'भैया आ रहे हैं... तुम्हारे भैया आए थे तो कितने दंगे हुए?': कानपुर में अखिलेश यादव पर बरसे असदुद्दीन ओवैसी; मुजफ्फरनगर हिंसा याद दिला सपा को घेरा

'भैया आ रहे हैं... तुम्हारे भैया आए थे तो कितने दंगे हुए?': कानपुर में अखिलेश यादव पर बरसे असदुद्दीन ओवैसी; मुजफ्फरनगर हिंसा याद दिला सपा को घेरा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सूबे के सियासी अखाड़े में जोरदार दस्तक दे दी है। कानपुर के ऐतिहासिक बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP) और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला। सपा के चर्चित चुनावी नारे "2027 में भैया आ रहे हैं" पर कड़ा तंज कसते हुए ओवैसी ने अखिलेश सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों की फेहरिस्त गिना दी और पूछा कि जब "भैया" सत्ता में आए थे, तब प्रदेश में कितने दंगे हुए थे और कितना नुकसान हुआ था? ओवैसी के इस तीखे तेवर से उत्तर प्रदेश की मुस्लिम सियासत और विपक्षी खेमे में भारी खलबली मच गई है।

मुजफ्फरनगर कांड में 50 हजार लोग हुए थे बेघर—ओवैसी का सपा पर वार

मंच से गरजते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल का जिक्र करते हुए मुजफ्फरनगर दंगों की दुखद यादें ताजा करा दीं। ओवैसी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, "2027 का चुनाव आ रहा है तो सब कह रहे हैं कि 'भैया आ रहे हैं'। अच्छा, तुम्हारा भैया आया था तो क्या हुआ था? कितने दंगे हुए थे? मैं तुम्हें याद दिलाना चाहता हूं कि जब अखिलेश सीएम थे, तब मुजफ्फरनगर का खूनी कांड हुआ था। उस दंगे में 50 हजार से ज्यादा लोग अपने ही घर, गांव और जमीन से बेघर हो गए थे। देश के विभाजन (पार्टीशन) में भी इतने बड़े पैमाने पर लोग एक साथ बेघर नहीं हुए थे।"

ओवैसी ने सवाल किया कि जो दल खुद को अल्पसंख्यकों और धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा रहनुमा बताते हैं, उनके शासन में कौम को सिर्फ खौफ, पलायन और आंसू मिले। उन्होंने भीड़ से पूछा कि सपा के राज में कितने मुस्लिम सांसदों और विधायकों ने अपने ही लोगों के अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठाई थी।

'मुझे बी-टीम कहने वाले बताएं, 70% मुसलमानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन?'

अक्सर विपक्षी दलों द्वारा AIMIM को भाजपा की 'बी-टीम' बताए जाने के आरोपों पर ओवैसी ने मंच से खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की जो बदहाली है, उसके लिए वे तमाम पार्टियां जिम्मेदार हैं जिन्हें आप दशकों से एकतरफा वोट देते आए हैं। यूपी में 15 साल से अधिक उम्र के 70 प्रतिशत मुसलमान अपनी प्राथमिक शिक्षा तक पूरी नहीं कर पाते। अस्पतालों, नौकरियों और कारोबार में उनकी हिस्सेदारी न के बराबर है। क्या इसकी जिम्मेदारी भी असदुद्दीन ओवैसी पर है जिसे तुम बी-टीम कहते हो?"

ओवैसी ने जनता से अपील की कि वे केवल चुनाव के समय डर के आधार पर वोट न दें, बल्कि अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से स्कूल, कॉलेज, सड़क, रोजगार और विकास का पूरा हिसाब मांगें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सैफई में मेडिकल कॉलेज और हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) बन सकती है, तो मुस्लिम बहुल इलाकों और आजमगढ़ जैसे जिलों में बुनियादी विकास क्यों अधूरा रह गया?

भाजपा को रोकना है तो साथ आएं: विपक्षी दलों को 2 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम

सपा पर तीखे प्रहार के बीच ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव भी चला। उन्होंने विपक्षी दलों (सपा और कांग्रेस) के सामने गठबंधन का खुला प्रस्ताव रख दिया। ओवैसी ने कहा, "हम भी नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने। हमने तमाम विपक्षी सियासी साथियों से साफ कहा है कि अगर आप वाकई भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं, तो AIMIM से हाथ मिलाइए।"

इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन के लिए एक तय समयसीमा मुकर्रर करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी। ओवैसी ने कहा कि वे विपक्षी दलों के फैसले का 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक इंतजार करेंगे। यदि 2 अक्टूबर तक गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है, तो AIMIM उसी दिन अपने अगले राजनीतिक कदम का स्वतंत्र रूप से ऐलान कर देगी और पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद कोई भी दल मुस्लिम वोटों के बंटवारे का रोना न रोए।

बर्रा कब्रिस्तान कार्रवाई और जेन-जी युवाओं पर बोले ओवैसी

जनसभा में ओवैसी ने कानपुर के स्थानीय बर्रा कब्रिस्तान में प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का मुद्दा भी पूरी शिद्दत से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचीन कब्रिस्तान की कब्रों पर बुलडोजर चलाकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई गईं। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के नियमों के तहत किसी भी निर्माण को हटाने से पहले 15 दिन का नोटिस और सुनवाई का मौका मिलना अनिवार्य है, लेकिन प्रशासन ने महज 24 घंटे का समय देकर एकतरफा कार्रवाई कर दी।

इसके अलावा, नौजवानों को लामबंद करते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य अब जेन-जी (Gen Z) के कंधों पर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक हकों के लिए किसी के सामने झुकने के बजाय सीना तानकर खड़े हों। कानपुर में ओवैसी की इस भारी जनसभा और अखिलेश यादव पर किए गए तीखे हमलों ने यह साफ कर दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण और दावेदारी को लेकर 'इंडिया' गठबंधन और मजलिस के बीच घमासान बेहद दिलचस्प होने वाला है।