'अल्लाह का शुक्र है, होर्मुज में खड़ी कर दी है स्टील की दीवार!' डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, क्या अमेरिका-ईरान जंग के बीच ठप होगा दुनिया का समुद्री तेल व्यापार?
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के दौरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर एक नया और बड़ा जुबानी तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को 'स्टील की दीवार' (Wall of Steel) करार देते हुए कहा कि अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना कब्जा आगे भी बरकरार रखेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में आगे लिखा, "होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। मुझे लगता है कि हम इसे आगे भी इसी तरह बनाए रखेंगे! हमारी नौसैनिक नाकेबंदी को हर कोई 'स्टील की दीवार' कह रहा है और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। कभी मिडिल ईस्ट का दादा बनने की कोशिश करने वाला ईरान अब पूरी तरह लाचार हो चुका है। अल्लाह का शुक्र है!" ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वही जलमार्ग है जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) का लगभग 20 प्रतिशत और एलएनजी का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
300 फीसदी महंगाई और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था: ट्रंप ने ईरान पर कसा तंज
डोनाल्ड ट्रंप ने केवल नाकेबंदी का ही दावा नहीं किया, बल्कि ईरानी अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य क्षमताओं की मौजूदा खस्ताहाली पर भी तीखे तंज कसे। ट्रंप ने लिखा कि फरवरी से जारी युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान का पूरा ढांचा तबाह हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान में इस समय महंगाई दर 300 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है और वहाँ की आम जनता भुखमरी तथा आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रही है।
इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर हमला बोलते हुए कहा कि ईरान के पास अब न तो प्रभावी नौसेना बची है और न ही वायुसेना। उन्होंने कहा कि आईआरजीसी के सैनिक बिना वेतन के भाग रहे हैं और ईरानी नेतृत्व की स्थिति बेहद अनिश्चित हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब जमीनी ताकत के नाम पर कुछ नहीं बचा है और वह केवल 'फेक न्यूज' फैलाने तथा बड़ी-बड़ी बातें करने तक सीमित रह गया है।
ईरान का तीखा पलटवार: "दावों और ट्वीट्स से नहीं बदलेगी जमीनी हकीकत"
डोनाल्ड ट्रंप के इस सनसनीखेज दावे के सामने आते ही ईरान की ओर से भी बेहद कड़ा और त्वरित पलटवार देखने को मिला। तेहरान स्थित 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के नियंत्रण वाले दावे को पूरी तरह से काल्पनिक और झूठा करार दिया। ईरानी अथॉरिटी ने साफ कहा कि अमेरिकी नेताओं के बार-बार किए जाने वाले बयानों या सोशल मीडिया पोस्ट से समुद्र की वास्तविक स्थिति नहीं बदलने वाली है।
ईरान ने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी अनिश्चितता के दौर में है और यह रणनीतिक जलमार्ग तब तक सामान्य व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खुलेगा जब तक कि वॉशिंगटन, तेहरान की मांगों और शर्तों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं कर लेता। ईरानी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका द्वारा दिखाई जा रही आक्रामकता ही इस पूरे क्षेत्र में शांति और मुक्त नौवहन के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है।
तेहरान की 6 सख्त शर्तें और ओमान के साथ जारी बातचीत
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने तेहरान का रुख बिल्कुल साफ करते हुए अमेरिका के सामने 6 प्रमुख शर्तें रख दी हैं। रेजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य आक्रामकता और नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म नहीं करता, विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी वित्तीय संपत्तियों को अनफ्रीज नहीं करता और क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम पर सहमत नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
इसी बीच, ईरान ने यह भी खुलासा किया है कि वह पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर इस जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक वैकल्पिक और सहमत समुद्री चैनल (Designated Shipping Route) तैयार करने के बेहद करीब है। प्रस्तावित योजना के तहत आने वाले जहाजों के लिए ईरान के तटीय पानी और जाने वाले जहाजों के लिए ओमान के तटीय पानी का उपयोग करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि ओमान के साथ बातचीत केवल एक व्यावहारिक व्यवस्था है, और इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अमेरिका बिना शर्तें माने होर्मुज पर अपना वर्चस्व बना सकता है।
रोज गुजरते थे 140 जहाज, अब घटकर रह गए महज 8: ठप पड़ा वैश्विक व्यापार
इस जारी सैन्य संघर्ष और अमेरिकी-ईरानी गतिरोध का सबसे भयानक असर वैश्विक व्यापार और जहाजरानी उद्योग पर पड़ा है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सामान्य दिनों में जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना औसतन 130 से 140 बड़े टैंकर और मालवाहक जहाज गुजरते थे, वहाँ हाल ही में एक दिन में केवल 8 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई है।
वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने बीमा दरों में भारी बढ़ोतरी और मिसाइल हमलों के डर से अपने जहाजों को होर्मुज के रास्ते भेजने से रोक दिया है। इसके कारण एशिया, यूरोप और अमेरिका के बीच कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य व्यापारिक वस्तुओं की सप्लाई चेन पूरी तरह से चरमरा गई है। अगर यह गतिरोध और लंबा खींचता है, तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है।
समुद्री मोर्चे पर मिसाइल हमले और अमेरिकी सेंट्रल कमान का कड़ा रुख
जमीन पर जारी जुबानी जंग के साथ-साथ समंदर में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण और हिंसक बनी हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उसकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी (Blockade) को पूरी तरह से लागू कर रही है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना के एक सैन्य हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कमर्शियल कार्गो जहाज 'M/V वेला नोवा' पर मिसाइल दागकर उसे रोक दिया, क्योंकि अमेरिकी दावों के मुताबिक यह जहाज ईरानी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
दूसरी तरफ, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी वाणिज्यिक जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले तेज कर दिए हैं। हाल ही में हूती मिसाइल हमले में एक व्यापारिक जहाज के 6 क्रू मेंबर्स की मौत की खबर आई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी जैसे मध्यस्थ भी तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू कराने की कोशिशों में जुटे हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के कड़े रुख के कारण अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
क्या खत्म होगी जंग या और गहराएगा वैश्विक तेल संकट?
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'अल्लाह का शुक्र है, होर्मुज में खड़ी कर दी है स्टील की दीवार' का बयान देकर जीत का दावा करना यह दर्शाता है कि अमेरिका इस युद्ध में ढील देने के मूड में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान अपनी शर्तों पर अडिग रहकर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती दे रहा है।
दुनिया भर के अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ इस बात से चिंतित हैं कि अगर दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' पर जल्द ही शांति स्थापित नहीं हुई, तो इसका खामियाजा केवल अमेरिका या ईरान को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा। फिलहाल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लहरों पर अमेरिका की 'स्टील की दीवार' और ईरान की 'शर्तों की ढाल' के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।