गौतम अदाणी समूह को डेटा सेंटर के लिए समानांतर बिजली लाइसेंस देने की तैयारी! विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें क्या है पूरा विवाद

गौतम अदाणी समूह को डेटा सेंटर के लिए समानांतर बिजली लाइसेंस देने की तैयारी! विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें क्या है पूरा विवाद

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और आईटी व डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने के प्रयासों के बीच एक नया बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत विवाद खड़ा हो गया है। गौतम अदाणी समूह (Adani Group) द्वारा ग्रेटर नोएडा में स्थापित किए जा रहे महत्वाकांक्षी और हाई-टेक डेटा सेंटर पार्क (Data Center Park) के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (Parallel Electricity Distribution License) देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) द्वारा इस दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों के सार्वजनिक होते ही राज्य में विरोध के स्वर भी मुखर हो गए हैं। 'उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद' ने इस पूरी प्रक्रिया को नियमों और जनहित के खिलाफ बताते हुए इसके विरोध में नियामक आयोग के समक्ष याचिका दाखिल कर दी है।

क्या है समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस और अदाणी समूह की योजना?

दरअसल, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-80 में अदाणी समूह द्वारा एक बहुत बड़ा डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है। डेटा सेंटरों को 24 घंटे बिना किसी रुकावट के उच्च गुणवत्ता वाली और भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। इसके लिए अदाणी समूह की कंपनी अदाणी इलेक्ट्रिसिटी नोएडा लिमिटेड (AENL) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में समानांतर बिजली वितरण नेटवर्क बिछाने और खुद बिजली आपूर्ति करने के लिए UPERC के पास लाइसेंस आवेदन दाखिल किया था।

समानांतर बिजली लाइसेंस का सरल अर्थ यह है कि जिस भौगोलिक क्षेत्र (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) में पहले से ही उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के तहत पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) और निजी कंपनी नोएडा पॉवर कंपनी लिमिटेड (NPCL) बिजली की आपूर्ति कर रही हैं, उसी क्षेत्र में अदाणी समूह को भी एक अलग और स्वतंत्र कंपनी के रूप में अपना बिजली ढांचा बिछाकर सीधे बिजली बेचने का अधिकार मिल जाएगा।

नियामक आयोग (UPERC) की विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 14 के तहत अदाणी समूह के इस आवेदन को स्वीकार करने और अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिस पर अब विवाद गहरा गया है।

'मुनाफे वाले औद्योगिक क्षेत्रों की मलाई छांटना बंद हो': उपभोक्ता परिषद का हमला

अदाणी समूह को समानांतर लाइसेंस दिए जाने की खबरों के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने लखनऊ में नियामक आयोग के चेयरमैन और सदस्यों से मुलाकात कर अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उपभोक्ता परिषद का मुख्य आरोप यह है कि यदि केवल ग्रेटर नोएडा के हाई-प्रॉफिट औद्योगिक और कमर्शियल डेटा सेंटर बेल्ट के लिए किसी निजी समूह को समानांतर लाइसेंस दे दिया जाता है, तो इससे राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि बिजली वितरण कंपनियों की कमाई का मुख्य जरिया बड़े औद्योगिक, कमर्शियल और डेटा सेंटर उपभोक्ता ही होते हैं। इन धनी उपभोक्ताओं से मिलने वाले राजस्व के दम पर ही सरकारी कंपनियां गांव-देहात, किसानों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती या रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध करा पाती हैं।

यदि अदाणी समूह जैसे बड़े कॉरपोरेट हाउस को केवल मलाईदार (High Revenue) औद्योगिक और डेटा सेंटर क्षेत्रों में समानांतर लाइसेंस देकर खुद बिजली बेचने की छूट दे दी जाएगी, तो सरकारी कंपनियों (PVVNL) के पास केवल घाटे वाले ग्रामीण व घरेलू उपभोक्ता रह जाएंगे। इससे अंततः उत्तर प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों पर घाटा बढ़ेगा और इसका सीधा बोझ भविष्य में राज्य के आम घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की दरों में बढ़ोतरी (Tariff Hike) के रूप में पड़ेगा।

बिजली कानून की धारा 14 और 'चेरी पिकिंग' का कानूनी सवाल

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के पूर्व के फैसलों और बिजली कानून 2003 की धारा 14 का हवाला दिया है। परिषद का कहना है कि कानून के अनुसार समानांतर लाइसेंस किसी एक विशेष औद्योगिक पार्क या चुनिंदा 2-4 सेक्टरों के लिए नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसके लिए पूरे राजस्व जिले या संपूर्ण नगर निगम क्षेत्र को लाइसेंस क्षेत्र के रूप में शामिल करना अनिवार्य होता है।

इसे तकनीकी भाषा में 'चेरी पिकिंग' (Cherry Picking) कहा जाता है—यानी पूरे क्षेत्र का दायित्व लिए बिना केवल सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले बड़े ग्राहकों को चुन लेना। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यदि अदाणी समूह नोएडा और ग्रेटर नोएडा में समानांतर वितरण लाइसेंस चाहता है, तो उसे केवल अपने डेटा सेंटर ही नहीं, बल्कि उस पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों, झुग्गी-झोपड़ियों और आम नागरिकों को भी बिजली देने की जिम्मेदारी लेनी होगी। केवल अपने निजी डेटा सेंटर को समानांतर पावर सप्लाई के लिए पूरे क्षेत्र का लाइसेंस ढांचा तैयार करना नियमों के साथ खिलवाड़ है।

क्या होगा आगे? नियामक आयोग की जनसुनवाई पर टिकीं निगाहें

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर UPERC (उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग) के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कंपनी द्वारा समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन करना कानून के तहत एक सामान्य प्रक्रिया है। आयोग नियमों, तकनीकी मानकों, वित्तीय मानकों और आम जनता की आपत्तियों पर निष्पक्षता से विचार करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला सुनाएगा।

कानूनी प्रक्रिया के तहत UPERC जल्द ही इस समानांतर लाइसेंस आवेदन पर आम जनता, उद्योगपतियों, उपभोक्ता संगठनों और बिजली कंपनियों से सुझाव व आपत्तियां मांगने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी कर जनसुनवाई (Public Hearing) का आयोजन करेगा।

ग्रेटर नोएडा में बन रहा यह डेटा सेंटर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा डेटा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। ऐसे में एक तरफ जहां राज्य सरकार इसे तेजी से पूरा कराकर निवेश आकर्षित करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ समानांतर बिजली लाइसेंस को लेकर उठा यह कानूनी व सामाजिक विरोध आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है। लखनऊ से लेकर ग्रेटर नोएडा तक इस पूरे घटनाक्रम पर बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों और आम उपभोक्ताओं की पैनी नजर बनी हुई है।

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