लखनऊ अग्निकांड: कानपुर के 2 होनहार दोस्तों की भी गई जान; आग लगते ही जाम हो गए थे सेंसर वाले गेट

लखनऊ अग्निकांड: कानपुर के 2 होनहार दोस्तों की भी गई जान; आग लगते ही जाम हो गए थे सेंसर वाले गेट

कानपुर: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण और दिल दहला देने वाले अग्निकांड (Lucknow Fire Tragedy) में 15 लोगों की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी का एक और बेहद भावुक और दर्दनाक पहलू सामने आया है। मरने वालों में कानपुर के रहने वाले दो पक्के दोस्त संयम विज (24 वर्ष) और सूरजभान भी शामिल थे।

दोनों युवक इस बहुमंजिला इमारत में स्थित एक गेमिंग जोन और एनिमेशन सेंटर में बतौर 'थ्रीडी आर्टिस्ट' (3D Artist) काम करते थे। हादसे के वक्त डिजिटल सुरक्षा के लिए लगाए गए आधुनिक सेंसर वाले गेट (Sensor Gates) ही इन दोनों दोस्तों के लिए काल बन गए।

आग लगते ही ठप हुआ सिस्टम, अटक गए सेंसर गेट

संयम विज के मामा सौरभ दुआ ने रोते हुए बताया कि उनका भांजा जिस कॉम्प्लेक्स के एनिमेशन सेंटर में काम करता था, वह पूरी तरह आधुनिक था और वहां प्रवेश व निकास के लिए सेंसर वाले ऑटोमैटिक गेट लगे हुए थे।

जैसे ही नीचे की मंजिल में आग लगी और पूरी बिल्डिंग की बिजली गुल हुई, वैसे ही तकनीकी खराबी के कारण गेट के सेंसर ने काम करना बंद कर दिया। बिजली ठप होते ही ये सेंसर वाले गेट पूरी तरह जाम (Lock) हो गए। संयम, सूरजभान और उनके कई अन्य साथी बाहर निकलने के लिए गेट को खोलने का प्रयास करते रहे, लेकिन गेट टस से मस नहीं हुआ। देखते ही देखते पूरी मंजिल में जहरीला धुआं भर गया और दम घुटने के कारण दोनों दोस्तों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

दादी के शांति पाठ में घर आना था संयम, देखी जा रही थी लड़की

गोविंदनगर (ए-11) के रहने वाले 24 वर्षीय संयम विज पिछले तीन साल से लखनऊ में नौकरी कर रहे थे। परिवार में उनकी मां सोनिया और बड़ा भाई शुभम (जो नोएडा में रहता है) हैं। संयम के पिता का 15 साल पहले ही निधन हो चुका था।

परिजनों ने बताया कि 16 दिन पहले ही संयम की दादी का देहांत हुआ था, तब वह घर आया था। आज यानी मंगलवार (23 जून 2026) को दादी का शांति पाठ होना था, जिसमें शामिल होने के लिए संयम ने घर आने का वादा किया था। संयम का करियर बेहद शानदार चल रहा था और परिवार में इन दिनों उसकी शादी के लिए लड़की देखी जा रही थी, लेकिन इस हादसे ने मां के सारे अरमानों को राख कर दिया।

घर का इकलौता कमाऊ चिराग था सूरजभान

वहीं, बर्रा-7 के रहने वाले सूरजभान की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। सूरज के पिता शिवराम की पहले ही मौत हो चुकी थी। परिवार में केवल मां मीरा और छोटा भाई सम्राट हैं। सूरज ही इस परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था, जिसकी सैलरी से घर का पूरा खर्च चलता था।

मां से छिपाई गई हादसे की खबर: पड़ोसियों ने बताया कि हादसे के वक्त सूरज का छोटा भाई सम्राट ऋषिकेश घूमने गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद रिश्तेदारों ने सीधे सम्राट को फोन किया। सम्राट ने सोमवार रात तक अपनी मां मीरा को इस अनहोनी की जानकारी नहीं दी, क्योंकि वह मां का रो-रोकर बुरा हाल होने से डर रहा था। सम्राट ऋषिकेश से सीधे लखनऊ पोस्टमार्टम हाउस के लिए रवाना हुआ है, जबकि मां को बस इतनी जानकारी दी गई है कि सूरज की तबीयत खराब है।

एक ही संस्थान में काम करने और एक ही शहर (कानपुर) से होने के कारण संयम और सूरजभान में बेहद गहरी दोस्ती थी और दोनों ने दुनिया को भी एक साथ ही अलविदा कह दिया। इस घटना के बाद से कानपुर के गोविंदनगर और बर्रा इलाके में मातम पसरा हुआ है।

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