध्यस्थता केंद्र प्रभारी जज राजीव मुकुल पांडेय करेंगे। इस बातचीत में दोनों पक्षों की ओर से करीब 30 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
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हिंदू पक्ष: वादी सोहनलाल आर्या, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास, शैलेंद्र पाठक व्यास और उनके अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी।
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सरकारी पक्ष: जिला प्रशासन की ओर से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र और एएसआई (ASI) के प्रतिनिधि।
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मुस्लिम पक्ष: प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता (हालांकि, कुछ प्रतिवादी अधिवक्ताओं ने अभी नोटिस मिलने से इनकार किया है)।
अगस्त में तीन दिवसीय 'विशेष लोक अदालत'
कल की प्रारंभिक बैठक के बाद, आगामी 21 से 23 अगस्त 2026 तक तीन दिनों की एक 'विशेष लोक अदालत' का आयोजन किया जाएगा, जहाँ दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर किसी सर्वमान्य और शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
मध्यस्थता केंद्र पहुंचीं 4 प्रमुख मुकदमों की फाइलें
पहले चरण में उन चार मुख्य मुकदमों पर बातचीत होगी जिनकी फाइलें मध्यस्थता केंद्र भेजी जा चुकी हैं:
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शृंगार गौरी केस: इसमें समेकित 7 मुकदमों की फाइलें शामिल हैं, जिसके तहत ज्ञानवापी के बंद तहखानों सहित पूरे परिसर के एएसआई सर्वेक्षण और दर्शन-पूजन की मांग की गई है।
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शैलेंद्र पाठक व्यास का मुकदमा: इसमें उन्होंने खुद को व्यासजी के परिवार का सदस्य बताते हुए मुकदमों में पक्षकार बनाने की मांग की है।
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जमीन अदला-बदली विवाद: सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में लंबित इस मामले में ज्ञानवापी का स्वामित्व तय हुए बिना जिला प्रशासन और अंजुमन इंतेजामिया के बीच हुई जमीन की अदला-बदली को चुनौती दी गई है।
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अधिवक्ता नित्यानंद राय का मुकदमा।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे और प्रतिक्रियाएं
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हिंदू पक्ष का तर्क: हिंदू पक्ष के अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी का कहना है कि तीन महीने चले एएसआई सर्वे में मंदिर के स्पष्ट अवशेष मिले हैं, जिससे साबित होता है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ढांचे पर हुआ। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि मुस्लिम पक्ष स्वेच्छा से यह स्थान सौंप देता है, तो वे दूसरे पक्ष पर किसी प्रकार की सजा या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे।
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मुस्लिम पक्ष का रुख: मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है और यहां सदियों से नमाज पढ़ी जा रही है। मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि कोर्ट के इस निर्देश पर उनकी कमेटी आपस में बैठकर विचार करेगी और सहमति के बाद ही कोई बयान देगी। वहीं, पक्षकार मुख्तार अहमद अंसारी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो इस तरह लोक अदालत में मामला भेजना मुस्लिम समाज पर दबाव बनाने जैसा है।
वर्तमान में इस विवाद को लेकर वाराणसी की विभिन्न अदालतों में 36 और इलाहाबाद हाई कोर्ट में 6 मुकदमे विचाराधीन हैं। यदि कल की मध्यस्थता और अगस्त की लोक अदालत में कोई सहमति बनती है, तो अदालत उसी के आधार पर आगे का आदेश पारित करेगी, अन्यथा कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।