अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हुईं भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ: बोलीं- 'सरकार बदलने के बाद भी नहीं घटा भ्रष्टाचार'

अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हुईं भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ: बोलीं- 'सरकार बदलने के बाद भी नहीं घटा भ्रष्टाचार'

पश्चिम बंगाल की सियासत में उस समय हलचल मच गई जब भारतीय जनता पार्टी की विधायक रत्ना देबनाथ ने अपनी ही पार्टी की सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर दिया। कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था को लेकर देबनाथ ने सार्वजनिक बयान देते हुए कहा कि राज्य में सरकार बदलने के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है।

उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा, "भले ही सरकार बदल गई हो, लेकिन प्रशासनिक कुर्सियों पर अब भी वही पुराने भ्रष्ट तत्व काबिज हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं। व्यवस्था में जिस पारदर्शिता की उम्मीद जनता कर रही थी, वह अभी तक देखने को नहीं मिली है।" भाजपा विधायक द्वारा अपनी ही सत्ता के खिलाफ दिया गया यह तीखा बयान अब राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

सीबीआई (CBI) की सुस्त जांच पर तीखे तेवर: "काम नहीं कर सकते तो पद छोड़ें अधिकारी"

देबनाथ ने न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए, बल्कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा किया। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के चर्चित दुष्कर्म एवं हत्याकांड तथा वित्तीय घोटालों की केंद्रीय जांच पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी इस मामले में कोई ठोस प्रगति करने में विफल रही है।

  • जांच एजेंसी की विफलता का आरोप: विधायक ने दावा किया कि उनके परिवार ने कभी भी इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग नहीं की थी।

  • अधिकारियों को नसीहत: उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "यदि केंद्रीय जांच अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों और कर्तव्य का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें बिना देरी किए अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।"

  • साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश: उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में अगर सभी संदिग्धों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया होता और सबूतों को मिटाने की छूट न दी गई होती, तो आज जांच की तस्वीर कुछ और होती। तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों और मुख्य साजिशकर्ताओं को अभी तक कानून के शिकंजे में पूरी तरह न ला पाना जांच की गंभीर खामी को दर्शाता है।

पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की जमानत पर जताया गहरा ऐतराज

विधायक रत्ना देबनाथ ने अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को भ्रष्टाचार के एक मामले में उच्चतम न्यायालय से जमानत दिए जाने के घटनाक्रम पर भी भारी असंतोष प्रकट किया।

  • उल्लेखनीय है कि संदीप घोष पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी, अवैध टेंडरों के आवंटन और मेरिट सूची में छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को पलटते हुए 17 अक्टूबर को घोष को राहत दिए जाने के बाद से ही पीड़ितों और सामाजिक संगठनों में रोष बना हुआ है।

  • देबनाथ ने कहा कि ऐसे मुख्य आरोपियों को कानूनी तकनीकी पहलुओं के आधार पर राहत मिलना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

12 नवंबर को सीबीआई दफ्तर तक महा-मार्च की घोषणा

सीबीआई की कथित निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब नागरिक समाज और विभिन्न अधिकार संगठन आर-पार की लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।

  • 'वॉयस ऑफ अभया' और 'वॉयस ऑफ वुमेन' जैसे संगठनों ने 12 नवंबर को आरजी कर मेडिकल कॉलेज से साल्ट लेक स्थित सीबीआई कार्यालय (CGO कॉम्प्लेक्स) तक एक विशाल विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है।

  • विधायक देबनाथ ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। आयोजकों का स्पष्ट कहना है कि साक्ष्यों को दबाने या जांच को धीमा करने के किसी भी प्रयास के बावजूद जनता न्याय मिलने तक चुप नहीं बैठेगी।