थाईलैंड में मगरमच्छ का मांस खाकर क्यों फंसे उज्जैन के नगर निगम अधिकारी? वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल
धार्मिक नगरी उज्जैन के नगर पालिका निगम में बतौर भवन अधिकारी (इंजीनियर) पदस्थ राजकुमार राठौर की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इंटरनेट और प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। राजकुमार राठौर अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड टूर पर गए थे, जहां के एक स्थानीय फूड मार्केट या रेस्तरां में उन्होंने मगरमच्छ का मांस चखा। उन्होंने बाकायदा अपनी इस गतिविधि का एक वीडियो रिकॉर्ड कराया और उसे इंस्टाग्राम व सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इस वीडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से कैप्शन लिखा गया था—'Trying crocodile for the first time in Thailand' (थाईलैंड में पहली बार मगरमच्छ का मांस चख रहे हैं)। वीडियो में काउंटर पर मगरमच्छ के जबड़े सजे दिखाई दे रहे थे और प्लेट में उसके बने व्यंजन का स्वाद लेते हुए अधिकारी नजर आ रहे थे। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, यह जंगल की आग की तरह फैल गया और लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।
केवल खाने का शौक नहीं, असली पेंच है सरकारी नियमों का उल्लंघन
शुरुआती तौर पर लोगों का ध्यान भले ही इस बात पर गया कि अधिकारी ने मगरमच्छ का मांस खाया, लेकिन प्रशासन के स्तर पर उनके फंसने की सबसे बड़ी और कानूनी वजह कुछ और ही है। मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के अनुसार, कोई भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिए बिना देश की सीमा से बाहर यानी विदेश यात्रा पर नहीं जा सकता। जानकारी के अनुसार, राजकुमार राठौर ने 19 से 23 अक्टूबर के दौरान अपने विभाग से अवकाश (लीव) का आवेदन तो दिया था, लेकिन उन्होंने अपने आवेदन में यह कतई नहीं बताया था कि वे देश छोड़कर थाईलैंड जा रहे हैं। उन्होंने सामान्य छुट्टी की आड़ में बिना विभागीय क्लीयरेंस लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरी, जिसे सरकारी सेवा शर्तों और अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
नगर निगम कमिश्नर और महापौर का कड़ा रुख, जांच के आदेश
वीडियो सामने आते ही उज्जैन नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों ने इस मामले पर सख्त रुख अपना लिया है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने साफ किया है कि भवन अधिकारी ने अवकाश के दौरान विदेश जाने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली थी, जो कि सेवा नियमावली का सीधा उल्लंघन है। इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है कि उन्होंने विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट और जरूरी अनुमति की प्रक्रिया पूरी की थी या नहीं। वहीं उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी के व्यक्तिगत खानपान पर वे टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन एक जिम्मेदार सरकारी पद पर रहते हुए बिना शासन को सूचित किए विदेश चले जाना बेहद गंभीर मामला है और इस पर विधि सम्मत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वेतनवृद्धि रुकने और पदोन्नति पर लग सकती है रोक
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आचरण नियमों की अनदेखी करने के आरोप में अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यदि जांच में यह प्रमाणित हो जाता है कि उन्होंने सक्षम अधिकारी को अंधेरे में रखकर अनाधिकृत रूप से विदेश यात्रा की, तो उन पर कड़ा विभागीय दंड लगाया जा सकता है। इसमें वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) पर अस्थायी या स्थायी रोक लगाना, सेवा पुस्तिका में निंदा प्रविष्टि (Censure) दर्ज करना अथवा भविष्य में मिलने वाली पदोन्नति (प्रमोशन) को बाधित करने जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाइयां शामिल हो सकती हैं। सोशल मीडिया पर 'कूल' दिखने की चाहत और रोमांच के चक्कर में पोस्ट की गई एक छोटी सी रील ने अब एक क्लास-टू स्तर के अफसर के पूरे करियर पर सवालिया निशान लगा दिया है।