सुनेत्रा पवार क्या हो रहीं दरकिनार? एनसीपी के 6 दिग्गज नेताओं ने दिल्ली में अमित शाह से की गुप्त मुलाकात
महाराष्ट्र की महायुति सरकार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर एक बार फिर सियासी भूचाल की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एनसीपी के छह सबसे वरिष्ठ नेताओं के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गोपनीय बैठक की। इस बैठक की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इसमें महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके सांसद पुत्र पार्थ पवार पूरी तरह नदारद रहे।
बैठक में एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे शामिल थे। शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति में वरिष्ठ नेताओं के सीधे दिल्ली दरबार पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म हो गई कि क्या पार्टी संगठन में सुनेत्रा पवार और उनके परिवार को धीरे-धीरे दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।
अमित शाह के सामने एनसीपी नेताओं ने कौन-कौन सी मांगें रखीं?
सूत्रों और पार्टी के अंदरूनी बयानों के अनुसार, अमित शाह के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों और मांगों पर चर्चा हुई:
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वित्त मंत्रालय (Finance Portfolio) की वापसी की मांग:
एनसीपी नेताओं ने गृह मंत्री के समक्ष पुरजोर मांग रखी कि महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय पारंपरिक रूप से एनसीपी के पास रहा है, इसलिए यह विभाग पार्टी को वापस सौंपा जाना चाहिए। सुनील तटकरे ने भी बैठक के बाद स्वीकार किया कि सरकार में विभागों के आवंटन और विशेषकर वित्त मंत्रालय को एनसीपी के कोटे में दिए जाने का विषय प्रमुखता से उठाया गया है।
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सामूहिक नेतृत्व और संगठन में समन्वय की कमी:
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि नेताओं ने पार्टी संगठन में 'सामूहिक नेतृत्व' (Collective Leadership) की कमी और फैसलों में आ रही दिक्कतों को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। उनका कहना था कि संगठनात्मक स्तर पर समन्वय न होने के कारण जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावी रणनीतियों और महायुति के संतुलन पर पड़ सकता है।
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महायुति में एनसीपी का सम्मानजनक स्थान:
नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ गठबंधन में एनसीपी के मंत्रियों और विधायकों के नीतिगत फैसलों व विकास कार्यों की फाइलों को प्राथमिकता दी जाए।
अमित शाह की दो-टूक नसीहत: "पहले संगठन मजबूत करें, अंदरूनी कलह से महायुति पर पड़ेगा असर"
बैठक से जुड़े सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनसीपी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुना, लेकिन साथ ही उन्हें कड़े शब्दों में हिदायत भी दी।
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शाह ने स्पष्ट किया कि एनसीपी संगठन के भीतर की खींचतान केवल पार्टी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पूरी महायुति सरकार की छवि और स्थिरता पर पड़ेगा।
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उन्होंने नेताओं से 'कमर कसने' और आपसी मतभेद भुलाकर एक स्वर में काम करने को कहा।
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साथ ही यह संकेत भी दिया कि भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम और एनसीपी के आंतरिक समीकरणों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी पर पार्टी की औपचारिक सफाई
सुनेत्रा पवार को दरकिनार किए जाने की अटकलों पर विवाद गहराते ही एनसीपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पाटिल ने सार्वजनिक बयान जारी कर इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया।
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पूर्व-निर्धारित बैठक का तर्क: प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि दिल्ली की यह बैठक पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुई थी और इसे पार्टी में किसी फूट या कलह के रूप में देखना पूरी तरह भ्रामक और निराधार है।
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पहले हो चुकी थी मुलाकात: पाटिल के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार पहले ही दिल्ली में अमित शाह से मिलकर पार्टी से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा कर चुके थे। सुनेत्रा पवार को इस प्रतिनिधिमंडल की बैठक की पूरी पूर्व-सूचना थी।
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एकजुटता का दावा: प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने भी दोहराया कि पूरी पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है और शरद पवार गुट के साथ किसी भी प्रकार के विलय (Merger) की संभावनाओं पर पूरी तरह विराम लग चुका है।
मुंबई में बुलाई गई कोर कमेटी की बैठक
दिल्ली की इस सरगर्मी के फौरन बाद महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार ने अपने आधिकारिक आवास 'देवगिरि' में पार्टी के कोर नेताओं और विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पार्टी सार्वजनिक रूप से सब कुछ सामान्य दिखाने का प्रयास कर रही हो, लेकिन शीर्ष नेताओं द्वारा सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संवाद साधना यह संकेत देता है कि मंत्रालय आवंटन और नेतृत्व के तौर-तरीकों को लेकर पार्टी की अंदरूनी परतें पूरी तरह शांत नहीं हैं।