नेशनल हाईवे पर जल्द खत्म होंगे पारंपरिक टोल प्लाजा! सैटेलाइट आधारित GNSS सिस्टम की तैयारी

नेशनल हाईवे पर जल्द खत्म होंगे पारंपरिक टोल प्लाजा! सैटेलाइट आधारित GNSS सिस्टम की तैयारी

राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें और बार-बार रुकने की झंझट जल्द ही इतिहास बनने वाली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के राजमार्गों से पारंपरिक टोल बूथ और बूम बैरियर्स को चरणबद्ध तरीके से हटाने की व्यापक रूपरेखा तैयार कर ली है।

इस नई व्यवस्था के तहत वाहनों को टोल टैक्स देने के लिए किसी भी टोल प्लाजा पर अपनी गति धीमी करने या रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके स्थान पर सरकार ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) पर आधारित आधुनिक 'मल्टी-लेन फ्री-फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है।

'जितना चलो, उतना भरो': कैसे काम करेगा नया सैटेलाइट टोल सिस्टम?

मौजूदा समय में FASTag व्यवस्था के तहत यदि कोई वाहन चालक किसी नेशनल हाईवे पर केवल 5 या 10 किलोमीटर का सफर तय करके भी टोल प्लाजा को पार करता है, तो उसे पूरे 60 किलोमीटर के ब्लॉक का एकमुश्त फिक्स्ड टोल चुकाना पड़ता है। नई सैटेलाइट तकनीक इस विसंगति को पूरी तरह समाप्त कर देगी:

  1. जियो-फेंसिंग (Geo-fencing): राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के पूरे नेटवर्क को सैटेलाइट मैपिंग के जरिए डिजिटल रूप से 'जियो-फेंस' किया जाएगा।

  2. ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) और सैटेलाइट ट्रैकिंग: वाहनों में लगे जीपीएस/जीएनएसएस डिवाइस (OBU) या इन-बिल्ट व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से सैटेलाइट यह ट्रैक करेगा कि वाहन ने किस बिंदु से हाईवे पर प्रवेश किया और कहां से बाहर निकला।

  3. सटीक दूरी के आधार पर कटौती: वाहन द्वारा तय की गई वास्तविक दूरी (किलोमीटर) के आधार पर टोल टैक्स की गणना होगी और वह राशि वाहन स्वामी के लिंक्ड बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से सीधे व स्वतः कट जाएगी।

  4. बिना रुके निर्बाध यात्रा: हाईवे पर कोई भौतिक बैरियर न होने के कारण वाहन अपनी सामान्य गति (100–120 किमी/घंटा) से बिना रुके फर्राटा भर सकेंगे, जिससे ईंधन और यात्रा के समय दोनों की भारी बचत होगी।

यह व्यवस्था सबसे पहले कहां और किन रूट्स पर लागू होगी?

मंत्रालय ने इस तकनीक को सीधे पूरे देश में थोपने के बजाय चरणबद्ध तरीके से परीक्षण और पायलट प्रोजेक्ट्स के आधार पर लागू करने की रणनीति बनाई है:

  • शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट्स: सरकार ने इस तकनीक का शुरुआती परीक्षण कर्नाटक के बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) और हरियाणा में पानीपत-हिसार नेशनल हाईवे (NH-709) पर सफलतापूर्वक किया है। इसके अलावा स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) के चुनिंदा हिस्सों पर भी इसका परीक्षण किया जा चुका है।

  • पहले चरण का दायरा: प्रथम चरण में यह व्यवस्था नए बने एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे (जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़े राष्ट्रीय गलियारे) और भारी वाणिज्यिक वाहनों (ट्रक और बसों) पर लागू की जाएगी, क्योंकि अधिकांश नए वाणिज्यिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) पहले से अनिवार्य हैं।

  • IIT कानपुर को तकनीकी जिम्मेदारी: मंत्रालय ने भारतीय सड़कों, भौगोलिक परिस्थितियों और डेटा प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस प्रणाली को चाक-चौबंद बनाने के लिए IIT कानपुर में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया है, जो इस पूरे सिस्टम के तकनीकी सुरक्षा और सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है।

क्या FASTag तुरंत बंद हो जाएगा?

नहीं, आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए FASTag प्रणाली तुरंत बंद नहीं होगी।

  • हाइब्रिड मॉडल: शुरुआती संक्रमण काल में FASTag और GNSS दोनों प्रणालियां एक साथ मिलकर काम करेंगी।

  • समर्पित लेन: टोल प्लाजा पर कुछ लेनों को विशेष रूप से 'GNSS फ्री-फ्लो लेन' के रूप में चिन्हित किया जाएगा, जहां बिना रुके वाहन निकल सकेंगे।

  • ANPR कैमरों का बैकअप: यदि किसी गैर-जीपीएस गाड़ी की नंबर प्लेट से टैक्स कटना है, तो हाई-डेफिनिशन ANPR कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करके लिंक्ड फास्टैग खाते से पैसा काट लेंगे।सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक देश के अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह से बैरियर-मुक्त सैटेलाइट टोल नेटवर्क में परिवर्तित करने का है।

आम वाहन चालकों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

  • टोल नाकों की भीड़ से मुक्ति: पीक आवर्स या त्योहारी सीजन में टोल बूथों पर लगने वाली 15 से 30 मिनट की लंबी कतारें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

  • किफायती सफर: यदि आप हाईवे पर 60 किमी के बजाए सिर्फ 12 किमी चलते हैं, तो आपको केवल 12 किमी का ही आनुपातिक टोल देना होगा, जिससे स्थानीय और कम दूरी तय करने वालों की जेब पर बोझ घटेगा।

  • ईंधन व पर्यावरण की बचत: टोल प्लाजा पर बार-बार गाड़ी को आइडल (स्टार्ट) रखने और ब्रेक-एक्सीलरेटर के प्रयोग से होने वाली ईंधन की बर्बादी और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।