यूपी चुनाव के लिए एक्शन मोड में कांग्रेस, हाईकमान ने 6 राष्ट्रीय सचिवों के बीच बांटी 6 जोनों और 75 जिलों की कमान, जानें किसे मिली आपके क्षेत्र की जिम्मेदारी

यूपी चुनाव के लिए एक्शन मोड में कांग्रेस, हाईकमान ने 6 राष्ट्रीय सचिवों के बीच बांटी 6 जोनों और 75 जिलों की कमान, जानें किसे मिली आपके क्षेत्र की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और प्रदेश नेतृत्व ने राज्य के सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से पुनर्गठन करते हुए बड़ी जिम्मेदारी तय की है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के निर्देशानुसार, हाल ही में एआईसीसी सचिव नियुक्त किए गए 6 नए सह-प्रभारियों को प्रदेश के 6 प्रमुख जोनों और 75 जिलों में बांटकर सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बड़े फेरबदल के जरिए कांग्रेस पार्टी न केवल जमीनी स्तर पर बूथ और ब्लॉक समितियों को मजबूत करना चाहती है, बल्कि क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरणों को साधते हुए संगठन में नई जान फूंकने की पुरजोर कोशिश कर रही है। सभी 6 राष्ट्रीय सचिवों को अपने-अपने जोनों में तुरंत जाकर जिला-शहर कमेटियों की समीक्षा करने और आगामी 1 महीने के भीतर जमीनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

6 राष्ट्रीय सचिवों को मिली 6 जोनों की कमान: देखें पूरी सूची और जिलों का गणित

कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश के भौगोलिक और राजनीतिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य को 6 प्रमुख क्षेत्रों (जोन) में विभाजित किया है। इनमें अवध, पूर्वांचल, प्रयागराज, बुंदेलखंड-कानपुर, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र शामिल हैं। हर जोन के सह-प्रभारी सचिव को वहां के प्रमुख जिलों का सीधा प्रभार दिया गया है:

1. अवध क्षेत्र (11 जिले) – अब्दुल हन्नान:

अवध क्षेत्र की राजनीतिक और सांगठनिक कमान राष्ट्रीय सचिव अब्दुल हन्नान को सौंपी गई है। उनके अधिकार क्षेत्र में प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित कुल 11 जिले शामिल किए गए हैं। अब्दुल हन्नान के जिम्मे लखनऊ, उन्नाव, बहराइच, बाराबंकी, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई और रायबरेली रहेंगे। रायबरेली और अवध का इलाका पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, इसलिए यहां संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना उनकी प्राथमिक चुनौती होगी।

2. पूर्वांचल क्षेत्र (12 जिले) – अभिषेक दत्त:

पूर्वांचल जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र का प्रभार अनुभवी युवा नेता व राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त को दिया गया है। अभिषेक दत्त के पास सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, बलिया, संत कबीर नगर, अयोध्या और अंबेडकर नगर जैसे 12 महत्वपूर्ण जिले रहेंगे। पूर्वांचल में ओबीसी, दलित और मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए कांग्रेस इस क्षेत्र में विशेष जनाधार रैलियों और कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है।

प्रयागराज, बुंदेलखंड, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र में किसे मिली जिम्मेदारी?

3. प्रयागराज क्षेत्र (12 जिले) – वरुण चौधरी:

संगम नगरी प्रयागराज और आसपास के 12 जिलों का प्रभार राष्ट्रीय सचिव वरुण चौधरी को सौंपा गया है। उनके प्रभार वाले जिलों में वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी और सुल्तानपुर शामिल हैं। अमेठी और प्रयागराज मंडल में पार्टी कैडर को दोबारा सक्रिय करना और स्थानीय जनमुद्दों पर सघन आंदोलन खड़ा करना वरुण चौधरी के मुख्य एजेंडे में शामिल है।

4. बुंदेलखंड एवं कानपुर क्षेत्र (13 जिले) – जगदीश चंद्र जांगिड़:

औद्योगिक शहर कानपुर और सूखा प्रभावित बुंदेलखंड के 13 जिलों की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सचिव जगदीश चंद्र जांगिड़ को दी गई है। उनके पास कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरैया, जालौन, महोबा, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, हमीरपुर और इटावा जिले रहेंगे। बुंदेलखंड में किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और आवारा पशुओं के मुद्दे पर कांग्रेस बड़ा जन-अभियान चलाने की रूपरेखा तैयार कर रही है।

5. ब्रज क्षेत्र (13 जिले) – कुणाल चौधरी:

पश्चिमी-मध्य यूपी के ब्रज क्षेत्र का जिम्मा युवा नेता और राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी को सौंपा गया है। उनके पास मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कासगंज, अलीगढ़, हाथरस, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और फर्रुखाबाद जैसे 13 जिले रहेंगे। ब्रज क्षेत्र में किसान आंदोलन और युवाओं के मुद्दों को लेकर कांग्रेस एक नया माहौल बनाने की तैयारी में है।

6. पश्चिमी उत्तर प्रदेश (14 जिले) – संजीव आर्य:

किसान राजनीति और गन्ना बेल्ट के रूप में चर्चित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों की बड़ी कमान राष्ट्रीय सचिव संजीव आर्य को मिली है। उनके प्रभार वाले जिलों में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, संभल, मेरठ, बिजनौर, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और गौतम बुद्ध नगर शामिल हैं। इस क्षेत्र में विपक्षी दलों की घेराबंदी को तोड़कर कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने का प्रयास करेगी।

1 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश और राहुल-खड़गे का 'मास्टर प्लान'

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने नवनियुक्त सभी 6 सह-प्रप्रभारियों के साथ दिल्ली और लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। हाईकमान का स्पष्ट निर्देश है कि सभी सचिव बिना किसी विलंब के अपने-अपने आवंटित जिलों के दौरों पर निकलें। उन्हें जिलों में जाकर निष्क्रिय चल रहे जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की पहचान करने, नए समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे लाने और धरातल पर पार्टी की स्थिति का आकलन करने को कहा गया है।

आगामी 30 दिनों के भीतर इन सभी सचिवों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी को सौंपनी होगी। इसके आधार पर ही निष्क्रिय कमेटियों को भंग कर नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी। कांग्रेस इस बार 'संविधान बचाओ' और 'सामाजिक न्याय' के नारे के साथ युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को जोड़ने का एक व्यापक सदस्यता अभियान भी शुरू करने जा रही है।

यूपी चुनाव में कांग्रेस की रणनीति और जमीनी स्तर पर असर

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया चुनावों में मिले सकारात्मक रुझान और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA Alliance) के तहत मिली ऊर्जा को बरकरार रखने के लिए पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि केवल कागजी कमेटियों के बजाय मैदान में लड़ने वाले जुझारू कार्यकर्ताओं को ही संगठन में पद दिए जाएं।

इस नए जोन-वार और जिला-वार प्रशासनिक पुनर्गठन से यूपी कांग्रेस में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। राष्ट्रीय सचिव सीधे जिलों की गतिविधियों की निगरानी करेंगे, जिससे प्रादेशिक नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के बीच का संवाद अंतर (Communication Gap) समाप्त होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी और खड़गे द्वारा उतारे गए ये 6 नए सचिव उत्तर प्रदेश के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस के जनाधार को किस हद तक पुनर्जीवित कर पाते हैं।

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